Friday, June 5, 2020

प्रभु में हियाव बांधें (भरोषा रखें )

“दाऊद बड़े संकट में पड़ा..... परन्तु दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण करके हियाव बान्धा (1 इतिहास 30:6)

प्रभु यीशु के अतुल्य नाम में सभी को आपके भाई राजेश का  प्यार भरा जय मसीह की l दोस्तों एक व्यक्ति का सब कुछ उसकी आस होती है, उसकी आस गई तो वह आदमी खत्म समझो..और हर व्यक्ति कभी न कभी उस दौर से होकर गुजरता है जब उसे लगता है उसकी आस खत्म हो रही है...जब सब कुछ मुठ्ठी की रेत के समान हाथ से छूटता प्रतीत होता है...ऐसे समय में मनुष्यों के मीठे मीठे जुमले कोई काम नहीं आते...उस समय कुछ ईश्वरीय प्रोत्साहन की कुछ अद्भुत उत्साह की आवश्यकता होती है....
कुछ ऐसा ही एक वाकया राजा दाउद के जीवन में पाते है जब वह युद्ध से लौटता है तो सिकलग नामक स्थान में जहाँ उसने अपनी पत्नी और बच्चों को सुरक्षित छोड़कर गया था वो स्थान जल कर ख़ाक हो चूका है उसे एक पल लगता है मानो सब कुछ उजड़ गया...उसे लगा उसकी दुनिया ही खत्म हो गई...वो अपने साथियों के साथ उसी स्थान में इतना विलाप करता है इतना रोता है की और रोने को उसके पास आंसू भी नहीं रहते...तभी उसके अपने लोग भी उसके विरुद्ध पत्थर उठा कर राजा दाउद को मार डालना चाहते हैं...निराशा पर निराशा, दुःख पर दुःख...कहते हैं बाहर का दुःख एक बार सहन हो जाता है लेकिन अपने जब दुःख देने लगे...तो कौन सह सकता है....
लेकिन ऐसे भयंकर घोर विलाप में दाउद अपने खुदा को अपने सृजनहार को अपने आशा के दाता को देखता है और उससे बल पाकर हियाव बांधता है...स्मरण रहे जब सारे दरवाजे तुझे बंद दिखे समझो नया द्वार खोला है प्रभु ने...और तब दाउद को पता चलता है उसके बच्चे और पत्नी मरे नहीं है बल्कि बन्धुआई में चले गए हैं उन्हें कैद कर लिया गया है...और परमेश्वर से बल पाकर वह अपने बच्चों और पत्नी समेत सारा धन माल भी छुड़ा लाया(1 इतिहास 30:19)...दोस्तों कैसी भी परिस्थिति क्यों न आए स्मरण रहे कभी न छोड़ने वाला न त्यागने वाला परमेश्वर ने हमसे वायदा किया है, मत डर मैं तेरे साथ हूँ...प्रभु इन वचनों के द्वारा आपको आशीष दे. आपका अपना भाई राजेश 

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