अंधे भिखारी की प्रार्थना (Bible Story)

हिंदी पॉडकास्ट सुनिए कहानी बाइबल की 



मरकुस 10:46-52

  • पहली शताब्दी में यरीहो नामक शहर में, जहाँ चोर और डाकू भी रहा करते थे।  

  • इस शहर को यहोशू नामक एक परमेश्वर के दास ने शापित किया था। अर्थात यह शहर शापित शहर भी है।(यहोशु 6:26) 

  • इस शहर में एक भिखारी भी रहता था जो जन्म से अँधा था...इसका नाम बरतिमाई था और उसके पिता का नाम तिमाई था।  



  • उसके घर में कोई उससे प्रेम नहीं करता था...बचपन से ही अँधा होने के कारण उस बच्चे को उस घर में प्रेम नहीं मिला...जैसे ही उस बच्चे ने चलना सीखा...उसके परिवार के लोग उसे सड़क के किनारे एक कटोरे के साथ भीख मांगने के लिए बैठा दिया करते थे....

  • यह बच्चा बचपन से ही एक नौकरी में लग गया वो काम था भीख माँगना।  उसने कभी भी इस संसार को नहीं देखा था...खूबसूरती नहीं देखा था।  उसके जीवन में कोई रंग नहीं था....

  • यह बच्चा जवान हुआ और उसके पास भीख मांगने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था...और पैसे भी घर वाले ले लिया करते थे।

  • वो बहुत दुखी था...वो रात को सोचता कब सुबह होगी और सुबह सोचता था कब रात होगी...कोई उत्साह नहीं.. कोई आशा नहीं...जिन्दगी थमी हुई सी थी.. रुकी हुई सी थी...

  • लेकिन एक दिन उसने कुछ बेहतरीन बात सुना...उसने सुना कि एक मसीहा है जो लोगों पर दया करता है...वो लोगों की बीमारियों को चंगा करता है...आशा हीन लोगों को आशा देता है। उसका नाम यीशु मसीह है

  • यह सुनकर इस अंधे भिखारी के अंदर आशा की एक किरण जागने लगी और वह सोचने लगा इस रुकी हुई शापित जिन्दगी से भी निकला जा सकता है...मेरे जीवन में भी बदलाव की परिवर्तन की आशा है....

  • और ऐसा हुआ एक दिन प्रभु यीशु उसी शहर यरीहो से होकर जा रहे थे।  और यीशु के पीछे उसके शिष्यगण और एक बड़ी भीड़ पीछे पीछे चल रही थी...क्योंकि वह बीमारों को चंगा करता था चमत्कार करता था। कुछ लोग उसके पीछे इसलिए भी चलते थे ताकि उसकी कुछ गलती को पकड सकें।  

  • जब इस अंधे भिखारी ने जब सुना कि यीशु यहाँ इस शहर से और इसी सड़क से होकर जा रहे हैं...उसने अवसर को पहचाना...

  • उसने सोचा यदि मेरे जीवन में यह अवसर चला गया तो फिर कभी नहीं आएगा।  इसलिए वह जोर जोर से प्रार्थना करने लगा...पुकार पुकार कर दया की भीख मांगने लगा...वो कहने लगा हे दाउद की सन्तान यीशु मुझ पर दया कर... हे दाउद की सन्तान यीशु मुझ पर दया कर।  

  • यीशु के पीछे चलने वालों ने यह सुनकर उस अंधे को चुप करवाने के लिए उसे डांटा...

  • लेकिन उस डांट का अंधे बरतिमाई पर कुछ असर नहीं हुआ बल्कि उसकी चंगाई पाने की इच्छा इतनी तीव्र थी...कि वो और भी जोर जोर से पुकार कर प्रार्थना करने लगा...हे दाउद की सन्तान यीशु मुझ पर दया कर...

  • उसकी प्रार्थना उसके दिल से निकल रही थी....उसे चिल्लाने में कोई शर्म नहीं थी...वह जानता था की सबसे बड़ा रोग कि क्या कहेंगे लोग...उसने लोगों की कोई चिंता नहीं की लोग क्या कहेंगे...

  • आज तक उसने पैसों के लिए पुकारा था...दूसरों के लिए (अपने परिवार के लिए जो उससे नहीं बल्कि उसके भीख में मिले हुए पैसों से प्रेम करते थे) उनके लिए लोगों को पुकारा था।  

  • परन्तु आज वो पहली बार अपने जीवन के लिए मांग रहा था...बिना रुके लगातार मांग रहा था....

