कौन मेरे साथ जाएगा? story



क्या तुम नहीं जानते कि तुम परमेश्वर के मंदिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है।

(1कुरुन्थियों 3:16)


  • एक राजा की चार पत्नियाँ थीं। वह अपनी चौथी पत्नी से सबसे अधिक प्रेम करता था। उसने उसे दुनिया की सारी सुख-सुविधाएँ उपलब्ध करवाईं थी। 
  • वह अपनी तीसरी पत्नी से भी प्रेम करता था। यह तीसरी पत्नी बहुत खूबसूरत थी इसलिए राजा को सदैव यह भय रहता था की कहीं वह किसी दूसरे पूरुष के प्रेम में पड़कर उसे छोड़ न दे। 
  • अपनी दूसरे नम्बर की पत्नी से भी वह प्रेम जताता था..क्योंकि वह राजा की विश्वासपात्र थी और वह राजा की  सारी जरूरतों का ख्याल रखती थीं। 
  • राजा की पहली पत्नी उससे राजा से बहुत प्रेम करती थी...लेकिन राजा उससे बिलकुल प्रेम नहीं करता था। 
  • एक दिन राजा बहुत बीमार पड़ गया। उसे एहसास होने लगा कि उसकी मृत्यु समीप है। 
  • उसने सोचा मेरी चार पत्नियाँ हैं, पर मैं मरूँगा तो अकेले ही। क्यों न अपने अंतिम यात्रा में किसी को साथ लेकर जाऊं।
  • अत: उसने अपनी चौथी पत्नी से पूछा, "मैं तुमसे सर्वाधिक प्रेम करता हूँ, और मैंने तुम्हें सबसे अच्छे वस्त्र-आभूषण दिए। अब मैं मरने वाला हूँ..क्या तुम मेरे साथ चलोगी। 
  • वह आश्चर्य से बोली नहीं नहीं अभी तो मेरे खेलने-कूदने के दिन हैं...मैं आपके साथ नहीं चल सकती।
  • राजा ने तीसरी पत्नी से पूछा...लेकिन तीसरी पत्नी ने भी जवाब दे दिया, नहीं मैं तो अभी जवान और खुबसूरत हूँ..आपके मरने के बाद मैं किसी और से शादी कर लूंगी। राजा को ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी। 
  • राजा ने दूसरी पत्नी से मरने के लिए आग्रह किया, किन्तु उसे जवाब मिला..मुझे माफ करें। इस बार मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकती। मैं आपको कब्र तक तो पहुंचा सकती हूँ..पर उसके आगे नहीं। 
  • राजा बहुत दुखी हो गया...तभी उसे एक आवाज सुनाई दी..मैं आपके साथ चलूंगी...यह राजा की पहली पत्नी की आवाज थी। जिसकी ओर राजा ने जीवन भर कभी ध्यान नहीं दिया था। इसलिए वह दुबली पतली और रोगी और कमजोर हो गयी थी। 
  • उसे देखकर राजा ने बहुत दुःख भरे स्वर में कहा..'मेरी पहली पत्नी, मैंने तो तुम्हें हमेशा नजरअंदाज किया...तुम मेरे साथ जाने को तैयार हो...  मुझे तो तुम्हारा सबसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए था।
  • राजा की ही भाँती हम सबकी चार पत्नियाँ हैं...
  • हमारा शरीर हमारी चौथी पत्नी है। हम इसका कितना भी बेहतर ध्यान रखें, मौत के समय यह हमारा साथ छोड़ देगी। 
  • हमारी धन-संपत्ति हमारी तीसरी पत्नी है। हमारे मरने के बाद यह दूसरों के पास चली जाएगी। 
  • हमारा परिवार-प्रियजन हमारी दूसरी पत्नी है। ये हमें कब्र तक पहुंचा देंगे, लेकिन उसके आगे कोई नहीं जायेगा।
  • हमारी आत्मा हमारी पहली पत्नी है...सिर्फ यही है जो मरने के बाद भी हमारे साथ जाएगी।
  • क्या हम अपनी आत्मा से प्यार करते हैं???क्या उसके उद्धार के लिए यत्न करते हैं??



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