Wednesday, June 10, 2020

प्रभु यीशु मसीह का भोजन

यीशु ने उन से कहा, मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं। (युहन्ना 4:34)
प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य नाम में सभी भाई बहनों को आपके भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...
दोस्तों... प्रभु यीशु के लिए आवश्यक शारीरिक भोजन से भी अधिक महत्वपूर्ण कुछ और भोजन था...वो था परमेश्वर का वचन...उन्होने कहा था *मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा* (मत्ती 4:4) ...उनका कहना और करना वास्तव में एक समान था....परमेश्वर का वचन...अर्थात परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने, नरक में जा रही आत्माओं को बचाने और परमेश्वर के राज्य की स्थापना करने के लिए उन्होंने कहा *“उसके घर की धुन मुझे खा जाएगी”* (यूहन्ना 2:17)...
ऐसी ही एक घटना हम सामरिया गाँव में पाते हैं...आज प्रभु यीशु अपने शिष्यों के साथ एक लंबी पद यात्रा, यहूदिया और गलील से होते हुए इस गाँव में पहुंचे हैं...दोपहर के इस चिलचिलाती गर्मी में चेलों को कहने की जरूरत नहीं क्या करना चाहिए...गाँव के बाहर एक कुआं है...लेकिन पानी भरने को कोई साधन नहीं...वो दौड़ते हैं गाँव की कोई दूकान से कहीं से कुछ खाने का इंतजाम हो जाए...प्रभु अकेले कुएं के पास बैठे हैं...इससे पहले चेले आते... एक स्त्री वहां कुँए के पास आती है, पानी भरने...तभी सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज आती है ”मुझे पानी पिला”... और वो पापिन स्त्री जो दुनिया से छिपती छिपाती आज तक जी रही थी...आज उसकी मुलाक़ात जीवन का जल देने वाले खुदा से होती है...वो पहचान जाती है वो प्यासा व्यक्ति जिसने उसके भूत भविष्य सबका खुलासा कर दिया वो और कोई नहीं, वो मसीहा ही है, जिसका सारे पापी मानव को इन्तजार है...ये वो ही है जो पाप में मरती हुई प्यासी आत्माओं को जीवन का वो पानी पिलाता है जो अनन्तकाल का सुख देता है...वो मारे आनन्द से भागी... भाव विभोर होकर...अपना मटका, अपनी रस्सी छोड़कर भागी...इससे पहले देर हो जाए...मेरे गाँव को भी वो जीवन जल मिलना चाहिए...मेरे गाँव की भी उस खुदा से मुलाक़ात होनी चाहिए....अब उसे केवल अपनी चिंता नहीं...अपने मटके अपनी रस्सी की चिंता नहीं....सुनो.. सुनो... सुनो... गाँव वालो आज मैंने खुदा को देखा है...आज मैं जीवन दाता से मिली हूँ...मेरे मसीहा से मिली हूँ ...पल भर में पूरा का पूरा गाँव इकट्टा हो गया....
तभी चेले खाना लेकर वापस आते हैं...और सामने यह अद्भुत मंजर देखकर...धीरे से हिम्मत करके रोटी आगे बढाते हुए एक शिष्य कहता है ...प्रभु खाना....प्रभु के चेहरे से जैसे सारी थकान दूर हो चुकी है...अब मुझे इस रोटी की आवश्यकता नहीं....लोगो को जीवन जल मिल गया...और जो मुझे चाहिए था वो मेरा भोजन मिल गया....”मेरा भोजन यह है कि अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करूँ और उसका कार्य पूरा करूँ...आओ उसके भोजन का इंतजाम करें...आओ मिलकर उसका काम पूरा करें....प्रभु में आपका अपना भाई राजेश....

No comments:

Post a Comment

Thanks for Reading... यदि आपको ये कहानी अच्छी लगी है तो कृपया इसे अपने मित्रो को शेयर करें..धन्यवाद

तोड़े को तुरंत इस्तेमाल करें ....

*तब जिस को पांच तोड़े मिले थे, उस ने तुरन्त जाकर उन से लेन देन किया, और पांच तोड़े और कमाए।*(मत्ती 25:16) प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य ना...

Followers