Seven obedience of Christmas




बड़े दिन अर्थात क्रिसमस की 7 आज्ञाकारिता
परमेश्वर, जिस ने सारी सृष्टि की रचना की और अपनी सर्वोत्तम सृष्टि मनुष्य को सारा अधिकार दिया साथ में आज्ञा दी...परन्तु मनुष्य ने आज्ञा का उलंघन किया...जिसके कारण शाप और कष्ट इस सृष्टि में प्रवेश कर गया...स्वर्ग जैसी धरती नरक जैसी हो गई...लोगों के अंदर क्रोध, बैर, अंहकार, जलन, विद्रोह और न न प्रकार की बुराई बढ़ने लगी। अनाज्ञाकारिता ने इस सृष्टि को बिगाड़ कर रख दिया।
परमेश्वर ने अपनी प्रिय सृष्टि अर्थात मानव को पुनः आज्ञाकारिता में लाने हेतु अनेक भविष्यवक्ताओं को भेजा...परन्तु उचित परिणाम न मिल पाया। अनाज्ञाकारिता का अंतिम परिणाम संपूर्ण सृष्टि का अनंत काल की अग्नि में नाश होता...परन्तु अपनी सृष्टि से परमेश्वर बहुत ज्यादा प्यार करता है इसलिए उसने इस मानव जाति को बचाने अपने एकलौते पुत्र को भेजा जिस पर विश्वास करने से मानव नरक में नाश नहीं होंगे बल्कि अनंत जीवन स्वर्ग में पिता परमेश्वर के साथ बिताएंगे। परमेश्वर के पुत्र का इस संसार में आने से के कारण ही फिर से आज्ञाकारिता इस संसार में आ गयी और मानव जीवन के लिए एक आशा जाग गई।
हम आज क्रिसमस बड़े दिन से संबंधित सात आज्ञाकारिता को देखेंगे
     
     1.   प्रभु यीशु की आज्ञाकारिता 
   
     (इब्रानियों 10:7) तब मैंने कहा देख, “मैं आ गया हूँ, पवित्रशास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूँ...


         प्रभु यीशु अपने पिता की आज्ञा मानने के लिए और सारी मानव जाति को बचाने के लिए स्वयं का बलिदान देने इस धरती में उतर आया। परमेश्वर को बलिदान से बढ़कर आज्ञाकारिता पसंद है...प्रभु यीशु मसीह ने परमेश्वर होकर भी आज्ञाकारिता दिखाकर हमारे लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया। उसने कष्ट उठाउठाकर आज्ञा मानना सीखा। उसने कहा, ‘मेरा भोजन ही यही है कि अपने पिता की आज्ञा को पूरा करूँ।’ आज्ञाकारिता विश्वास का एक महान कदम है।
    
  2.    स्वर्गदूत की आज्ञाकारिता
(लूका 1:27) परमेश्वर की और से जिब्राएल स्वर्गदूत, गलील नगर में एक कुनारी के पास भेजा गया...

परमेश्वर की आज्ञा को यीशु मसीह के द्वारा स्वीकार करने के बाद परमेश्वर ने जिब्राएल स्वर्गदूत जो सन्देशवाहक स्वर्गदूत है को आज्ञा दी और पूर्ण ब्यौरा भी दिया की गलील के नासरत  नगर में एक कुंआरी के पास जाना जो पवित्र है,प्रार्थना करने वाली है और परमेश्वर का भय मानती है...जिसका उल्लेख भविष्यवक्ताओं ने भी किया है उसके पास जाओ देखो उसका नाम मरियम है...स्वर्गदूत उसके पास बड़े आनन्द से गया और उसका अभिवादन करके कहा, “आनन्द और जय तेरी हो”। तुझ पर परमेश्वर का अनुग्रह हुआ है प्रभु तेरे साथ है, पवित्रात्मा की आशीष से तू एक पुत्र को जन्म देगी..वह महान होगा और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा, उसका राज्य सदा का होगा...उसके राज्य का कभी अंत न होगा।
    3.   मरियम की आज्ञाकारिता
(लूका 1:38) मरियम ने कहा, ‘देख मैं तेरी दासी हूँ मुझे तेरे वचन के अनुसार हो...’

मरियम भी जो परमेश्वर का भय मानती थी.. इस आज्ञा से मुख नहीं मोड़ी, ऐसे समय में जब उसका विवाह भी नहीं हुआ था, किसी भी साधारण स्त्री के लिए बहुत कठिन बात है की गर्भधारण करने की बात सोचना। उस समाज में भी यदि ऐसी स्त्री पायी जाए जो विवाह से पहले ही गर्भवती हो उसे पत्थर मार मार कर मृत्यु दंड दिया जाएगा। परन्तु मरियम ने परमेश्वर की आज्ञा के लिए सब कुछ स्वीकार कर लिया..यह एक महान आज्ञाकारिता की मिसाल है।
    4.   युसुफ की आज्ञाकारिता
(मत्ती 2:13) स्वप्न में दर्शन पाकर मरियम से ब्याह किया...

