शान्ति की खोज (कहानी)



शांति का मार्ग वे जानते ही नहीं और न उनके व्यवहार में न्याय है; उनके पथ टेढ़े हैं, जो कोई उन पर चले वह शांन्ति न पाएगा।
 (यशायाह 59:8)

  • एक गाँव में एक बहुत ही अमीर आदमी था, उसके पास हीरे जवाहरात भी थे।  

  • अमीर था पर सुखी नहीं था। उसे मन की शांति नहीं मिल रही थी..अंदरूनी शांति...वो दिल का सुकून ढूंढ रहा था, परन्तु उसे कहीं भी उसे सुकून शांति नहीं मिल रही थी।

  • वो हमेशा अपने साथ हीरे जवाहरातों की थैली इसलिए लिए घूमता कि जो कोई उसे शांति देगा या अंदरूनी शान्ति पाने का रास्ता बताएगा उसे मैं यह हीरे जवाहरातों का थैला दे दूंगा...

  • वह बहुत से विद्वानों के पास गया लेकिन उसे...कहीं भी शान्ति नहीं मिली इसलिए वह बड़ा दुखी हो गया।

  • एक दिन उसके गाँव का ही एक पागल व्यक्ति उसके पास आया और कहने लगा मैं तुम्हें एक व्यक्ति के विषय में बता सकता हूँ जो तुम्हें शान्ति और सुकून का रास्ता बता सकता है....पास के पूर्वी गाँव में एक व्यक्ति रहता है...जिसका नाम नसरुद्दीन है। वो तुम्हें शान्ति का रास्ता बता सकता है।

  • अमीर व्यक्ति ने सोचा यह...पागल मुझे क्या बताएगा...लेकिन फिर भी कोशिश करने में क्या हर्ज है। 

  • और वह पूर्वी गाँव में पहुंचकर किसी से पूछा कि नसरुद्दीन कहाँ मिल सकता है...किसी ने पेड़ की ओर इशारा करके बताया कि वो पेड़ में बैठा हुआ व्यक्ति ही नसरूद्दीन है। अमीर आदमी उस नसरुद्दीन नामक व्यक्ति के पास गया और पूछा क्या आप मुझे शान्ति पाने का दिल का सुकून पाने का रास्ता बता सकते हो। 

  • नसरुद्दीन ने कहा मैं तुम्हें केवल शान्ति पाने का रास्ता बता ही नहीं सकता बल्कि शान्ति और सुकून दे भी सकता हूँ....इतना सुनते ही अमीर आदमी के चेहरे में ख़ुशी दिखने लगी जैसे वो बस अपनी मंजिल के पास ही पहुँच चुका है। 

  • परन्तु तुरंत नसरुद्दीन ने पूछा ये तुम्हारे हाथ में क्या है जो तुम अपने सीने से लगाए हुए हो...उस अमीर आदमी ने कहा ये...कीमती हीरे जवाहरात हैं...जिन्हें मैं हमेशा अपने पास रखता हूँ...और उसे देना चाहता हूँ जो मुझे शान्ति देगा। 

  • इतना सुनते ही नसरुद्दीन पेड़ से कूदा और पलक छपकते ही तुरंत उस अमीर आदमी के हाथ से वो थैला छीनकर अपने गाँव की छोटी पतली गलियों से भाग गया...अमीर आदमी पीछे भागने की बहुत कोशिश की लेकिन..मोटापा ज्यादा होने के कारण वह ज्यादा भाग नहीं पाया...और उसकी साँसें फूलने लगी...

  • वह बड़ा ही दुखी हो गया...और जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर रोने लगा...मेरे जीवन भर की कमाई लुट गई...और उसी पेड़ के नीचे वापस आकर दुखी होकर बैठ गया। और सोचने लगा मैंने क्यों उस पागल की बात मानी और इस लुटेरे के पास आया....

  • लगभग एक घंटे के बाद उसने देखा की नसरुद्दीन वापस आता है और उसी पेड़ पर चढ़ कर बैठ जाता है...और अमीर आदमी से पूछता है...और सेठ जी क्या हाल चाल है....कैसा लग रहा है...अमीर आदमी उससे कहता है, तूने मेरी जीवन भर की खून पसीने की कमाई लूट ली...मेरी सारी जमा पूंजी लुट लिया।

  • तब नसरुद्दीन उसे वो हीरे जवाहरातों की थैली फेंककर देता है...जैसे ही वो थैली उस अमीर आदमी को मिलती है वो उसे सीने से लगाकर...एक लंबी सांस लेता है...बहुत दिन बाद मुझे ऐसा सुकून मिला।

  • नसरुद्दीन पूछता है...तुम्हें शान्ति मिली...वो अमीर आदमी हाँ मैं बहुत दिनों बाद इतना खुश हुआ हूँ...मेरे दिल में अब सुकून मिला है। 

  •  वो धन पहले भी उसी के पास था परन्तु...जब वो धन उसके पास से चला गया तो उसकी कीमत उसे मालुम हुई और उसके लिए दुखी हो गया...

  • बहुत बार जो चीज हमारे पास होती हैं उसकी एहमियत या उसकी कीमत हमें नहीं मालुम होती हैं..परन्तु जब वो खो जाती है या हमसे दूर हो जाती है तब हम उसकी कीमत या आवश्यकता के विषय में पता चलता है

  • हाँ मित्रों हमारे जीवन में परमेश्वर ने ऐसी बहुत सी चीजें दी हैं जिन्हें हम ध्यान नहीं देते...जीवन, अच्छा स्वास्थ्य, पत्नी, बच्चे, माता-पिता और भी बहुत कुछ....जिसके लिए हम कभी परमेश्वर का धन्यवाद नहीं देते...और उस शान्ति को बाहरी चीजों में ढूंढते हैं...हमारे अंदर सच्ची शान्ति परमेश्वर ही दे सकते हैं....

(यूहन्ना 14:26)
मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूँ, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूँ; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे


(यशायाह 32:17)
धर्म का फल शान्ति और उसका परिणाम सदा का चैन और निश्चिन्त रहना होगा 



(यिर्मयाह 6:14)
वे, शान्ति है, शांति, ऐसा कह कह कर मेरी प्रजा के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा करते हैं, परत्नु शांति कुछ भी नहीं


(भजन संहिता 29:11)
यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शांति की आशीष देगा



(भजनसंहिता 85:8) 
मैं कान लगाए रहूंगा, कि परमेश्वर यहोवा क्या कहता है, वह तो अपनी प्रजा से जो उसके भक्त है, शान्ति की बातें कहेगा




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