Sunday, May 31, 2020

दाउद की झोपडी

उस समय मैं (परमेश्वर) दाऊद की गिरी हुई झोंपड़ी को खड़ा करूंगा,

 और उसके बाड़े के नाकों को सुधारूंगाऔर उसके खण्डहरों को फिर 

बनाऊंगाऔर जैसा वह प्राचीनकाल से थाउसको वैसा ही बना दुंगा 

(आमोस 9:11)




प्रभु यीशु के अतुल्य नाम में सभी को जय मसीह की मैं आपका भाई राजेश, दोस्तों बड़े बड़े राजमहल और आराधनालयों को छोड़कर इतने वर्षों के बाद दाउद की साधारण सी झोपड़ी ही क्यों स्मरण आई l क्यों प्रभु उस झोपड़ी को फिर से संवारने सुधारने की मनसा रखता है...? ये वही झोपड़ी है जहाँ दाउद ने प्रभु का सन्दूक को वापस लाकर रखा था, और उस स्थान की खूबी यह थी कि वहां बिना रुके लगातार स्तुति-प्रसंसा होती रहती थी, राजा दाऊद ने हेमान और युदुतुन जैसे विशेष आराधकों को चुन कर और साज गाज के सारे वाद्य यंत्र देकर उस झोपड़ी में आराधना करने के लिए नियुक्त कर दिया था(1इतिहास 16:37)...ताकि बारी बारी से अराधना हो और रुकने न पाए...राजा दाउद उस रहस्य को जानता था, आराधना रूपी सिंहासन में परमेश्वर विराजमान होते हैं...यही कारण है परमेश्वर को बाकी किसी भी सुंदर महलों से यह झोपडी ही सबसे प्यारी थी...पर आज वो झोपडी खंडहर बन चुकी है...उसकी दीवारों पर दरारें आ चुकी हैं...खुदा की निगाहें अपने प्रेमियों को ढूँढ रहीं हैं...आइये फिर से अपने घर की वेदी को खड़ा करें...आओ उस झोपडी को खड़ी करने में खुदा की मदद करें...जिस काम के लिए उसने हमें सृजा उसे स्मरण करें...आओ अपने खंडहर नुमा झोपडी को फिर आबाद करें...प्रभु हमारी सहायता करें...प्रभु में आपका भाई राजेश...

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