Friday, June 5, 2020

परमेश्वर के संग रहने की आशीषे


दाउद की बढ़ाई  अधिक होती गई, और सेनाओं का परमेश्वर यहोवा उसके संग रहता था (2 शमुएल 5:10) 


प्रभु यीशु के अतुल्य नाम में सभी को आपके भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...दोस्तों एक राज्य उठता और गिरता है वहां के अगुवे के द्वारा.. और वो अगुवा सफल होता है या असफल ये उसके परमेश्वर के साथ सम्बन्ध पर निर्भर होता है...दाउद तरक्की पर तरक्की करता गया और भी महान होता गया क्योंकि खुदा उसके संग था... जिसके संग परमेश्वर रहता है उसे किसी भली वस्तु की घटी नहीं होती...उसकी तरक्की के रास्ते में आने वाले सभी बाधाओं को खुदा खुद अलग करता चलता है...उसके दुश्मनों  से भी उसका मेल कराता है...शत्रुओं के साम्हने मेज को बिझाता है...जिसके साथ खुदा होता है  फिर वो व्यक्ति चाहे किसी भी जाति धर्म समुदाय से क्यों न हो उसे घूरे से उठाकर चट्टान पर बिठा देता है...ऐसा ही दाउद के साथ हुआ एक साधारण सा चरवाहा देश का वैभवशाली राजा बना दिया गया...और वो तरक्की पर तरक्की करता गया...
लेकिन जिसके साथ खुदा न हो वो पतन की ओर चला जाता है फिर चाहे वो राजा ही क्यों न हो उसे घूरे में तब्दील होते देर नहीं लगती जैसा की हम राजा शाउल के जीवन में देखते हैं...(1 शमुएल 15:26)

 अब सवाल उठता है खुदा किसके संग रहना चाहता है...वो क्या रहस्य है जिससे स्वर्ग और पृथ्वी का सृजनहार परमेश्वर एक मरणहार मनुष्य के संग आ जाए...उत्तर बिलकुल सरल है बल्कि सवाल में ही छिपा हुआ है...”तुम मेरे पास आओ तो मैं भी तुम्हारे पास आऊंगा” (याकूब 4:8) खुदा के नजदीक आओ तो वो भी तुम्हारे और नजदीक आएगा....पहले उसे और उसके राज्य को खोजो तो सारी वस्तुएं तुम्हें खोजते हुए आएंगी. प्रभु इन वचनों के द्वारा हम सभी को आशीष दे आपका भाई राजेश 

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