नौकर या मालिक




जो काम में ढिलाई करता है, वह निर्धन हो जाता है, परन्तु कामकाजी लोग अपने हाथों के द्वारा धनी होते हैं । (नीतिवचन 10:4)


     आज विजय बड़ी ख़ुशी से कलीसिया में अराधना से पहले साफ-सफाई करके पोछा लगा रहा था । वहां से एक कम्पनी का मेनेजर निकला और देखा बड़े ही सफाई से यह पोछा लगा रहा है...

उस मेनेजर को भी अपने आफिस के लिए एक चपरासी चाहिए था, जो पोछा भी लगा दे और छोटे मोटे काम भी निपटा सके। इसलिए उसने अपनी कार को कलीसिया के सामने रोका और आवाज लगाई ए लड़के मैंने देखा है तुम बड़ी इमानदारी से काम करते हो। मेरे आफिस में काम करोगे? 5000 रु. तनख्वाह मिलेगी!! विजय के आँखों में ख़ुशी साफ नजर आने लगी...उसने कहा जरूर करूंगा साहब...क्या करना होगा साहब??? मेनेजर ने कहा चपरासी का काम है थोड़ा पोछा भी लगा देना...विजय राजी हो गया पूछा साहब कब से आना होगा । मेनेजर ने कहा एक और बात...अपना बायोडाटा मुझे भेज दो...तुम्हें ई मेल करना तो आता है न...विजय ने कहा नहीं साहब मैं कम्प्यूटर नहीं जानता मेरे पास कोई ई मेल नहीं है...ईमेल नहीं आता तो फिर तुम्हें काम नहीं मिल सकता । और यह कह कर मेनेजर अपनी कार स्टार्ट करके चला गया...
        इतना सुनते ही विजय का तो जैसे दिल ही बैठ गया...उसका सपने का महल तो बनने से पहले ही गिर गया...उसने बातों बातों में क्या क्या सपने सजो लिए थे...कलीसिया में भरे मन से वो अराधना में बैठा जहाँ उसने पास्टर से यह वचन सुने कि...जो काम में ढिलाई करता है, वह निर्धन हो जाता है, परन्तु कामकाजू लोग अपने हाथों के द्वारा धनी होते हैं ।
आँख में आंसू लिए उसने अपने जेब में हाथ डाला उसके पास 150 रूपये थे उसने कलीसिया में आराधना के बाद अपने घर न जाकर सब्जी मंडी गया और 150 रूपये के टमाटर लिए और उसे एक-एक किलो के पैकेट बनाकर घर-घर जाकर बेचना शुरू किया...यह उसने आज तक नहीं किया था कुछ ही देर में उसने उन टमाटरों को 300 रूपये में बेच दिया उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा उसने फिर मंडी जाकर 300 रूपये के टमाटर लिए और उन्हें फिर घर-घर जाकर बेचा और 600 रूपये में बेच लिया शाम को जब वह घर आया उसने विचार किया आज सही रीति से मेहनत की है परमेश्वर ने भी आशीष दी है...इस रीति से यदि मैं और सुबह जाकर काम करूँ तो मेरा गुजारा चल सकता है...फिर क्या था... वह रोज मेहनत करके काम करने लगा कुछ दिनों में ही उसने एक छोटी पुरानी गाड़ी खरीद लिया और ज्यादा काम करके ज्यादा पैसे कमाने लगा 5 वर्षों में उसने एक बड़ी कम्पनी खरीद ली और उसके पास सैकड़ों लोग थे जो घर-घर सब्जियां और खाद्य पदार्थ सप्लाई करने लगे...आज विजय एक बहुत धनी व्यक्ति बन चुका था...
एक दिन वही मेनेजर उसके पास आया और कहने लगा सर आपने बहुत बढ़िया कम्पनी बनाई है क्या आप हमारे साथ पार्टनरशिप में काम करेंगे?
विजय ने तुरंत उस मेनेजर को पहचान लिया और कहा जरूर करूंगा साहब। मेनेजर ने कहा आप अपना ईमेल एड्रेस दीजिए...विजय ने मुस्कुराते हुए कहा मेरे पास ईमेल एड्रेस नहीं हैं...मैं ईमेल चलाना नहीं जानता...
बड़े ही आश्चर्य से मेनेजर ने विजय की ओर देख कर पूछा आपको ईमेल नहीं आता???तो भी आपने इतनी बड़ी कम्पनी खड़ी कर दी...यदि आपको ईमेल करना आता तो आप क्या करते....विजय ने थोड़ी देर शांत रहने के बाद तपाक से कहा...

...तो मैं आज आपके आफिस में चपरासी होता...



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