परमेश्वर के साथ चलने का प्रतिफल



परमेश्वर के साथ चलने का प्रतिफल


प्रभु यीशु मसीह में सभी को प्यार भरा नमस्कार, मित्रों हमने अब तक देखा है कि, ‘किस प्रकार परमेश्वर के 

साथ चलने वाले व्यक्ति की बोली और स्वभाव बदल जाता है, उससे परमेश्वर प्रेम करता और बहुत सी 

आशीषों से भरता है, और अपने साथ जीवित ही स्वर्ग में भी उठाया है’। आज हम देखेंगे की परमेश्वर के साथ 

चलना और क्या प्रतिफल ले कर आता है....

1.नम्रता


    मूसा परमेश्वर के साथ साथ चलने वालों में एक ऐसा व्यक्ति था जिसके विषय में स्वयं परमेश्वर ने कहा पूरी 

पृथ्वी में यह सबसे नम्र व्यक्ति है...नम्रता परमेश्वर का एक गुण है जो उसके साथ चलते हैं वे नम्र हो जाते हैं... 

प्रभु यीशु ने कहा मुझसे सीखो मैं मन में नम्र हूँ...दीन हूँ....जो नम्र हैं वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे...यह पवित्र 

आत्मा का फल है । एक नम्र व्यक्ति की यह पहचान है कि वह कभी भी दूसरों को अपने से हीन या तुच्छ नहीं 

समझता । अपने अधिकार का गलत फायदा नहीं उठाता...अपने ऊंचे पद के कारण घमंड से फूल कर गुप्पा 

नहीं हो जाता...हम जानते हैं परमेश्वर ने मूसा को यह अधिकार दिया...(निर्गमन 7:1) परमेश्वर ने कहा था, ‘मैं 

तुझे फिरौंन के लिए यहोवा सा परमेश्वर के जैसा ठहराता हूँ...शायद ही दुनिया में और दूसरा कोई व्यक्ति 

हुआ जिसे परमेश्वर ने इतना बड़ा अधिकार दिया हो...परन्तु मूसा हमेशा अपनी मर्यादा में रहा उसने कभी भी 

उस अधिकार का उपयोग दूसरों को सताने में या दुःख देने में नहीं किया...बल्कि परमेश्वर के लोगों (इस्राइली 

लोगों के साथ ) उनकी सारी कूड़कूडाहट को सहते हुए चलता रहा और उन्हीं लोगों के लिए प्रार्थना करता 

रहा...ऐसी नम्रता केवल परमेश्वर के साथ चलने से ही प्राप्त होती है...

2. विश्राम

जब परमेश्वर के नम्र दास मूसा ने परमेश्वर को अपने साथ चलने का आग्रह किया, विनती किया..तब परमेश्वर ने 

भी नम्रता से अपने दास हमसफर मूसा से कहा, (निर्गमन 33:14) ‘मैं आप चलूँगा और तुझे विश्राम दूंगा’ 

जब हम परमेश्वर के साथ साथ चलते हैं तो परमेश्वर हमें विश्राम अर्थात अद्भुत शांति, सुकून प्रदान करते 

हैं...इसीलिए राजा दाउद कहने लगा, ‘यहोवा मेरा चरवाहा है मुझे कोई घटी न होगी...वो मेरे जी में जी ले 

आता है...ऐसी शान्ति, सुकून, विश्राम जिसे हमारी अंतरात्मा ढूंढ रही है वो संसार नहीं दे सकता...प्रभु यीशु ने 

कहा मैं तुम्हें ऐसी शांति देता हूँ जो संसार तुम्हें नहीं दे सकता । इसी विश्राम की खोज में सारा संसार है...जो 

गलत जगह ढूंढ रहा है...आइए हम भी उस प्रभु की बुलाहट को सुनकर पास आएं और उसके साथ साथ 

चलने का निर्णय लें जो  अपने छिदे हुए हाथों को फैलाकर हमें पुकार पुकार कर कह रहा रहा, “हे परिश्रम 

करने वालों और बोझ से दबे लोगों मेरे पास आओ मैं तुम्हें विश्राम दूंगा....  



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