Bible Stories of Generosity उदारता की बरकतें




उदारता  


 महान विचारक जॉन वेस्ली ने कहा है, “आप जितना ज्यादा भला कर सकते हैं अवश्य कीजिए, आप जितने अधिक तरीके से कर सकते हैं अवश्य कीजिए, आप जीतने अधिक माध्यम से कर सकते हैं उतने से कीजिए, आप जितने अधिक जगहों पर कर सकते हैं उतनी जगहों पर कीजिए, जितनी अधिक बार कर सकते हैं उतनी अधिक बार कीजिए, आप जितने लोगों का भला कर सकते हैं उतने लोगों का भला कीजिए और आप जब तक भला कर सकते हैं तब तक भला कीजिए।”

(1)          उदारता परमेश्वर का तरीका है

     सबसे पहले परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया उसने प्रारंभ में ही मनुष्य के लिए अपनी ही सृष्टि में एक मेमने को बलिदान किया...
   और नए नियम में...
     "परमेश्वर जगत से ऐसा प्रेम रखा की अपना एकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वो नाश न हो बल्कि अनंत जीवन पाए..."

इसलिए परमेश्वर ने अपने लोगों को आदेश दिया...

(लैव्यवस्था 25:35-37)  यदि तेरा कोई भाईबन्धु कंगाल हो जाए, और उसकी दशा तेरे साम्हने तरस योग्य हो जाए, तो तू उसको संभालना; वह परदेशी वा यात्री की नाईं तेरे संग रहे। 
 उससे ब्याज वा बढ़ती न लेना; अपने परमेश्वर का भय मानना; जिस से तेरा भाईबन्धु तेरे संग जीवन निर्वाह कर सके। उसको ब्याज पर रूपया न देना, और न उसको भोजनवस्तु लाभ के लालच से देना। 
(व्यवस्थाविवरण 15:7-8) जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसके किसी फाटक के भीतर यदि तेरे भाइयों में से कोई तेरे पास द्ररिद्र हो, तो अपने उस दरिद्र भाई के लिये न तो अपना हृदय कठोर करना, और न अपनी मुट्ठी कड़ी करना, जिस वस्तु की घटी उसको हो, उसका जितना प्रयोजन हो उतना अवश्य अपना हाथ ढीला करके उसको उधार देना

(2)          उदारता परमेश्वर को कर्जदार बना देती है

(नीतिवचन 19:17) “जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा।” 
   
     हम जानते हैं ये धरती और जो कुछ इसमें है सब कुछ परमेश्वर ही का है और उसे कोई कर्जदार नहीं बना सकता...परन्तु परमेश्वर अपने वचन में बताता है यदि हम कंगालों पर अनुग्रह करते हैं उन्हें उदारता से देते हैं तो यह परमेश्वर को कर्जदार बना देता है... 
   
    स्मरण रहे परमेश्वर किसी का कर्ज नहीं रखता...हम तो अपनी हैसियत से देते हैं लेकिन जब परमेश्वर देता है तो लोग ऐसा कहते हैं की छप्पर फाड़ के देता है।

(3)          उदारता के प्रति परमेश्वर प्रतिफल का Promise करता है

क्या ही धनी है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा, यहोवा उसकी रक्षा करके उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। जब वह व्याधि के मारे शय्या पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्हालेगा और पूर्ण चंगा करेगा। (भजन 41:1-3) दया करने वाले पर आशीष फलती है, क्योंकि वह कंगाल को अपनी रोटी में से देता है। प्रसन्नता से देने वाले से परमेश्वर खुश होता है।

(4)          परमेश्वर हमारे उदारता का हिसाब रखता है

कोई देखे या न देखे, जाने या न जाने परन्तु परमेश्वर हमारे उदारता को देखता और उसका हिसाब भी रखता है... जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूं, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा॥ (मत्ती 10:42)
(5)          उदारहीन व्यक्ति की प्रार्थना भी नहीं सुनी जाती

जो कंगाल की दोहाई पर कान न दे, वह आप पुकारेगा और उसकी भी सुनी न जाएगी (नीतिवचन 21:13)

।। लेने से देना धन्य है (प्रेरितों के काम 20:35) ।।

तीन कहानियाँ जो उदारता सिखाती हैं


पहली कहानी :- गरीब विधवा का दान (मरकुस 12:41-44) 

एक बार प्रभु यीशु (मन्दिर) आराधनालय के भंडार के पास बैठे लोगों को देख रहे थे की वे लोग कैसे भंडार में पैसे डालते हैं...
    
