परमेश्वर का पत्र आपके नाम

परमेश्वर का पत्र 


प्रति, आप 
द्वारा: परमेश्वर 

मेरी बात ध्यान से सुनो।

मैं तुम्हारे रोने की आवाज सुन लेता हूँ

  यह आवाज अँधेरे से गुजरती है, बादलों से होती हुई सितारों की रौशनी में मिलती है और सूर्य की किरन के रास्ते से होकर मेरे दिल तक पहुँचती है। 

   मैं हर दुखियारे की आवाज को सुनकर दुखी होता हूँ, चाहे वह जाल में फंसे खरगोश की चीख हो या अपनी माँ के घोंसले से गिर गए चिड़िया के बच्चे की आवाज हो या तालाब में डूबते हुए बच्चे की पुकार हो या फिर क्रूस पर अपना खून बहाते हुए मेरे पुत्र की आवाज हो

   यह जान लो कि मैं तुम्हारी भी आवाज सुनता हूँ। शान्ति से रहो। शांत रहो

मैं तुम्हारे दुःख दूर करूँगा क्योंकि मैं इसका कारण जानता हूँ...और इसका इलाज भी। 

तुम अपने बचपन के उन सपनों के लिए दुखी हो जो उम्र के साथ कहीं खो गए हैं। 

तुम अपने आत्मगौरव को लेकर दुखी हो, जो असफलता के स्पर्श से धूमिल हो चूका है

तुम अपनी संभावनाओं को लेकर दुखी हो, जिन्हें तुम इसलिए हासिल नहीं कर पाए क्योंकि तुमने सुरक्षा की राह चुनी थी। 

तुम अपनी वैयक्तिकता के लिए दुखी हो जो भीड़ के पैरों तले कुचल दी गयी है

तुम अपनी प्रतिभा के लिए दुखी हो जिसका दुरूपयोग करके तुमने उसे बर्बाद कर दिया है

तुम अपने आपको हेय भरी नजरों से देखते हो और जब तुम पानी में अपनी छवि देखते हो तो तुम डर जाते हो। 

यह कौन इंसान तुम्हारी तरफ देख रहा है, यह कौन है जिसकी आँखे शर्म से झुकी हुई हैं? 

तुम्हारे व्यवहार की शालीनता कहाँ है, तुम्हारी आकृति की सुन्दरता कहाँ है, तुम्हारी गति की चपलता कहाँ है, तुम्हारे मस्तिष्क की स्पष्टता कहाँ है, तुम्हारे शब्दों की प्रतिभा कहाँ है? किसने तुम्हारा यह सामान चुरा लिया? क्या तुम उस चोर को जानते हो???मैं जानता हूँ

कभी तुमने अपना सिर अपने पिता के खेत में घास के तकिये पर रखा था और बादलों के चर्च को देखा था और तुमने सोचा था संसार का सारा सोना एक दिन तुम्हारा होगा। 
कभी तुमने कई किताबे पढ़ी, थी, और कई कापियों में लिखा था और तुम्हें यह पूरा भरोसा था कि तुममे सुलेमान के बराबर या उससे भी अधिक बुद्धि थी। 

मौसम बदलकर साल बन जायेंगे और एक दिन, तुम अदन के वाटिका में सर्वश्रेष्ठ होओगे

क्या तुम्हें याद है की किसने यह योजनाएं, यह सपने, आशा के यह बीज तुम्हारे भीतर रोप हैं?

तुम नहीं जानते

तुम्हें वह क्षण भी यद् नहीं है जब तुम अपनी माँ के गर्भ से बाहर निकले थे और मैंने अपना हाथ तुम्हारे नर्म सिर पर रखा था। और जब मैंने तुम्हें अपना आशीर्वाद दिया था तो तुम्हें तुम्हारे छोटे से कान में एक रहस्य बताया था

क्या तुम्हें वह रहस्य याद है?

तुम्हें वह रहस्य याद रह ही नहीं सकता

गुजरते हुए वर्षों ने तुम्हारी याददास्त को नष्ट कर दिया है क्योंकि तुमने अपने दिमाग में डर, शंका, तनाव और अपराधबोध और नफरत जैसी भावनाएं भर ली है। इस कारण तुम्हारे दिमाग में सुखद यादों के लिए कोई जगह ही नहीं बची है। यहाँ ये जानवर र्ह्तेत हों, वहां सुखद यादें कैसे रह सकती हैं???


