आखिर ऐसा क्यों?? (Best Short Story)







  • एक जवान लड़का अपनी पढ़ाई लिखाई करके शहर नौकरी ढूढने आया...

  •  बहुत समय बीत गया, परन्तु उसे कोई भी नौकरी नहीं मिल रही थी...अब गाँव से लाए हुए पैसे भी खत्म हो चले थे...उसे शहर में जीने के लिए पैसे की जरूरत थी इसलिए वह बड़ी ही मेहनत से नौकरी ढूढ़ रहा था।
  • एक दिन सुबह उठकर तैयार होकर वह काम ढूंढने निकला...और सोचा यदि उसे नौकरी नहीं मिली तो कुछ भी बोझा ढो लेगा या छोटा मोटा काम कर लेगा...नहीं तो उसे गाँव वापस जाना पड़ेगा।
  •  वह कुछ दूर चला तो उसे एक गोल सा चिकना पत्थर मिला उसने सोचा अरे बड़ा अच्छा पत्थर है...उसने उस पत्थर को उठा कर अपनी पेंट की जेब में रख लिया....
  • शाम को जब वह घर पर आकर स्नान के लिए कपड़े उतार रहा था...तो उसकी जेब से एक पत्थर गिरा...उसने उस पत्थर को उठाया और सोचने लगा...अरे इस पत्थर के कारण ही शायद मुझे आज एक छोटी नौकरी मिली है...
  • और उसने उस पत्थर को उठाकर एक ऊंचे ताखे में रख दिया जो दीवार में सामान रखने का स्थान बना हुआ था। 
  • सुबह उठ कर उसकी नजर उसी पत्थर पर पड़ी...उसने सोचा आज थोड़ी ठंड है शायद इस पत्थर को भी ठंड लग रही होगी...और उसने एक छोटे से रुमाल को उसके ऊपर लपेट दिया और कहा मेरी तरक्की होगी तो मैं तेरे लिए एक नए कपड़े भी दिलाऊंगा। 
  • अब क्या था...वह दिन रात मेहनत करता और अपने काम में तरक्की करता गया...अब उसके पास अपना घर भी था...और उसने उस पत्थर के लिए भी एक छोटा लकड़ी का घर बनवा दिया था। 
  • थोड़े समय बाद उसकी शादी हो गई।  थोड़े दिनों में उसकी पत्नी समझ गई इस पत्थर की देखभाल करनी है...वह अब जो भी खाना बनाती पहले उसमें थोडा सा रख देती...उसे समय समय पर साफ करती उसके कपड़े बदलती लेकिन...
  • उसने कभी भी अपने पति से यह पूछने की हिम्मत नहीं की कि वे ऐसा इस पत्थर के साथ क्यों करते हैं???
  • कुछ वर्षो के बाद उनके बच्चे हुए और बच्चों ने भी नहीं पूछा उन्होंने भी वही सब किया और घर बढ़ता गया साथ में उस पत्थर का भी घर बढ़ चुका था...
  • कुछ वर्षों बाद बुजुर्ग पति पत्नी भी मर चुके थे उनके बच्चों की भी शादी हो गई थी...और घर एक हवेली में बदल चूका था बहुत बड़े घर में सबसे बड़ा कमरा इस पत्थर के लिए था...उसमें लगातार खुशबु महकती थी वहां दिया जलता रहता था...
  • किसी भी बच्चे को लेकिन यह नहीं पता था कि आखिर इस पत्थर की कहानी क्या है...यह हम क्यों करते हैं....आखिर ऐसा क्यों करते हैं??



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