अपना अपना नजरिया



अपना अपना नजरिया


मूर्ख को अपनी ही चाल सीधी जान पड़ती है, परन्तु जो सम्मति मानता, वह 

बुद्धिमान है 

(नीतिवचन12:15)

        एक बहुत विद्वान पुरुष के तीन बेटे थे। बचपन से ही वे बड़े ही हटीले थे छोटी-छोटी बातों में अड़ जाते और हरेक अपनी बातों को सही मनवाने के लिए जिद्द करते थे। इन बातों से उनका बुद्धिमान पिता बड़ा परेशान रहता था। जब तीनो बेटे जवान हुए तब पिता ने उन्हें कुछ सिखाने के उद्देश्य से उन्हें बुलाकर उन्हें एक काम सौंपा और कहा क्या तुमने नाशपाती का पेड़ देखा है
हमारे शहर में नाशपाती का पेड़ नहीं है यदि तुम जाकर देखकर मुझे बताओ कि नाशपाती का पेड़ कैसा होता है तो मैं तुममें से पेड़ का सही वर्णन करने वाले को इनाम दूंगा। उस पिता ने तीनों पुत्रों को चार- चार माह के अंतराल में नाशपाती के पेड़ को देखने भेजा। एक साल बाद जब तीनों पुत्र उस पेड़ को देखकर आ चुके थे उन्हें अपने पास बुलवाया और उनसे बारी बारी से नाशपाती के पेड़ का वर्णन करने को कहा...पहला बेटा बोला पिता जी नाशपाती का पेड़ तो बिलकुल टेढ़ा मेढ़ा और सूखा हुआ होता है...अभी वह बोल ही रहा था कि दूसरा पुत्र तपाक से बोल पड़ा कहने लगा नहीं
नहीं नाशपाती का पेड़ ऐसा नहीं होता वह तो खूब हरा भरा होता है परन्तु मुझे समझ नहीं आता उसमे एक कमी थी उसमें एक भी फल नहीं देखा उसमें फल कहाँ होते हैं...तभी तीसरे पुत्र ने कहा अरे भाइयों आप क्या कह रहे हो दोनों ने जो भी बताया वो बिलकुल गलत है नाशपाती का पेड़ मैंने देखा है नाशपाती के पेड़ में तो खूब फल होते है और वह खूब हरा भरा होता है। और तींनो में बहस छिड़ गयी तीनों अपनी अपनी बात पर अड़े रहे कि वे ही सच कह रहे हैं ।  तब पिता उन तीनों को रोकते हुए बोले, ‘तुम्हे आपस में बहस करने की जरूरत नहीं है, दरअसल तूम तीनो ही नाशपाती के पेड़ के बारे में सही कह रहे हो।
मैंने जानबूझकर तुम्हें अलग अलग मौसम में नाशपाती के पेड़ खोजने को भेजा था। जो भी तुमने देखा वो उस मौसम के अनुसार था। मैं चाहता हूँ कि इस अनुभव से तुम कुछ सबक को सीख लो (1) पहला यह कि यदि तुम किसी भी बात में सही हो तो इसका कदापि मतलब यह नहीं कि दूसरा व्यक्ति गलत है (2) दुसरा किसी चीज के बारे में सही और पूरी जानकारी चाहिए तो उसे लंबे वक्त तक देखो और परखो तुरंत निर्णय मत करो। (3) तीसरा हर मौसम एक सा नहीं होता जीवन के उतार चढ़ाव में धैर्य बनाए रखो (4) अपनी बात पर अड़े मत रहो दूसरे के विचारों को जानने के लिए अपने दिमाग को खुला रखो तुम चाह कर भी समस्त ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते इसलिए कभी भी किसी ज्ञानी इन्सान से सलाह लेने में संकोच मत करो।

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