Sunday, June 7, 2020

प्रभु यीशु ठहर गए ...रुक गए

तब यीशु ने ठहरकर कहाउसे बुलाओऔर लोगों ने उस अन्धे को बुलाकर 

उस से कहाढाढ़स बान्धउठवह तुझे बुलाता है। (मरकुस 10:49)



प्रभु यीशु के अतुल्य नाम में आप सभी को जय मसीह की मैं आपका भाई 
राजेश...दोस्तों आज प्रभु यीशु यरीहो में आये हैं और एक साधारण से रास्ते में 
ठहर गए...रुक गए ....क्यों ???  उसकी गति तो हमारी गति से तेज है उसके 
विचार हमारे विचारों से अति तीव्र हैं...वो जो सारे ब्रम्हाण को चलायमान 
रखता है...वो जिसे कब्र का भारी पत्थर भी रोक नहीं सकता..वो जिसकी 
वाणी मात्र से हवा पानी आंधी तूफान और बवंडर रुक जाते हैं ....उसे कौन 
रोक सकता है....क्या कोई राजा...कोई स्वर्गदूत...कोई प्रधानताएं...मौत 
कहती है मेरा डंक उसे रोक न सका...कब्र कहती है मैं उसे रोक न 
सकी...ओह्ह जिसे अपने लोगों को बचाने के लिए धरती पर आने से स्वर्ग 
उसे नहीं रोक सका...उसे कौन रोक सकता है...उसे कौन ठहरा सकता 
है.....????

हाँ एक अंधे व्यक्ति की करुण पुकार....एक भिखारी की दुआ....एक लाचार 
बेबस की प्रार्थना....एक लगातार उठती दुहाई....इसे मेरा प्रभु लांघ नहीं 
सकता....इसे सुन वो रुक जाता है....इसे सुन वो ठहर जाता है...और...और 
जब ठहरता है तो परिवर्तन होता....आश्चर्य काम होते हैं....आंधियां ठहरती 
हैं...उफनता हुआ समुद्र शांत होकर उसकी सुनता है...समुद्र के जीव जन्तु 
उसकी आज्ञा मानते हैं....वो वेदना से भरी करूण आवाज मुझे भी दे....आज 
मेरी भी दुआ को सुन मेरे भारत में ठहर जा....और एक सृजन कर....हे दाउद 
की सन्तान हम पर दया कर ......हम पर दया कर.... 








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