तोल मोल के बोल





तोल मोल के बोल


क्योकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है ओर अच्छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से और अपने ओंठो को छल की बातें करने से रोके रहे

 (1 पतरस 3:10)



 एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक पास्टर के पास गया। उसने पास्टर से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा। पास्टर ने किसान से कहा, ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर  के बीचो-बीच जाकर रख दो, किसान ने ऐसा ही किया और फिर पास्टर के पास पहुंच गया। तब पास्टर ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओकिसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे। और किसान खाली हाथ पास्टर के पास पहुंचा। तब पास्टर ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है, तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते। जुबान से बोलने से पहले अपने दीमाग से पूछे फिर बोलें...
     जब मन में कड़वाहट हो तो अपनी जुबान पर कभी भरोषा न करें 

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