  ध्यान दें प्रभु यह नहीं देख रहे थे कि कितने पैसे डाल रहे हैं बल्कि वे देख रहे थे की कैसे अर्थात किस मनसा से डाल रहे हैं...

     परमेश्वर हमारे पैसों से ज्यादा हमारे मन की स्थति पर ज्यादा रूचि रखते हैं...

     वहां बहुत से धनवानों ने भी बहुत सा पैसा डाला दान किया भेंट किया...

      परन्तु उसी समय एक बुजुर्ग गरीब विधवा ने दो दमड़ी भेंट दिया...

      प्रभु ने उत्साह से भरकर अपने चेलों को बुलाया और कहा इस बुजुर्ग विधवा ने सबसे बढकर डाला है ।। 
     यह घटना बताती है अपने बटुए से दें लेकिन दिल से भी ।।

दूसरी कहानी :- अच्छा सामरी एक अच्छा पड़ोसी (लूका 10:30-35)

     प्रभु यीशु ने यह समझाने के लिए कि एक अच्छा और सच्चा पड़ोसी कौन होता है एक कहानी सुनाई कि एक बार एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था जहाँ डाकू लोग भी रहा करते थे और उस व्यक्ति को डाकू लोगों ने उसे मार्ग में ही लूट लिया और मार मार कर अधमरा करके छोड़ कर भाग गए । वो मार्ग में कराहता रहा रोता रहा...

    उसी मार्ग से याजक (आराधनालय के पुजारी) और व्यवस्था को जानने वाले लेवी जैसे विद्वान लोग भी निकले परन्तु उसे कराहता देखकर उसे अनदेखा करके चुपचाप चले गए...

      उसी मार्ग से एक सामरी व्यक्ति जो एक छोटी जाति का व्यक्ति था वह भी व्यापार करने के लिए निकला। उसने देखा वह ज्यादा व्यवस्था और नियम नहीं जानता था परन्तु उसने रूककर उस पीड़ित व्यक्ति को उठाया और उस के चोट पर मरहम पट्टी किया और उसे डाक्टर के पास ले गया और अपने पैसे और समय खर्च करके उसकी देखभाल करने के लिए सराय के मालिक को दिया और कहा इसे ठीक कर दो यदि और पैसे लगेंगे तो मैं वापसी में आकर और भी दूंगा। ...
    
   यह कहानी हमें बताती है जरूरतमंद की सहायता यदि हम कर सकते हैं तो अवश्य करें...यदि कर सकते हैं और नहीं करें तो वो गुनाह है।

तीसरी कहानी:-  युसुफ और उसके भाई   (उत्पत्ति 45)

      युसुफ 12 भाइयों में सबसे छोटा था जिसे परमेश्वर ने एक दर्शन दिया था की वह महान बनेगा और उसके भाई और यहाँ तक की संसार के सभी लोग भी उसके सामने झुकेंगे...

    जिसके कारण उसके भाई लोग उससे नफरत करने लगे और एक दिन मौका पाकर उसे मार डालना चाहते थे । लेकिन उसी समय वहां से कुछ व्यापारी लोग निकलते हैं...भाई लोग उसे कुछ सिक्कों के लिए अपने ही सगे भाई को बेच दिया...

   युसुफ मिश्र में एक गुलाम की जिन्दगी बिताने लगा परन्तु उसकी परमेश्वर से भक्ति और प्रेम कम नहीं हुआ उसका दर्शन भी धूमिल नहीं हुआ। और एक दिन जब पूरे संसार में आकाल हुआ तो परमेश्वर ने उसे मिश्र का प्रधानमन्त्री बनाकर आशीषित किया और ऐसा हुआ की युसुफ के वही भाई लोग अन्न मांगने के लिए मिश्र में पहुंचे और अपने भाई को इतने वर्षों के बाद देख कर पहचान न सके परन्तु युसुफ अपने भाइयों को पहचान गया...

    लेकिन उसने उनसे बदला नहीं लिया वरन उन्हें उस देश में अपने समान आदर के साथ स्थान दिया...वे लोग और उनके वंशज मिश्र में 400 वर्षों तक रहे

उदारता हमें अपने शत्रुओं से भी प्रेम करना सिखाती है...

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