हीरे जवाहरातों का खेत




हीरे जवाहरातों का खेत

परमेश्वर के वचन तो सोने से और बहुत कुंदन से भी बढ़कर मनोहर है 

(भजनसंहिता 19:10)

      एक किसान था जो। उसके पास स्वयं की जमीन नहीं थी इसलिए वह लोगों की जमीन में अधिया में खेती किया करता था। कई बार वह दूसरों के खेती में मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण किया करता था। उस गाँव का जमीदार जिसके पास यह किसान मजदूरी किया करता था, वह बहुत ही धनी था उसके पास बहुत जमीन थी जो लोगों से लूटलूट कर उसने एकत्र कर रखी थी।

           एक दिन जमींदार से इस किसान ने अपनी मन की बात बताते हुए कहा, कि मैं भी एक छोटी सी जमीन खरीदना चाहता हूँ, जिस पर मनचाही फसल लगाकर और खूब मेहनत करके अपने परिवार को सुखी देखना चाहता हूँ। इस बात पर जमीदार जोर से हँस दिया...और बनावटी मुस्कुराहट के साथ बोला, मेरे पास एक जमीन है क्या तुम उसका मूल्य दे पाओगे। गरीब किसान ने कहा कितना मूल्य होगा सरकार। जमीदार ने कहा पूरे दो लाख हैं तुम्हारे पास। गरीब किसान ने कहा इतने पैसे कहाँ से लाऊंगा सरकार। जमींदार ने कहा देख लो!! यह कीमत केवल तुम्हारे लिए है और कोई होता तो मैं उससे पांच लाख लेता। 

           गरीब किसान ने थोड़ी मोहलत मांगी और भाग कर घर आया और अपनी पत्नी को बताने लगा कि यदि हमारे पास दो लाख रूपये हों जाएं तो हम भी एक जमीन के मालिक बन सकते हैं हमारे भी सपने पूरे हो सकते हैं। उसकी पत्नी जो अपने पति प्यार करती थी और उस पर पूरा विश्वास करती, जल्द ही अपने सारे गहने और थोड़ी जमा पूंजी निकाल कर पति के हाथों में रखते हुए बोली। देख लो यदि इससे कुछ होता है तो...उसने अपने घर के कई समान बेच दिया अपने बच्चे की छोटी साइकल और खिलौने भी बेच कर कैसे भी दो लाख कर के जमीदार के पास पहुंचा। और बड़े उत्साह के साथ बोला मालिक ये लो पैसे क्या वो जमीन मैं देख सकता हूँ जो अब मेरी होगी...जमीदार ने कागजाद तैयार करके उसे दे दिए और कहा हाँ देख लो वो नदी के किनारे वाली जमीन तुम्हारी हुई। गरीब किसान दौड़ता हुआ अपनी जमीन देखने पहुंचा जमीन देखते जी वो अपने सर पर हाथ रखकर बैठ गया। जैसे कोई सदमा सा उसे लग गया और जोर जोर से रोने लगा क्योंकि वो जमीन पथरीली थी चारों ओर कंकरों पत्थरों से भरी वो जमीन थी...उसमें खेती नहीं की जा सकती थी...

        किसान यह सोच सोचकर रो रहा था अब पत्नी और बच्चे को क्या मुंह दिखाऊंगा? तभी उसके कुछ पुराने मित्र वहां से निकले और उन्होंने उसे रोता देखा और पूछा क्यों रो रहा है। उसने सारा हाल कह सुनाया तब एक व्यक्ति ने अपने हाथ में कुछ कंकर उठाया और वे आपस में बातें करने लगे...उन्होंने उसे बताया कि अनजाने में जमींदार ने जो जमीन तुम्हें बेच दी है वो बहुमूल्य कीमती पत्थरों से भरी पड़ी है हम यह बात इसलिए जानते हैं क्योंकि हम जौहरी हैं। उसे लगा वो लोग झूठ बोल रहे हैं परन्तु जब उन्होंने उसे यकीन दिलाया और उनके साथ कुछ ही दिनों में यह गरीब किसान ने उन पत्थरों को तरासना और पहचानना सीख लिया और उस शहर का सबसे धनी व्यक्ति बन गया। 

      परमेश्वर का वचन भी ऐसा ही है एक बार हम उसे पहचान कर उसपर चलना सीख लें तो हम भी आत्मिक धनवान हो सकते हैं





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