क्लेशों में आनन्द (सुंदर story)



(रोमियों 8:18) 
क्योंकि मैं समझता हूँ, कि इस समय के दुःख और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं


  • एक दयालु और उदार राजा था...जिसके पास बहुत से भीखारी प्रतिदिन भीख मांगने आया करते थे... 

  • राजा उन सभी को कुछ न कुछ दान दिया करता और भोजन भी दिया करता। लेकिन उनमें से केवल एक भिखारी था जो सच्चे दिल से राजा को धन्यवाद दिया करता...और राजा को लम्बी आयु की दुआएं देता...

  • राजा को उसका यह अंदाज बहुत अच्छा लगता...

  • राजा ने एक दिन उस भिखारी से बोला आज से तुम भीख नहीं माँगना...यह सुनकर वह फिर भी बोला राजा की जय हो राजा चिरंजीवी रहे...

  • तब राजा ने कहा आज से तुम मेरे संग इस राजमहल में मेरे मित्र बनकर रहोगे...जो खाना मैं खाता हूँ तुम भी खाओगे और जैसे कपड़े मैं पहनता हूँ वैसे तुम भी पहनोगे...

  • यह सुनकर उस भिखारी को अपने कानों पर भरोषा नहीं हुआ...और उसने कहा नहीं राजन मैं इस योग्य नहीं कि आपके सम्मुख सिर उठा सकूँ और आप कह रहे हैं मैं आपके साथ भोजन करूँ.....

  • सभी सैनिकों और मंत्रियों को भी उस भिखारी के ऊपर जलन होने लगी...

  • लेकिन यह राजा का आदेश था...जिसे कोई नहीं टाल सकता था....

  • अब राजा जहाँ भी जाता वहां अपने इस नये मित्र को भी ले जाता...जो भोजन राजा करता वही इस भीखारी को भी खिलाता और वैसे ही वस्त्र पहिनाता। 

  • एक दिन राजा और भिखारी शिकार करने जंगल गए...वे दोनों बहुत ही घने जंगल में चले गए...सुबह से शाम हो गई...परन्तु उन्हें कोई भी शिकार नहीं मिला....अब दोनों को बहुत भूख भी लगी थी...दूर दूर तक कुछ खाने-पीने को कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था....

  • तभी राजा को दूर से एक पेड़ पर एक फल दिखाई दिया...उस पेड़ पर केवल एक ही फल था...जो दिखने में बहुत सुंदर दिख रहा था...राजा ने तुरंत पेड़ पर चढ़ कर उस फल को तोड़ कर नीचे अपने मित्र के पास ले आया।  

  • भूख के मारे दोनों का बुरा हाल था...इसलिए राजा ने तुरंत अपनी तलवार निकाल कर उस फल के दो भाग किये और आधा उस भिखारी मित्र को देते हुए बोले लो ये खा लो...भूख से कुछ तो राहत मिलेगी। 

  • भिखारी जल्दी जल्दी उस फल को खा लिया और फिर बोला राजा जी बड़ी भूख लगी है इसे खाने के बाद तो और भी ज्यादा भूख लग आई...मुझे कृपया यह भी दे दो..... राजा ने उस आधे फल से के भी दो भाग किये और उसमें से एक भाग और देते हुए बोले अच्छा ये लो...और ये भाग मैं खाउंगा....

  • तभी उस भिखारी ने जल्दी से फल के उस भाग को भी खाकर...उस राजा के फल के आखरी भाग को मांगने लगा...

  • तब राजा क्रोध से भर गया...और कहने लगा...तुझे जरा भी लज्जा नहीं...मैंने तुझे पहले खाने को दिया...मैं भी भूखा हूँ...और तू इसे भी मांग रहा है....सुनकर भिखारी सहम सा गया।

  • इतना कह कर राजा ने उस फल को खाने के लिए जैसे ही मुंह में रखा...राजा चिल्ला उठा...ओह्ह्ह  कितना कड़वा फल है यह....

  • राजा ने उस भिखारी मित्र से पूछा, 'अरे तुम इतना कड़वा फल कैसे स्वाद से खा लिया...और इसे भी मांग रहे थे...आखिर क्यों???

  • तब उस भिखारी मित्र ने नम्रता से कहा...राजन आज तक आपने मुझे अच्छे अच्छे स्वादिष्ट भोजन से तृप्त किया है आज जब कड़वा फ़ल खाने का मौका है तो वो मैं कैसे गवां दूँ...मैं नहीं चाहता था वो कड़वा अनुभव आपको हो....

  • हाँ मित्रों परमेश्वर भी वो दयालु राजा है जिसने हमें अपार आशीषें दी हैं....लेकिन जब वह हमें अनुशासित करें तो हमें भी धैर्य से सह लेना चाहिए.. क्योंकि उसके बाद उसकी आशिर्वाद और महिमा दुगने होंगे...





  बाइबल वचन - क्लेशों में आनन्द  



(याकूब 1:2-4) हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे। 


(रोमियों 5:3-5) केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमंड करें, और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। और आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्रआत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।  


(1 पतरस 4:13) जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्दित और मगन हो।


(रोमियों 12:12) आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो।


(1 पतरस 5:10) अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिस ने तुम्हें मसीह में अपनी अनंत महिमा के लिए बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुःख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवंत करेगा।






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