युसुफ की मंगनी मरियम के साथ हुई थी अभी विवाह में समय था..लेकिन जब युसुफ को पता चला की उसकी होने वाली पत्नी तो पहले से ही गर्भवती है तो उसे बिना बदनाम किये छोड़ देना चाहता था...वह उसके जीवन से भाग जाना चाहता था...जब वह यह सोच ही रहा था तो एक रात परमेश्वर के द्वारा एक स्वर्गदूत उसके दर्शन में आकर उसे चेतावनी देता है और समझाता है की यह तो परमेश्वर की ओर से होना है...तब युसुफ मरियम के साथ विवाह कर लेता है...युसुफ सचमुच एक धर्मी व्यक्ति था जिसने परमेश्वर की आज्ञाकारिता को खूब निभाया।
     5.   सितारे की आज्ञाकारिता
(मत्ती 2:9) सितारा उनके आगे आगे चला और जहाँ बालक यीशु था उस घर के ऊपर जाकर ठहर गया

प्रभु यीशु के आगमन में मारे ख़ुशी के न केवल मनुष्य न केवल मनुष्य,स्वर्गदूत बल्कि सारी सृष्टि भी आज्ञाकारिता में आ गयी हम देखते हैं तारा भी आज्ञा मान रहा है, पूरब देश में एक तारा दिखा जिसे कुछ तारों की गणना करने वाले बुद्धिमान लोगों ने देखा ...जिन्हें कुछ लोग राजा या मजूसी भी कहते हैं। वे लोग उस तारे को देख कर पहचान गए कि यहूदियों का राजा अर्थात मसीहा का जन्म हुआ है वे उस बालक को देखने के लिए अपने अपने गिफ्ट भेंटों को लेकर उस तारे का पीछा करने लगे और तारा उनका मार्गदर्शन करने लगा वह तारा लगातार उन्हें रास्ता दिखाता जाता था।

     6.   मंजूसियों की आज्ञाकारिता
(मत्ती 2:11-12) उनहोंने आकर दंडवत किया और स्वप्न में चितावनी पाकर की हेरोदेश के पास फिर न जाना वे दूसरे मार्ग से अपने देश को चले गए।
अनुमान है मंजूसी लोग लगभग ढाई वर्ष तक पैदल या ऊँटों में चलकर उस बालक के पास पहुंचे क्योंकि हेरोदेश ने आदेश दिया था की ढाई वर्ष के सभी बच्चों को मरवा दिया जाए।
हेरोदेश राजा के पास बड़े बड़े ज्ञानी लोग थे जो शास्त्र देखकर यह बता सकते थे और बताया भी की यहूदियों का राजा अर्थात यीशु मसीह का जन्म बेतलेहम में हुआ है..लेकिन उनमें से कोई भी यीशु को देखने या मिलने नहीं आये। इन मन्जुसियों को wisemen या बुध्दिमान इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि वे लोगों ने धरती के बादशाह से बढकर स्वर्ग के बादशाह की आज्ञा मानी।
    7.   चरवाहों की आज्ञाकारिता।
(लूका 2:15-20) जब स्वर्गदूत उनके पास से स्वर्ग को चले गए तो गड़ेरियों ने आपस में कहा आओ हम बेतलेहम जाकर यह बात जो हुई है और जिसे प्रभु ने हमें बताया है देखें।
उस समय में चरवाहे का काम करना सबसे निम्न वर्ग का माना जाता था.. वे लोग ज्यादा पढ़े लिखे नहीं होते थे...परन्तु पवित्रशास्त्र हमें बताता है की तारों को गणना करने वाले पढ़े लिखों को भी अपने तरीके से परमेश्वर ने प्रभु के आगमन के विषय में बताया...और सबसे निम्न वर्ग के लोगों को भी परमेश्वर ने आनन्द का सुसमाचार सुनाया..और सबसे बड़ी बात उनहोंने विश्वास भी किया और जाकर देखा और भेंट भी चढाए और आनन्द करते हुए लौटे।
आज हमारे लिए भी एक संदेश है की प्रभु ने अपने जीवन को मानव जाति को देकर कहा जाओ जाकर सारी जाति के लोगों को सुसमाचार सुनाओ...और देखों मैं जगत के अंत तक तुम्हारे साथ हूँ क्या हम इस महान आदेश आज्ञा को पूरा करेंगे और आज्ञाकारिता में अपना भी नाम जोंड़ेंगे????
परमेश्वर आपको आशीष दे 



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