घर वापसी (कहानी)



(विलापगीत 3:40)
हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की और फिरें!


  • गाँव के एक परिवार में एक पिता का एकलौता बेटा था। जिससे माता-पिता दोनों बहुत प्यार करते थे...

  • बेटा जैसे जैसे बढ़ता गया, उसकी मित्रता कुछ बुरे लडकों के साथ होने लगी...

  • पिता उस बेटे को समय-समय पर समझाता और हिदायत भी देता...परन्तु उसका कोई भी असर उस बेटे पर पड़ता था।

  •  दिन प्रतिदिन बेटे की आदतें और स्वभाव संगती के कारण बद से और बदतर होते जा रहे थे।

  • एक दिन जब बेटे ने अपने स्कूल की कक्षा में फेल होकर...फेल का रिजल्ट घर लेकर आया तो पिता का गुस्सा सातवे आसमान में था। 

  •  पिता ने आव देखा न ताव और एक छड़ी लेकर बेटे की जमकर पिटाई कर दी। 

  • बेटा डरा-सहमा अपने कमरे में बैठा रो रहा था...सोच रहा था कि उससे कोई प्यार नहीं करता...और यह सोचते हुए उसने घर से भागने का निर्णय ले लिया। 

  •  तड़के सुबह उठकर वह रेलवे स्टेशन पहुँच गया, और गाँव से होकर गुजरती हुई पहली ट्रेन में बैठकर वह एक अनजान मंजिल की ओर चल पड़ा। 

  •  एक अनजाने शहर में पहुंचकर ट्रेन से उतर गया और जिन्दगी की थपेड़े झेलने लगा।

  • यहाँ घर में पिता और माता का बुरा हाल था... उन्होंने आस-पास के गाँव में ढूंढ लिया...बहुतों से पूछा परन्तु बेटे का कोई पता नहीं चला।

  •  एक माह बाद जब माता-पिता की तबियत बहुत ही खराब हो गई..तब पिता ने अखबार में एक लेख लिखकर अखबार में इश्तेहार छपवा दिया...कि बेटे जहाँ कहीं हो वापस आ जाओ माँ तुम्हारी याद में बहुत बीमार है...हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं...इस आशा में कि यदि बेटा इसे पढ़ेगा तो शायद वापस आ जाएगा।

  •  और सचमुच उस बेटे ने किसी होटल में सफाई का काम करते हुए  अखबार को पढ़ा और अपने माता पिता से मिलने के लिए भावुक हो उठा...लेकिन तभी उसने सोचा...क्या पता माता-पिता ने सचमुच मुझे माफ किया है कि नही।

  • इसलिए जानने के लिए उसने पिता को एक चिट्टी लिखी मैं घर आ रहा हूँ...लेकिन यदि आपने मुझे माफ कर दिया है तो आप गाँव के रेलवे स्टेशन के पास जो बरगद का पेड़ है उसमें एक सफेद रंग का झंडा लगा देना...तो मैं समझूंगा कि आपने मुझे माफ कर दिया है...यदि नहीं तो मैं उसी ट्रेन से वापस चला जाऊँगा।

  •  कुछ दिनों के बाद बेटा ट्रेन में बैठ कर अपने गाँव वापस जा रहा था...और सोचते जा रहा था क्या पता पिता ने माफ किया है कि नहीं...

  • जब वह अपने गाँव के रेलवे स्टेशन पहुँचने वाला था तो उसने खिड़की से झांक कर देखा...तो दंग रह गया...स्टेशन में दोनों ओर जितने पेड़ थे सभी पेड़ों में और आस पास सभी जगह केवल सफेद रंग के झंडे ही झंडे नजर आ रहे थे...

  • उस बरगद के पेड़ में हरे पत्तों से ज्यादा सफेद रंग के झंडों से भरा हुआ था। क्योकि पिता नहीं चाहता था की बेटा किसी भी तरह झंडे को बिना देखे वापस न लौट जाए।

  •  यह देखकर बेटे के आँखों से पश्चाताप के आंसू निकल पड़े।

  •  उसी प्रकार आज हमारा स्वर्गीय पिता भी हमारे वापस लौटने की बाट जोहता है...हम जो अपने ही मार्गों में उससे भटक गए हैं...वो चाहता है अपने बुरे कामों को छोड़कर अपने पिता के प्रेम में वापस आ जाएं...


बाइबल वचन- परमेश्वर पिता की ओर लौटना 




(अय्यूब 22:23)
यदि तू सर्वशक्तिमान की ओर फिर से समीप जाए, और अपने डेरे से कुटिल काम दूर करे, तो तू बन जाएगा।


(यिर्मयाह 24:7)
मैं उनका ऐसा मन कर दूंगा कि वे मुझे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा, क्योंकि वे मेरी ओर सारे मन से फिरेंगे। 


(विलापगीत 3:40)
हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की और फिरें!


(योएल 2:12) 
अपने वस्त्र नहीं, अपने मन ही को फाड़ कर अपने परमेश्वर यहोवा की ओर फिरो; क्योंकि वह अनुग्रहकारी, दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला, करुणानिधान और दुःख देकर पछ्तानेहारा है।


(होशे 14:1)
हे इस्राएल, अपने परमेश्वर यहोवा के पास लौट आ, क्योंकि तू ने अपने अधर्म के कारण ठोकर खाई है।


(जकर्याह 1:3)
इसलिए तू इन लोगों से कह, सेनाओं का यहोवा यों कहता है; तुम मेरी ओर फिरो, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, तब मैं तुम्हारी ओर फिरूंगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। 


(होशे 6:1)
चलो, हम यहोवा की ओर फिरें; क्योंकि उसी ने फाड़ा, और वही चंगा भी करेगा; उसी ने मारा, और वही हमारे घावों पर पट्टी बांधेगा।



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