परमेश्वर के साथ चलने की शर्तें



परमेश्वर के साथ चलने की शर्तें

“जो लोग परमेश्वर के साथ चलते हैं हमेशा मंजिल तक पहुँचते हैं” ( हेनरी फोर्ड)

    प्रभु यीशु में सभी को प्यार भरा नमस्कार, पिछले भाग में हमने देखा की परमेश्वर के साथ चलने वालों को परमेश्वर कितनी आशीषें देता है, वे लोग नम्र हो जाते हैं और सिद्धता को प्राप्त करते हैं और अद्भुत विश्राम को प्राप्त करते हैं ।

    परमेश्वर के साथ साथ चले लोगों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है, की परमेश्वर के साथ चलने की कुछ शर्ते भी हैं, परमेश्वर के महान दास डी. एल. मूडी बताते हैं “यदि कोई व्यक्ति संसार के साथ चलता है वह परमेश्वर के साथ नहीं चल सकता” । परमेश्वर कभी भी आधा आधा या 50% नहीं चाहते परमेश्वर मनुष्य का संपूर्ण प्रेम चाहते हैं, परमेश्वर ने भी मनुष्य जाति को पापों से बचाने के लिए अपना एकलौता बेटा देकर सम्पूर्ण प्रेम दिखाया । हम शैतान के कप से और प्रभु के कप से एक साथ नहीं पी सकते... उसने अपने आप को पूर्ण रूप से दे दिया । इसलिए परमेश्वर भी हमसे संपूर्ण प्रेम चाहता है । सोचे यदि हमारा परम मित्र हमारे साथ चल रहा हो और हम उससे अति महत्वपूर्ण बातें बता रहे हों और वह अपने फोन के गेम में व्यस्त हो या कान में लीड लगाकर कुछ और सुन रहा हो तो क्या हमारा मन उसके साथ चलने में आनन्दित होगा...ऐसा लगेगा जैसे वो हमारे साथ होकर भी हमसे दूर है...उसका मन तो हमारे साथ है ही नहीं...ठीक उसी प्रकार परमेश्वर भी हमसे चाहते हैं...  तू अपने परमेश्वर से सारे मन से और सारे प्राण और सारी शक्ति से और सारी बुद्धि से प्रेम करना ।

     जैसा दिन को सोहता है, वैसा ही हम सीधी चाल चलें; न कि लीला क्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और डाह में । (रोमियो 13:13) हे मनुष्य, वह (परमेश्वर) तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है की, तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? परमेश्वर अति पवित्र है और वह चाहता है उसके साथ साथ चलने वाले भी पवित्र हों उसके उजाले में अर्थात पवित्रता में चलें....हमें पवित्र जीवन जीने के लिए वह अपना पवित्रात्मा भी देता है...समय समय पर हमें चिताता है समझाता है, कटाई छटाई भी करता है जरूरत पड़ने पर वह अपने लाठी और सोटे का भी इस्तेमाल करता है...इन सभी बातों को वह अपने अथाह प्रेम के कारण करता है । परमेश्वर ने राजा सुलेमान को भी आदेश देते हुए कहा, "और यदि तू अपने पिता दाउद की नाईं अपने को मेरे सम्मुख जान कर चलता रहे और मेरी सब आज्ञाओं के अनुसार किया करे, और मेरी विधियों और नियमों को मानता रहे, तो मैं तेरी राजगद्दी को स्थिर रखूँगा; जैसे कि मैंने तेरे पिता के साथ वाचा बाँधी थी, कि तेरे कुल में इस्राएल पर प्रभुता करने वाला सदा बना रहेगा । परन्तु यदि तुम लोग फिरो, और मेरी विधियों और आज्ञाओं को जो मैंने तुम को दी हैं त्यागो और जा कर पराए देवताओं की की उपासना करो और उन्हें दण्डवत करो, तो मैं उन को अपने देश में से जो मैंने उन को दिया है, जड़ से उखाड़ दूंगा और इस भवन को जो मैं ने अपने नाम के लिए पवित्र किया है, अपनी दृष्टि से दूर करूंगा और ऐसा करूँगा कि देश देश के लोगों के बीच उसकी उपमा और नामधराई चलेगी ।"  (2 इतिहास 7:17-18) प्रभु यीशु ने कहा है, " जो मुझसे प्रेम करता है वह मेरी आज्ञाओं को मानेगा...सवाल है क्या हम परमेश्वर के साथ चलना सीख रहे हैं या क्या हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं यदि हाँ तो हम उसकी आज्ञाओं को भी ख़ुशी ख़ुशी मानेंगे और यदि हम ऐसा करें तो परमेश्वर हमें अपनी अद्भुत सामर्थ से भरेगा....

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