शब्द रहित प्रार्थना का अद्भुत प्रतिफल

सुनिए कहानी बाइबल की 




हन्ना एक अद्भुत स्त्री 

(1 शमुएल 1:1-28)


शमुएल की पुस्तक हन्ना नामक स्त्री से प्रारंभ होती है जिसके पति का नाम एल्काना है । हन्ना अपनी पनिन्ना नामक सौतन से बड़ी दुखी थी क्योंकि उसकी सौतन के बच्चे थे परन्तु हन्ना बाँझ थी उसके कोई सन्तान नहीं थी उस समाज में बाँझ होना अशुभ माना जाता था ।
अत: पनिन्ना हमेशा हन्ना को ताने मारा करती और उसे दुःख दिया करती थी । हन्ना का पति एल्काना हन्ना से बहुत प्यार करता था इसलिए उसे समझाया करता कि देख क्या मैं तेरे लिए दस बच्चो से ज्यादा अच्छा नहीं हूँ...तू क्यों चिंता करती है...परन्तु इन सभी बातों का हन्ना पर कोई असर नहीं होता था ।
एक दिन इन सभी दुखों और तानों से तंग आकर हन्ना ने प्रभु के भवन जाने का ठाना और यहोवा के मन्दिर में जाकर हन्ना सिसक सिसक के रोने लगी । वह अपना दुःख उंढेल देना चाहती थी । उसके दिल में दुखों का शैलाब था जो उसकी आखों से आसुओं के रूप में बह निकला । वह अपने परमेश्वर के चरणों में अपने सारे दुखों को बयाँ कर रही थी...कोई शब्द न था कोई आवाज नहीं वो पागलों की भाति बड़बड़ा तो रही थी परन्तु शब्द की कोई आवाज नहीं थी । उसका दर्द वो किसी मनुष्य से नहीं बताना चाहती थी । आज तक लोगों से उसे केवल ताने फब्तियां ही मिली थीं । कोई जड़ीबूटी कोई वैध कुछ भी न कर पाया था आज तक । वह मनुष्य के सामने रो-रो कर हार चुकी थी...आज वह उसके चरणों में आई थी जिसने जमीन और आसमान को बनाया है जिसके पास से कोई खाली हाथ नहीं लौटता ।
अभी ज्यादा समय नहीं हुआ कि वहाँ का याजक जिसका नाम एली था आया और उसे दूर से देखकर समझा कि शायद यह शराब पी हुई है...हन्ना क्या कहती आज तक उसे सभी ने गलत ही समझा है..

हन्ना ने उस बात का कोई बुरा नहीं माना...उसने परमेश्वर से वाचा बाँधी कि यदि परमेश्वर उसकी नाम धराई मिटा कर उसे एक पुत्र के रूप में आशीष दे तो वह उसे परमेश्वर को ही सौंप देगी
परन्तु हन्ना के समर्पण के कारण उसकी प्रार्थना सुनी गई और उसे एक सन्तान के रूप में परमेश्वर ने आशीष दी जिसका नाम शमुएल रखा गया जिसका अर्थ है परमेश्वर से प्रार्थना में माँगा गया। और हन्ना ने जैसा परमेश्वर से वायदा किया था वैसा ही किया अर्थात उस बच्चे को परमेश्वर की सेवा के लिए परमेश्वर के भवन में दे दिया
1. हन्ना बिना सन्तान जरूर थी परन्तु बिना प्रार्थना के नहीं थी
हन्ना की प्रार्थना के कारण ही हन्ना को बाइबल में पहचान मिली। एक स्त्री या पुरुष यदि प्रार्थना करने वाला है उसे परमेश्वर पहचानता है। 
1शमुएल 1:14-15 तब एली ने उस से कहा, तू कब तक नशे में रहेगी? अपना नशा उतार । हन्ना ने कहा, नहीं हे मेरे प्रभु, मैं तो दुखिया हूँ, मैंने न तो दाखमधु पिया है और न मदिरा, मैं ने अपने मन की बात खोल कर यहोवा से कही है। 
2. हन्ना अपने दुःख में भी किससे कब क्या कहना है जानती थी
इतने दुःख में भी हन्ना यह जानती थी कि परमेश्वर से क्या कहना है और परमेश्वर के दास से क्या कहना है। एक बुद्धिमान व्यक्ति की यही पहचान है कि वह समय पर बातें करना जानता हो। 
3. हन्ना एक विश्वास/प्रार्थना वाली स्त्री थी 
हन्ना विश्वास के साथ परमेश्वर के भवन गई...उसे पूरा विश्वास था कि परमेश्वर उसकी प्रार्थना सुनकर जरूर उसे सन्तान देंगे और उसकी नाम धराई मिट जाएगी। परमेश्वर को जो प्रसन्न करता है वो हमारा विश्वास है। परमेश्वर के पास आने वाले को यह विश्वास करना चाहिए कि परमेश्वर है और फिर वह अपने मांगने वालो को प्रतिफल देता है। 
4. हन्ना एक विश्वास योग्य स्त्री थी 
विश्वासयोग्यता आज एक अद्वतीय या बहुत ही कम पाई जाने वाली चीज है। हन्ना को जब पुत्र प्राप्त हुआ वह भी अपने दिए हुए वचन के प्रति विश्वास योग्य थी उसने उस बच्चे को जब दूध छुड़ाया गया उसे परमेश्वर के भवन में अपने प्रतिज्ञा के अनुसार वापस लौटा दी। जिसके कारण परमेश्वर ने उस बालक को इतनी आशीष दी कि उससे रूबरू होकर बातें की...और शमुएल को उस देश का धर्मी न्यायी ठहराया। जिसने बड़े बड़े राजाओं का राज्याभिषेक किया। 
5. हन्ना एक भली (बच्चे को भलाई सिखाने वाली) माता थी
हन्ना न केवल विश्वासयोग्य थी वरन वह एक भली माता भी थी 
उसने उस बालक को दूध पिलाते पिलाते भी बहुत कुछ परमेश्वर के विषय में सिखा दिया...उसने सिखाया होगा कि उसे एक दिन अपनी माता को छोड़कर परमेश्वर की सेवा में जाना होगा...
उसने सिखाया होगा कि उसका प्रथम कर्तव्य परमेश्वर की सेवा है...
उसने सिखाया होगा कि किस प्रकार मैंने तुझे परमेश्वर से पाया है...
उसने सिखाया होगा कि हमें कैसे सच्चे परमेश्वर से प्रार्थना करना है ....  एक भले माता पिता बनने के लिए हमे भी हन्ना से बहुत कुछ सीखना है...

हन्ना की कहानी दुःख के साथ प्रारंभ होती है परन्तु कहानी के समाप्ति में हन्ना आनंद के साथ कहती है, 
(1 शमुएल 2:1) और हन्ना ने प्रार्थना करके कहा, मेरा मन यहोवा परमेश्वर के कारण मग्न है....मैं तेरे किए हुए उद्धार से आनंदित हूँ...
प्रभु आपको बहुत आशीष दे...


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