रोना छोड़ दो मैं तुम्हारे साथ हूँ...और यह क्षण तुम्हारे जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ है। जो समय गुजर चुका है उसे यह मान लो कि तुमने वह समय अपनी माँ के गर्भ में सोकर गुजारा है। जो गुजर चुका है, वह मर चुका है। मरे हुए को दफना दो। 

आज के दिन तुम जीवित मृत्यु से वापस लौटोगे

इस दिन, एलिय्याह और विधवा के पुत्र के प्रसंग की तरह मैं तीन बार तुम्हें छू लूँगा और तुम एक बार फिर जिन्दा हो जाओगे। 

इस दिन एलिशा और शुनेमाईट के प्रसंग की तरह, मैं अपने मुंह को तुम्हारे मुंह पर और अपनी आँखों को तुम्हारी आँखों पर और अपने हाथों को तुम्हारे हाथों पर रखता हूँ और तुम्हारा जिस्म एक बार फिर से गर्म हो जाएगा। 

इस दिन, जैसा यीशु मसीह ने लाजर की कब्र पर किया था, मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि  तुम बाहर निकलो और मौत की अपनी गुफा से बाहर आकर नये जीवन की शुरुआत करो। 

यह तुम्हारा जन्मदिन है । यह तुम्हारे जन्म की नयी तारीख है। तुम्हारी पहली जिन्दगी, किसी नाटक की तरह, केवल एक रिहर्सल थी।  इस बार पर्दा सच में उठ चुका है।इस बार पूरी दुनिया देख रही है और तुम्हारी प्रशंसा में तालियाँ बजाने का इन्तजार कर रही है। इस बार तुम असफल नहीं हो सकते। 

अपनी मोमबत्ती जला लो। अपना केक काट लो। तुम्हारा दूसरा जन्म हुआ है। 

जिस तरह तितली अपनी कवच से मुक्त होकर उडती है, तुम भी उड़ सकोगे...उतना ऊंचा जितना तुम चाहो। मानव जाति के ततैये या दुसरे नुकसान पहुंचाने वाले प्राणी तुम्हारी राह नहीं रोक पायेंगे। तुम्हारे मिशन में कोई बाधा नहीं डाल पायेगा। तुम जीवन की सच्ची समृद्धि की खोज में आगे बढ़ते चले जाओगे। 

अपने सिर पर मेरे हाथों का स्पर्श अनुभव करो। 

एक बार फिर उस रहस्य को जान लो जो तुम्हारे पैदा होने पर मैंने तुम्हारे कानों में कहा था, परन्तु तुम भूल गए। 

तुम मेरे महान चमत्कार हो। 

तुम विश्व के महानतम चमत्कार हो। 

यह पहले शब्द थे जो तुमने सुने थे। फिर तुम रोने लगे थे। सभी रोने लगते हैं। 

तब तुम्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं हुआ था...और इतने सालों में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिससे तुम्हारा यह अविश्वास दूर हो। तुम किस तरह चमत्कार हो सकते हो, जब तुम छोटे-छोटे कामों में असफल होते हो? तुम किस तरह चमत्कार हो सकते हो जब तुम्हें छोटी-छोटी जिम्मेदारियों को निभाने का आत्मविश्वास नहीं होता? तुम किस तरह चमत्कार हो सकते हो जब तुम करब में डूबे हुए हो और इस बात पर चिंतित रहते हो की कल का भोजन कहाँ से आएगा? 

बहुत हो चुका!! नाली में बहा दूध अब फिर कभी वापस नहीं आ सकता। परन्तु मैंने कितने सारे भविष्यवक्ताओं को कितने सारे समझदार व्यक्तिओं को कलाकारों को संगीतकारों को और विज्ञानिकों को कितने दार्शनिक और सन्देशवाहकों को तुम्हारे पास भेजा जो तुम्हें तुम्हारी ईस्वरीय स्वरूप और ईश्वरीय संभावनाओं और
उपलब्धि के रहस्य बताएं??और बदले में तुमने उनके साथ कैसा व्यवहार किया??

फिर भी मैं तुमसे प्रेम करता हूँ और मैं तुम्हारे साथ हूँ। मैं उन भविष्यवक्ताओं की बातों को सच कर रहा हूँ..जिसने यह घोषणा की थी की परमेश्वर दुबारा अपना हाथ उठाकर अपने लोगों को मुक्ति देगा। 

मैंने अपना हाथ उठा लिया है। 

यह दूसरी बार है। 

तुम मेरे अपने हो । 

यह पूछना व्यर्थ है कि क्या तुम्हें पता नहीं था, क्या तुमने सुना नहीं था, क्या तुम्हें यह शुरुआत से ही बताया नहीं गया था; क्या तुमने धरती की नींव से इसे समझा नहीं था? 

