ग्रहणयोग्य बलिदान (story)






ग्रहणयोग्य बलिदान 


  • रविवार की शाम तीन बच्चे अपने घर में खिलौनों के साथ खेल रहे थे।
  •  तीनों ने आज ही चर्च में पास्टर जी से नूह की कहानी सुनी थी...इसलिए उन्होंने एक पानी के टब में एक प्लास्टिक की नांव तैराकर खेलने लगे...
  •  तीनों ने हसंते हुए कहा ये नूह की जहाज है इसमें सभी जानवर हैं...
  •  थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा अब बारिस बंद हो गई अब नूह और उसका परिवार नांव से बाहर आ रहे हैं...ऐसा कहकर उन्होंने नांव को उठाकर टब से बाहर नीचे रख दिया...
  •  फिर उन्होंने आपस में कहा अब नूह ने क्या किया था...छोटी बहन को याद आया पास्टर जी ने कहा था...तब नूह ने परमेश्वर को धन्यवाद करने के लिए...जानवर को बलिदान करके जलाया था...जिसके कारण परमेश्वर ने उसे आशीष दिया और कहा इसके बाद ऐसा जलप्रलय कभी नहीं होगा...
  •  उन दोनों ने एक दूसरे का मुंह देखा और कहा हमें अपने अपने जानवर को देना होगा.....
  •  तीनों अपने अपने कमरे में दौड़ कर गए और अपने अपने खिलौनों में ढूंढने लगे...
  • तीनों  ने अपने खिलौनों में से जो सबसे टूटे और फटे बेकार खिलौने थे फटा हुआ हाथी, हिरन जिसकी टांग टूट चुकी थी ऐसे खिलौने लाकर   कहने लगे हम ये देते हैं.....


11 Bible verse for Giving 


(व्यवस्थाविवरण 16:17) 
    सब पुरुष अपनी अपनी पूंजी, और उस आशीष के अनुसार जो तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझ को दी हो, दिया करें।

(1 इतिहास 29:9)
   तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न होकर खरे मन और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिए भेंट दी थी ; और दाउद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ

(नीतिवचन 3:9)
 अपनी संपत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की सारी पहली उपज दे देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना

(नीतिवचन 11:25)
उदार प्राणी हष्ट पुष्ट हो जाता है, और जो दूसरों की खेती सींचता है, उसकी भी सींची जाएगी। 

(नीतिवचन 21:26)
...धर्मी लगातार दान करता रहता है।  

(नीतिवचन 22:9)
दया करनेवाले पर आशीष फलती है, क्योंकि वह कंगाल को अपनी रोटी में से देता है। 

(नीतिवचन 28:27) जो निर्धन को दान देता है उसे घटी नहीं होती, परन्तु जो उससे दृष्टि फेर लेता है वह शाप पर शाप पाटा है। 

(मलाकी 3:10) 
सारे दशमांश भंडार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिए खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष करता हूँ कि नहीं।  

(मत्ती 6:3-4)
"जब तू दान करें तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बायाँ हाथ न जानने पाए।  ताकि तेरा दान गुप्त रहे, और तब तेरा पिता जो गुप्त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।"

(लूका 6:38) दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा।  लोग पूरा नाप दबा दबाकर और हिला हिलाकर और उभरता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे, क्योंकि जिस नाप से तुम नापते हो, उसी नाप से तुम्हारे लिए भी नापा जाएगा।  

 (प्रेरितों के काम 20:35)  

2 comments:

  1. Very nice.
    Sirf kahani hi nahi balki ek shiksha bhi hai jo ham sabhi ko imandari se karna chahiye..

    ReplyDelete

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