परमेश्वर के साथ चलना, सिद्धता प्रदान करता है

परमेश्वर के साथ चलना, सिद्धता प्रदान करता है


जब अब्राम 99 वर्ष का हो गया, तब यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा, "मैं सर्वशक्तिमान  ईश्वर  हूँ; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा"  (उत्पत्ति 17:1-2)


परमेश्वर चाहता है की उस पर विश्वास करने वाला उसके साथ चलने वाला हर व्यक्ति उसके पुत्र प्रभु यीशु के जैसे सिद्ध हो जाए, परमेश्वर सिद्ध है... हमारे धार्मिकता के काम हमें सिद्ध नहीं कर सकते, लेकिन मात्र परमेश्वर के साथ चलना ही हमें सिद्धता प्रदान कर सकता है। परमेश्वर चाहते हैं कि  हम सिद्ध  होकर उससे बातें करें वो कहता है तू मुझसे मांग मुझसे बातें कर प्रार्थना कर और मैं तेरी सुनकर तुझे जवाब दूंगा, और वो गूढ़ भरी रहस्मयी बातें बताऊंगा जो तू अभी नहीं जानता।


अब्राहम परमेश्वर के साथ बुजुर्ग अवस्था में पूरी विश्वासयोग्यता के साथ चलने लगा और वेदी बना बनाकर परमेश्वर की उपासना करता था। और इस कारण एक दिन स्वयं परमेश्वर उसके घर आते हैं और अब्राहम अनजाने में परमेश्वर की पहुनाई करता है उन्हें भोजन परोसता है प्रभु उसके घर भोजन करते हैं और उसकी बूढी पत्नी सारा को आशीष देते हैं कि  अगले वर्ष तू एक बेटे को प्राप्त करेगी। यह सब अब्राहम और उसकी पत्नी के लिए बड़े ही आश्चर्य की बातें थीं जैसे कोई स्वप्न हो...  और तब थोड़ी देर में ही परमेश्वर अपने इस धरती में आने का कारण, वो रहस्य अब्राहम को बतातें हैं... कि  अब्राहम मैं इस धरती से करोड़ो करोड़ो किलोमीटर दूर स्वर्ग से एक काम के लिये आया हूँ...  मैं उस शहर जहाँ तेरे रिस्तेदार रहते हैं उस शहर सदोम और गमोरा का पाप इतना बढ़ गया है कि  मैं उस शहर को आग और गंधक से नाश करना चाहता हूँ... सुन तू मेरे साथ साथ चलता है मैं तुझ से कैसे कुछ छिपा सकता हूँ....


अब्राहम चाहता तो अपने भतीजे लूत से बदला लेने के लिए यह एक अच्छा मौका सोच सकता था.... लेकिन अब अब्राहम परमेश्वर के साथ साथ चलते चलते सिद्धता को प्राप्त कर रहा था.... वह तुरंत घुटने में आ कर अपने परमेश्वर से विनती करने लगता है.. वह उस शहर के लिए मध्यस्था  करता है और प्रभु से कहता है यदि वहां कुछ धर्मी होंगे प्रार्थना करने वाले होंगे तो क्या आप उन्हें भी नाश कर देंगे। यहाँ हम परमेश्वर की अद्भुत   

 नम्रता देखते हैं, अब्राहम परमेश्वर से गिड़गिड़ाता है और पचास से कम करते करते दस धर्मी तक में आ जाता है। अब्राहम दस में आकर रुक जाता है लेकिन परमेश्वर उससे गुस्सा या क्रोधित नहीं हुआ (उत्पत्ति19:33) में लिखा है अब्राहम अपने घर लौट गया... ऐसा लगता है परमेश्वर अभी भी चाहता था कि  शायद अब्राहम और थोड़ा कम कारवाता  या और थोड़ी प्रार्थना करता तो शायद वह शहर या देश नाश नहीं होता। परमेश्वर हमें अपने साथ चलने की बुलाहट देता है ताकि हम सिद्ध होकर अपने देश को प्रार्थना करके बचा सकें आइये आज हम अपने देश के लिए प्रभु की सिद्धता में होकर प्रार्थना करें।

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