तुमने इसे जाना नहीं था; तुमने इसे सुना नहीं था; तुमने इसे समझा नहीं था।  

तुम्हें बताया जा चूका है कि तुम दरअसल छुपे हुए स्वर्गदूत हो, तुम ईश्वर की तरह ही हो, परन्तु इसके बाद भी तुम मूर्ख की भूमिका निभा रहे हो। तुम्हें बताया जा चुका है कि तुम मेरी अद्भुत रचना हो, जिसमें प्रचुर बुद्धि, अनंत संभावनायें, सुंदर और सराहनीय आकृति और गति स्वर्गदूत जैसे कार्य, परमेश्वर जैसी समझ है। 

तुम्हें बाताया जा चुका है कि तुम इस धरती के नमक हो। 
तुम्हें पहाड़ हिलाने का रहस्य, असंभव को संभव करने का रहस्य बताया जा चुका है। 

तुमने किसी पर विशवास नहीं किया। तुमने सुख की राह दिखाने वाले नक्शे को जला दिया। तुमने मन की शान्ति हासिल करने की सारी संभावानाओं को नष्ट कर दिया। तुमने प्रसिद्धि के पथ पर राह दिखाने वाली मोमबत्तियों को बुझा दिया। और फिर तुम लडखडा गए, डर गए, व्यर्थता और आत्मदया के अँधेरे में खो गए, और फिर तुम अपने ही बनाये हुए नरक में गिर गए। 

फिर तुम रोये और अपनी छाती पीटकर अपनी तकदीर को दोष देने लगे कि तुम्हारे साथ ऐसा क्यों हुआ। तुमने यह नहीं माना कि तुम्हें अपने घटिया विचारों और आलसी कार्यों के कारण घटिया परिणाम मिले। तुमने अपनी असफलता का दोष देने के लिए एक बहाने की तलाश की । और वह बहाना तुम्हें कितनी जल्दी मिल गया। 

तुमने मुझे दोष दिया। 

तुम रोये कि तुम्हारी सारी कमियां, तुम्हारे अवसरों की कमी, तुम्हारी असफलताएं, तुम्हारी औसत जिन्दगी यह सब ईश्वर की इच्छा थीं।  तुम गलत थे। 

हम ठीक से लेखा जोखा कर लें। पहले तो हम तुम्हारी कमियों को गिन लें। क्योंकि मैं तब तक तुमसे नया जीवन शुरू करने के लिए नहीं कह सकता जब तक कि तुम्हारे पास इसके लिए सही औजार न हों? 


देखो तुम देख सकते हो..और तुम्हारी आँखों में मैंने जो अरबों तन्तु लगाए हैं उनकी वजह से आप किसी पत्ती वर्फ के टुकड़े, तालाब पक्षी बच्चे बादल सितारे गुलाब इन्द्रधनुष को ...देख सकते हो और आँखों को प्रेम की भाषा भी देख सकते हैं। इसे अपना पहला वरदान मानें। 

क्या तुम सुन सकते हो? क्या बच्चे का हँसना या रोना तुम्हें सुनाई नहीं देता?

हाँ, आप सुन सकते हैं...और आपके हर कान में मैंने जो चौबीस हजार तन्तु लगाये हैं वे आप तक पेड़ों से टकराती हवा, चट्टानों पर टकराती बच्चों की मस्ती पहुंचाते हैं...और यह शब्द भी कि मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। इसे एक और वरदान मानें। 

क्या तुम बोल सकते हो?? हाँ तुम बोल सकते हो...जो कोई दूसरा प्राणी नहीं कर सकता।आपके शब्द क्रोधित मनुष्य को शांत कर सकते हैं, निराश आदमी को आशा दे सकते हैं, पलायनवादी को कर्म के लिए उकसा सकते हैं, दुखी को खुश कर सकते हैं, अकेले आदमी को दिल बहला सकते हैं, श्रेष्ठ व्यक्तियों की प्रसंसा कर सकते हैं, पराजित लोगों को प्रोत्साहन दे सकते हैं, अज्ञानियों को सिखा सकते हैं...और कह सकते हैं कि मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। इसे एक और वरदान मानें। 

क्या तुम्हें लकवा मार गया है? क्या तुम जमीन पर रेंगकर चलते हो? 

