18 Amazing Facts about ( NOAH ) नूह



नूह, धर्म का प्रचारक 
(उत्पत्ति 6-8)

·    जब धरती में पाप और उपद्रव अपनी चरम सीमा में बढ़ गया तब परमेश्वर ने पूरी दुनिया में केवल एक व्यक्ति नूह को ही धर्मी पाया, जो पेशे से किसान था और अपने समय के लोगों में एकमात्र खरा मनुष्य था।

·         परमेश्वर ने पूरी धरती के सभी लोगों को नाश करने का मन बनाया परन्तु नूह को एक काम दिया की गोपेर की लकड़ी से एक जहाज बनाओ जिसकी लम्बाई तीन सौ हाथ, चौड़ाई पचास हाथ और ऊंचाई तीस हाथ की हो।

·         नूह को परमेश्वर ने सही माप व तरीका और लगने वाली साम्रगी बताया, उसके अंदर पानी की एक बूंद भी ना आ जाए इसके लिए अदर और बाहर उसमें राल लगाना।

·         नूह परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार चलता था और जैसा प्रभु परमेश्वर ने आज्ञा दी नूह ने वैसा ही किया।

·          नूह धर्म का प्रचारक था जब वह जहाज बना रहा था, वह लोगों को प्रचार भी करता था की आओ और जहाज में आकर बच जाओ।

·         जहाज का दरवाजा बाहर से स्वयं यहोवा परमेश्वर ने बंद किया था...जिसे परमेश्वर ने बंद किया उसे कोई खोल नहीं सकता और जिसे परमेश्वर ने खोला हो उसे कोई बंद नहीं कर सकता।

·         नूह के परिवार को छोड़कर (हेम शाम येपेत और उनकी पत्नियां, कुल 8 लोग )एक भी मनुष्य जहाज में नहीं आया।

·         सभी मनुष्यों ने जहाज के कारण नूह का मजाक उड़ाया था, परन्तु नूह परमेश्वर का आज्ञाकारी रहा। जिसके कारण परमेश्वर ने धरती के जीव जन्तुओं को आदेश दिया और अपने जोड़े जोड़े से हर के जानवर में से एक जोड़ा आकर उस जहाज में अपनी अपनी जगह बैठ गया।

·          जब बारिश शुरू हुई तो परमेश्वर ने धरती के भी सोते खोल दिए और पानी की बाढ़ के कारण सभी लोग भाग कर नूह के पास आए होंगे परन्तु नूह अपनी ऊपर की कोठरी से खिड़की से देख सकता था उसे खोलकर उन्हें बचा नहीं सकता था। क्योंकि दरवाजा परमेश्वर ने बाहर से बंद किया था।

·         पानी का सैलाब बढने से सभी लोग मर रहे होंगे...और शव लाशों का ढेर पानी में तैर रहा होगा।

·         नूह अपने परिवार के साथ दुःख से रो रहा होगा क्योंकि उसके भी रिश्तेदार पानी में मर गए थे। आज भी यीशु का प्रचार होता है...चर्च खुला हुआ है...और लोग हँस रहे मजाक उडा रहे हैं..लेकिन यीशु के दुबारा आगमन में उसके लोग उठा लिए जाएगे।

·         नूह का जहाज पानी में उठ गया और तैरने लगा उस जहाज का दिशानिर्देश केवल यहोवा परमेश्वर के हाथों में था।

·         भिन्न भिन्न प्रकार के जंगली और पालतू जानवरों के जोड़े और पक्षियों के जोड़े अलग अलग खंड में थे।

·         चालीस दिन और चालीस रात लगातार वर्षा होने के कारण पूरी पृथ्वी में पानी भर गया और नूह का जहाज सारी पृथ्वी में सारे पहाड़ पर्वतों से ऊपर उठ गया।

·         नूह का जहाज पानी के ऊपर एक साल दस दिन तक तैरता रहा और फिर जब परमेश्वर ने कृपा की तब बारिश रुक गई और धीरे धीरे धरती का पानी सूखने लगा और नूह का जहाज अरारात नामक पर्वत में जाकर टिक गया।

·         नूह ने एक कबूतरी को उड़ाकर देखा जब कबूतरी ने जैतून की पत्ती अपनी चोंच में लेकर आई तो नूह को पता चल गया की परमेश्वर के अनुग्रह से धरती का पानी नीचे आ गया है और जमीन दिखने लगी है।

·         नूह परमेश्वर की आज्ञा पाकर जहाज से अपने पूरे परिवार समेत बाहर आया और सारे जानवरों और पक्षियों को भी बाहर लाया और वेदी बनाकर परमेश्वर को धन्यवाद किया और परमेश्वर की अराधना की।  
·   परमेश्वर ने प्रसन्न होकर प्रतिज्ञा की, कि यह मेघधनुष (रेनबो) इस बात का चिन्ह होगा की अब कभी ऐसा जलप्रलय न होगा


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