Cast Out Bad Habits (Hindi Short Story)



धोखा न खाओ बुरी संगती अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है 
(1 कुरिन्थियों 15:33)



  • पिता अपने 12 वर्ष के बेटे की बुरी संगती से बड़ा ही परेशान था। वो अपने बेटे से तो बहुत प्यार करता था परन्तु उसकी बदलती गंदी आदतों से जो उसके मित्रों के द्वारा उस पर पड़ रहीं थीं उनसे बहुत दुखी हो चूका था। 

  • पिता अपने पुत्र के लिए अच्छी सी अच्छी चीजें, वस्त्र और खिलौने लाता...और उसे अपने पास बैठाकर खूब सिखाता...परन्तु बेटा था कि चिकने घड़े के जैसे उसके पिता की बातों का उस पर कुछ असर ही नहीं होता। 

  • एक दिन एक चर्च का पास्टर उसे देखा और पूछने लगा...भाई जी क्या बात है?  आप बड़े दुखी दिखाई दे रहे हैं...

  • पिता ने पास्टर जी को सारा हाल कह सुनाया...समझदार पास्टर जी ने कहा आप चिंता मत करो ..एक काम करो उसे कल दोपहर को स्कूल के बाद मेरे पास भेज देना....सब ठीक हो जाएगा। 

  • पिता ने वैसा ही किया...स्कूल से आने के बाद उसने अपने बेटे को पास्टर जी के पास ले गया...और घर चला आया। 

  • पास्टर जी ने उस बेटे को लेकर उससे बातें करते हुए अपने घर के बाग़ में ले गए और एक लम्बी कुर्सी में दोनों बैठ गए। तब पास्टर जी ने उस बालक से कहा, बेटे मेरे लिए कुछ काम कर सकते हो...बेटा बोला हाँ पास्टर जी बोलिए मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ? 

  • पास्टर जी ने कहा वो छोटा पौधा उखाड़ कर मेरे लिए ला सकते हो?? लड़के ने कहा यह तो मेरे लिए बाएं हाथ कह काम है...और वह इतना कहकर दौड़ कर गया.. और उस पौधे को उखाड़ कर ले आया...

  • पास्टर जी ने कहा शाबास...क्या एक काम और कर सकते हो...उसने कहा हाँ पास्टर जी आप बोलिए...पास्टर जी ने एक और बड़े झाडी नुमा पौधे की और इशारा करते हुए कहा वो भी उखाड़ सकते हो क्या? 

  • लड़के ने कहा बिल्कुल अभी लीजिए..और उस झाडी को उखाड़ने में उसे बहुत समय लग गया परन्तु पसीने पसीने होकर वह थोड़ी देर में उस झाडी को उखाड़ने में सफल हो गया...   

  • लड़के को अब इस काम में जैसे अच्छा लगने लगा अब वह फिर पास्टर जी के पास आया और कहने लगा बोलिए पास्टर जी अब क्या करना है....पास्टर जी ने अबकी बार एक बड़े पेड़ की और इशारा करके कहने लगे बेटा बस एक और काम इस पेड़ को उखाड़ कर ले आओ....यह आखरी काम है। 

  • लड़का उस पेड़ को उपर से नीचे की ओर देखा और फिर उसने उसे उखाड़ने के लिए बल लगाना शुरू किया...परन्तु यह पेड़ तो हिलने का भी नाम नहीं ले रहा था। थोड़ी देर में ही बालक ने हिम्मत हार ली और वापस आकर पास्टर जी से कहने लगा....इसे उखाड़ना असंभव है पास्टर जी।  

  • पास्टर जी ने कहा देखो बिलकुल इसी तरह से आदतें होती हैं...जब वो छोटी होती हैं उन्हें हम उखाड़ कर दूर कर सकते हैं....लेकिन यदि वे थोड़े समय तक जीवन में रहें तो जड़ पकड़ लेती हैं उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है ....लेकिन यदि वही आदतें अधिक समय तक जीवन में रहें तो उन्हें निकालना कठिन ही नहीं बल्कि असम्भव हो जाता है.....

  • लड़का अब सारी बातें समझ चुका था...उसने कहा सॉरी पास्टर अंकल अब मैं अपने पापा और मम्मी को बिलकुल परेशान नहीं करूँगा...और अपने बुरी संगती को भी छोड़ दूंगा। 

  • बुरी संगती या बुरी आदतें केवल बच्चों में ही नहीं होतीं हैं वे किसी भी उम्र में हो सकती हैं...पवित्रशास्त्र हमें बताता है बुरी संगती अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है। 

  • भजन एक में लिखा है...क्या ही धन्य है या आशीषित है वह पुरुष या स्त्री जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, न पापियों के मार्ग में खड़ा होता और न ही ठठ्ठा करने वालों की मंडली में बैठता है। ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के ओर से आशीषित होता है और जिस काम में हाथ लगाता है उसमें सफल होता है।






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