  • उसकी इस प्रार्थना सुनकर प्रभु यीशु रुक गए...प्रभु यीशु जहां जहां रुके थे वहां एक परिवर्तन जरुर आया था।  और जब प्रभु यीशु रुक गए सारी की सारी भीड़ रुक गई...सभी आपस में बातें करने लगे क्या हुआ??  क्या हुआ??  

  • प्रभु यीशु क्यों रुक गए...किसी ने कहा अब कुछ चमत्कार जरूर होगा...वो एक अंधे भिखारी की प्रार्थना पर रुक गए..

  • यीशु ने अपनी सामर्थी आवाज में जिस आवाज को आंधी तूफान भी सुनकर आज्ञा मानते और शांत हो जाते हैं, कहा, 'उसे बुलाओ'...

  • और जो अभी तक उस अंधे को डांट रहे थे ...चुप होने के लिए कह रहे थे...वही लोग उस अंधे को कहने लगे हिम्मत रख...हियाव बाँध देख प्रभु तुझे बुला रहे हैं....प्रभु ने हमें कभी नहीं बुलाया लेकिन वो तुझे बुला रहे हैं...

  • इतना सुनते ही अंधे बरतिमाई के जैसे मरे हुए शरीर में जान आ गई...वो मारे ख़ुशी के अपने थिगड़े लगे हुए फटे पुराने कपड़े को फ़ेंक कर उठा....

  • आज तक वो कपड़े ही उसकी पहचान थे...वो अपनी पुरानी पहचान को फ़ेंक कर उठा...इस क्रिया से उसने समाज को संदेश दिया...मुझे सारे संसार को बनाने वाले ने बुलाया है...अब मुझे अपनी पुरानी पहचान में रहने की कोई आवश्यकता नहीं...जिस क्षण के लिए उसने जीवन भर इंतजार किया था वो समय आ पहुंचा था...उसके रचयिता ने उसकी प्रार्थना सुनकर उसे बुलाया था...

  • वह शीघ्र उठा...जल्दी जल्दी हाथ आगे बढाते हुई बढ़ने लगा...कुछ भी देरी नहीं की...

  • उसकी इस जिज्ञासा को देखकर प्रभु खुश हो गए और कहने लगे..बरतिमाई बोल मैं तेरे लिए क्या करूँ.....प्रभु जानते थे कि उसे क्या चाहिए...उपस्थित सभी लोग जानते थे...कि उस अंधे को आँख चाहिए...परन्तु प्रभु यीशु ने चाहा कि यह स्वयं अपने मुंह से कहे...क्या चाहिए...प्रभु अपने मांगने वाले को प्रतिफल देता है... उसने पहले ही कहा था मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा। 

  • अँधा भिखारी बरतिमाई कहने लगा प्रभु मैं देखना चाहता हूँ...वो प्रभु को देखना चाहता था...वो पैसे, धन दौलत या आँख नहीं चाहता था लेकिन वो अपने प्रभु को देखना चाहता था....

  • प्रभु यीशु ने कहा, 'जा तेरे विश्वास ने तुझे चंगा कर दिया'...प्रभु के मुंह से जैसे ही शब्द निकले वो अँधा देखने लगा...और बड़ा ही खुश हो गया...प्रभु की जय जयकार करने लगा....

  • उसने देखा कि वो किस शहर में रह रहा है...ये तो अच्छी जगह नहीं..आज तक किसी ने उस पर इस प्रकार प्रेम नहीं दिखाया था...उसने सब कुछ को छोडकर प्रभु के पीछे चलने लगा...और वो प्रभु यीशु की भीड़ में शामिल हो गया।  

  • वे उस शापित शहर से निकल कर एक शहर पहुंचे जिसका नाम यरूशलेम है...अर्थात शान्ति और आशीषों का शहर...

  •  प्रभु हमारी प्रार्थना भी सुनकर हमें हमारी बुरी परिस्थिति से निकाल कर बरकतें देना चाहता है...
  • (1) परिवर्तन की तीव्र इच्छा रखें.......... 
  • (2) परमेश्वर पर पूर्ण भरोसा रखें....
  • (3) उससे दिल से प्रार्थना करें....
  • (4) उसका अनुसरण करें...

  •  प्रभु आपको आशीष दे...


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