Thursday, February 20, 2020

पवित्र आत्मा में प्रार्थना कैसे करें ( लेखक जॉन बनयन)

(ऑडियो) पवित्र आत्मा में प्रार्थना कैसे करें... ( लेखक जॉन बनयन)

लगातार प्रार्थना कीजिए, क्योंकि प्रार्थना आत्मा की ढाल है, परमेश्वर के लिए एक बलिदान और शैतान को चोट पहुंचाने का हथियार है. प्रार्थना मनुष्य को पाप करने से रोकती है और वरना पाप मनुष्य को प्रार्थना करने से रोकता है (जॉन बनयन)


अध्याय-1 सच्ची प्रार्थना (ऑडियो )



सच्ची प्रार्थना

परमेश्वर ने हमें प्रार्थना करने की आज्ञा दी है l उसने हमें सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना करने की आज्ञा दी हैl निवेदन करने वालों की प्रार्थना परमेश्वर की अद्भुत संगती और सहभागिता में पहुंचाती है l इस कारण परमेश्वर ने प्रार्थना को परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत संबंधों में बढ़ने के लिए एक साधन के रूप में नियुक्त किया है
      जब हम बार-बार सक्रियता से प्रार्थना करते हैं प्रार्थनाएं जिनके लिए हम प्रार्थना मांगते हैं और साथ साथ हमारे लिए भी, परमेश्वर से महान प्रत्युत्तर प्राप्त करती है l प्रार्थना हमारे ह्रदयों को परमेश्वर के लिए खोलती है l हमारी प्रार्थनाएँ वे साधन हैं, परमेश्वर जिनके द्वारा हमारे खाली हृदयों को भरपूरी से भरते हैं l हमारी प्रार्थनाओं में हम मसीही परमेश्वर के सामने अपने खाली हदयों को ऐसे खोल सकते हैं जैसे कि मित्र के सामने खोलते हैं और उसकी मित्रता का एक नवीनतम प्रमाण भी पा सकते हैं l
            मैं सार्वजनिक प्रार्थना और व्यक्तिगत प्रार्थना के बीच का अंतर समझाते हुए, बहुत बातें कह सकता हूँ l मैं मन में की जाने वाली और जोर से बोलकर की जाने वाली प्रार्थना का अंतर भी स्पष्ट कर सकता हूँ l आत्मिक वरदानों और प्ररणा के अनुग्रह के बीच जो अंतर है उसे भी समझाया जा सकता है l परन्तु मैंने चुना है कि केवल प्रार्थना के मूल तत्व पर ही चर्चा करूं l जिसके बिना आपके समस्त क्रियाकलाप, जैसे हाथों और आँखों को उठाना ऊँचे स्वर से प्रार्थना करना इत्यादि उद्देश्यहीन बनकर रह जाते हैं l            हमें प्रार्थना के विषय में पवित्र शास्त्र की शिक्षा को सीखना और उस पर अमल करना सीखना चाहिए l पौलुस ने इस बारे में लिखा है और हमारे लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, “मैं आत्मा से प्रार्थना करूंगा”, इस कारण मैं बताऊंगा सर्वप्रथम कि सच्ची प्रार्थना क्या है; दूसरा पवित्र आत्मा से भरकर प्रार्थना करना किसे कहते हैं, चौथा, प्रार्थना के विषय में मैं ने जिन बातों को समझाया है उनके कुछ उपयोग और अनुप्रयोग क्या हैं l
“प्रार्थना ईमानदारी से, अर्थपूर्ण रीति से अपने ह्रदय या आत्मा को परमेश्वर के सम्मुख उंडेलना है,  के माध्यम से पवित्रात्मा की सामर्थ और सहायता में होकर उन बातों के लिए जिनकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की है या जो परमेश्वर के वचन के अनुसार है l प्रार्थना विश्वास सहित, परमेश्वर की इच्छा की आधीनता में होकर की जाती है l”
इस परिभाषा में सात बातें सम्मिलित हैं, जिन पर मैं आगे आने वाले अध्यायों में विस्तार से चर्चा करूंगा l प्रथम, आपकी प्रार्थना ईमानदारी से हो दूसरा आपकी प्रार्थनाएँ अर्थपूर्ण हों, तीसरा मसीह के माध्यम से प्रेमपूर्ण रीति से, परमेश्वर पिता के समक्ष उंडेली जाएं चौथा यदि आप चाहते हैं की आपकी प्रार्थना प्रभावपूर्ण हो, आपको पवित्रात्मा की सामर्थ और सहायता में होकर प्रार्थना करनी चाहिए l पाचवा, परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आपकी प्रार्थनाओं के उत्तर मिले, इसलिए आपको उन बातों के लिए प्रार्थना करना चाहिए जिनकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की है या जो उसके वचन, बाइबिल के अनुसार है l छटवां, आपकी प्रार्थना स्वार्थपूर्ण न हो परन्तु कलीसिया और एनी दूसरों की भलाई को ध्यान में रखकर की जाए l सातवाँ, आपको सदैव विश्वास में और परमेश्वर की इच्छा की आधीनता में होकर प्रार्थना करना चाहिए l 




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