नहीं। आप आच्ची तरह से चल सकते हैं। आप पेड़ नहीं जो किसी छोटी सी जगह पर हवा और दुनिया के थपेड़े बर्दाश्त करने के लिए अभिशप्त है। आप दौड़ सकते हैं, नाच सकते हैं और काम कर सकते हैं। मैंने आपके भीतर पांच सौ मांसपेशियाँ, दो सौ हड्डियाँ, सात मील लंबा नर्व फाइवर इसलिए लगाया है ताकि आप अपनी इच्छा से चल-फिर सकें इसे एक और वरदान मानें

क्या तुमसे कोई प्रेम नहीं करता और तुम किसी से प्रेम नहीं करते? क्या तुम दिन-रात अकेलेपन में रहते हो?

नहीं, बिलकुल नहीं। अब आप प्रेम का रहस्य जान चुके है की प्रेम पाने के लिए आपको पहले बिना प्रतिदान की आशा के प्रेम देना पड़ता है। प्रेम एक ऐसा उपहार है जिसके बदले में कोई मांग नहीं होती। जब आप जान चुके हैं की निस्वार्थ भाव से प्रेम करना अपने आप में पुरस्कार है। और चाहे प्रेम के बदले में प्रेम न मिले, परन्तु आपका प्रेम व्यर्थ नहीं जाता, क्योंकि आप प्रेम आपकी तरफ वापस प्रवाहित होकर आता है और आपके हृदय को नर्म करके इसे शुद्ध कर देता है।इसे एक और वरदान मानें। दुबारा गिने

क्या तुम्हारा ह्रदय कमजोर है? क्या यह तुम्हारे जीवन को चलाने में समर्थ नहीं है ?

नहीं। आपका ह्रदय बहुत शक्तिशाली है। अपने सीने को छुओ और उसकी लय को महसूस करो। दिन- रात, हर पल यह धडकता रहता है। यह एक साल में तीन करोड़ साठ बार धडकता है। और चाहे आप जागें या सोयें, यह जीवन भर यही करता रहता है। यह साठ हजार मील लंबी शिराओं, धमनियों और नसों में आपके खून को शुद्ध करता है। यह हर साल छह लाख गैलन खून को पंप करता है।इंसान आज तक ऐसी मशीन नहीं बना पाया है। इसे एक और वरदान मानें। 

क्या तुम्हें कोढ़ हो गया है? क्या लोग तुम्हें आते देखकर डर जाते हैं और दूर भागते हैं?

नहीं। आपकी त्वचा साफ है और यह अद्भुत कृति है। आपको सिर्फ इसका ध्यान रखना होता है, इस पर साबुन और तेल लगाकर इसे साफ रखना होता है। समय के साथ-साथ मजबूत से मजबूत लोग्हे पर भी दाग लग जायेंगे और उस पर जंग लग जाएगी, परन्तु आपकी त्वचा के साथ ऐसा नहीं होगा। आख़िरकार मजबूत से मजबूत धातु भी धिस जायेगी, परन्तु वह परत नहीं धिसेगी जो मैंने आपके चारो तरफ बनाई है। यह अपने आपको लगातार नया करती रहेगी, उप्रानी कोशिकाओं की जगह पर नयी कोशिकाएं आती रहेगी, जिस तरह कि आप पुराने की जगह नए बन जायेंगे। इसे एक और वरदान माने। 

क्या तुम्हारे फेफड़ों में कोई गड़बड़ है? क्या जीवन भरी सांस को तुम्हारे शरीर में जाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है?

नहीं...आपने अपने चारों तरफ इतना प्रदूषण भरा माहौल बना लिया है इसके बावजूद आपके फेफड़े आपके शरीर में आराम से आक्सीजन ले जाते हैं। आपके फेफड़े साथ करोड़ मांस की परतों तक आक्सीजन ले जाते हैं और अशुद्ध गैसों को शरीर से बाहर निकालते हैं। इसे एक और वरदान माने। 

आपके पास इतना कुछ है...आपके वरदान आपके प्याले से छलके पड़ रहे हैं...और आपको उन वरदानों का एहसास ही नहीं है। जिस तरह कोई पिता अपने बच्चे को लाड़-प्यार में बिगाड़ देता है, उसी तरह मैंने तुम्हें उदारता से और लगातार दिया है । 


मुझे जवाब दो

खुद को जवाब दो। 

कोई भी बूढा और बीमार, कमजोर और लाचार अमीर आदमी उन वरदानों को हासिल करे के लिए अपनी तिजोरी में भरा सारा पैसा लुटा देगा, जिन्हें आप इतने हल्केपन से ले रहे हैं। 

सुख और सफलता के इस पहले रहस्य को जाने कि आपके पास इस वक्त वह सब कुछ है जो महान गौरव हासिल करने के लिए जरूरी है,। यह सब चीजें आपका खजाना हैं, आपके औजार हैं जिनकी मदद से आप आज से नए और बेहतर जीवन की नींव रखेंगे। 

इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, अपने वरदान गिनों और जान लो कि तुम मेरी महानतम रचना हो। जीवित मृत्यु से वापस आने के लिए और विश्व का महानतम चमत्कार करने के लिए तुम्हें मेरा यह पहला नियम मानना होगा। 

और गरीबी में सीखे हुए अनुभवों के प्रति धन्यवादी रहो। क्योंकि गरीब वह नहीं होता जिसके पास कम होता हैं बल्कि वह होता है जिसे बहुत ज्यादा चाहिए होता है। और सच्ची सुरक्षा उन चीजों में नहीं होती जो आपके पास हैं बल्कि उन चीजों में होती हैं जिनके बिना आपका काम चल सकता है। 
मैंने तुम पर अपना हाथ रखा और तुम्हें ऐसी शक्तियाँ दी हैं जो ब्रम्हांड में किसी दूसरे प्राणी के पास नहीं हैं

मैंने तुम्हें सोचने की शक्ति दी

मैंने तुम्हें प्रेम करने की शक्ति दी। 

मैंने तुम्हें इच्छा करने की शक्ति दी

मैंने तुम्हें हँसने की शक्ति दी

मैंने तुम्हें कल्पना करने की शक्ति दी

मैंने तुम्हें रचना करने की शक्ति दी

मैंने तुम्हें योजना बनाने की शक्ति दी

मैंने तुम्हें बोलने की शक्ति दी

मैंने तुम्हें प्रार्थना करने की शक्ति दी

तुम पर मेरे गर्व की कोई सीमा नहीं थी। तुम मेरी सबसे बेहतरीन रचना थे, मेरा महानतम चमत्कार। एक सम्पूर्ण जीता जागता प्राणी। एक ऐसा प्राणी जो किसी भी मौसम के हिसाब से ढल सकता था, किसी भी कठिनाई और चुनौती का सामना कर सकता था। जो मेरे हस्तक्षेप के बिना अपनी खुद की तकदीर बना सकता था। जो केवल सहज ज्ञान से नहीं, बल्कि विचार और चिन्तन से किसी अनुभूति या एहसास में यह फैसला कर सकता था की उसके लिए और सारी मानवता के लिए कौन सा कार्य सर्वश्रेष्ठ रहेगा। 


मैंने तुम्हें ...चुनने की शक्ति दी। 

इस उपहार से मैंने तुम्हें अपने स्वर्गदूतों से भी ऊपर स्थान दिया...क्योंकि स्वर्गदूत स्वयं अपना मार्ग चुनने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। मैंने तुम्हे अपने भाग्य पर पूरा नियन्त्रण दिया। मैंने तुम्हे खुद अपनी स्वतंत्र ईच्छा से अपना रास्ता निर्धारित करने की स्वतन्त्रता दी। 

जो गुजर गया उसे गुजर जाने दो...और अब अपनी चुनाव करने की शक्ति का समझदारी से इस्तेमाल करो

नफरत करने के बजाय...प्रेम का चुनाव करो

रोने के बजाय...हँसने का चुनाव करो

नष्ट करने के बजाय..चने का चुनाव करो

बुराई करने के बजाय...तारीफ करने का चुनाव करो

चोट पहुंचाने के बजाय...मरहम लगाने का चुनाव करो। 

चोरी करने के बजाय.. देने का काम करो

काम टालने के बजाय...काम करने का चुनाव करो

सड़ने के बजाय...बढ़ने का चुनाव करो

शाप देने के बजाय...प्रार्थना करने का चुनाव करो

मरने के बजाय...जिन्दा रहने का चुनाव करो। 

अब तुम जान गए होगें की तुम्हारे दुर्भाग्य मेरी इच्छा से नहीं आये क्योंकि सारी शक्ति तो तुम्हारे ही पास थी। 

अब अपने आँसू पोंछ डालो...आगे हाथ बढाओ मेरा हाथ पकड़ो और सीधे खड़े हो जाओ....

तुम जिन कब्र के कपड़ों में बंधे हुए थे उनके बंधन से मैं तुमको आजाद करता हूँ

तुम मेरी सन्तान हो 

तुम दुनिया के सबसे महान चमत्कार हो 

तुम दुनिया के सबसे महान चमत्कार हो

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मित्रों कई बार हमारे मनो में ख्याल आता है, कि हमें बाइबल क्यों पढना चाहिए?  इसके लिए बाइबल से ही मैं आपको जवाब देना चाहती हूँ मैं ...

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