मोची का आइडिया


मोची का आइडिया 

साँपों के समान बुद्धिमान और कबूतरों के समान भोले बनो (मत्ती 10:16)


एक व्यस्त बिजनेसमैन था, जो एक मीटिंग में जा रहा था. जैसे ही वह आफिस से निकला, उसके पास एक जूते चमकाने वाला आया, जिसने कहा, “देखिये, आपके जूते गंदे दिख रहे हैं. क्यों न आप मुझसे पॉलिश करवा लें?” बिजनेसमैन ने कहा, “नहीं...मेरे पास समय नहीं है.” अगली छह इमारतों में उसे छह पॉलिश करने वाले मिल, जिन्होंने उससे यही आग्रह किया और उसने वही जवाब दिया, “नहीं...मेरे पास पॉलिश करवाने का समय नहीं है.”  

परन्तु सातवीं इमारत के सामने वह एक ऐसे पॉलिश की दुकान से सामने से गुजरा जो बैठा गिन रहा था: “97...98...99...100...फिर वह पॉलिश करने वाला बोला “मित्र आप व्यस्त दिख रहे हैं, लेकिन मैं क्षमा चाहता हूँ , आज मेरा जन्म दिन है और मैंने खुद से यह वादा किया था कि मैं अपनी दुकान के सामने से गुजरने वाले 100 वें आदमी के जूतों की मुफ्त में पॉलिश करूंगा. कृप्या मुझे अवसर दें की मैं आपके जूते चमकाकर अपना वादा पूरा कर  सकूं.”

यह सुनकर बिजनेसमैन बैठ गया. पॉलिश करने वाला फौरन काम में जुट गया. वह मेहनत से जूतों को चमकाने लगा. उसने कपड़े से जूतों को इतनी तेजी से रगड़े की उसके माथे से पसीना टपकने लग. उसने उस व्यस्त बिजनेसमैन के जूतों को बेहतरीन तरीके से चमका दिया. दरअसल उसके जूते अब ऐसे दिख रहे थे मानो वो बिलकुल नये हों.

जब वो बिजनेसमैन जाने को तैयार हुआ, तो उसने पूछा, “तुम आम तौर पर कितने पैसे लेते हो?” जूते चमकाने वाले ने कहा, “ 20 रूपए सर. बिजनेसमैन ने उसे 100 रुपए का नोट निकाल कर देते हुए कहा, “जन्म दिन मुबारक हो...” जूते चमकाने वाला धन्यवाद देकर कुछ देर शांत रहा और बिजनेसमैन को जाता हुआ देखकर फिर बोलने लगा, “97... 98...99...”

मित्रों ये कहानी बताती है कि हमें रचनात्मक बनना है, सफल होने के लिए आपको अपने सामने वाली कुछ बाधाओं को पार करने के रचनात्मक तरीके खोजने होंगे बुद्धि का प्रयोग करना होगा.












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