यीशु में जीवन है...



यीशु में जीवन है 
लुका 7:11-16 

       बाइबल में एक घटना हम पाते हैं एक बार एक गाँव में एक जवान सुंदर लड़की रहती थी, सभी लड़कियों के भांति यह भी स्वप्न देखती थी कि एक राजकुमार के

समान सुंदर जवान लड़का मेरे जीवन में आएगा और मुझे ब्याह कर अपने साथ घोड़े में ले जाएगा। 

       ऐसा हुआ भी एक दिन नाईन नामक नगर का रहने वाला एक जवान अपनी बरात लेकर आया और इस सुंदर लड़की को ब्याह ले गया। यह लड़की तो इतनी खुश थी, मानो आसमान में उड़ रही हो, गाँव के सभी लोग उसे देखने के लिए उसके पास आए। 
       कुछ समय बाद उसे परमेश्वर ने एक सुंदर बालक देकर इस परिवार को आशीषित किया। एक बार फिर पूरा गाँव उससे मिलने और बालक को देखने लिए आनंद से आए...पूरे परिवार में ख़ुशी का माहौल था...सब खुश थे। परन्तु नियति को कुछ और ही मंजूर था एक दिन इस हंसते खेलते परिवार में भयानक हादसा होता है और उस परिवार का मुखिया अर्थात इस स्त्री का पति का देहांत हो जाता है... उस स्त्री के ऊपर दुःख के बादल छा लेते हैं उसे लगा कि उसके लिए उसकी दुनिया ही समाप्त हो गई...वह भी अपने पति के साथ मर जाना चाहती थी परन्तु उसे अपने पुत्र का मुंह देखकर रह जाती है...गाँव के सभी उसे सांत्वना देने उसके पास आते हैं और कहते हैं शायद ऊपर वाले को यही मंजूर था...हिम्मत रख अब तुझे इस बच्चे के लिए जीना है.. यही तेरे बुढ़ापे की लाठी बनेगा। 
      स्त्री अपने आप को सम्भालती है और इस छोटे बच्चे का मुंह को देखकर जीना सीख लेती है कुछ समय बाद बच्चा जब बढ़ने लगता है सभी कहते हैं, यह तो अपने बाप के समान दिखता है। यह सुनकर माता का मन खुश हो जाता और वह धीरे धीरे अपना दुख भूलने लगी...जब यह बालक जवान हुआ बिलकुल अपने पिता के समान दिखने लगा माता का लाडला पूरे गाँव की शान सभी लोग उसे बहुत चाहते। जवान बेटा भी गाँव में सभी का आदर करता बढ़े बूढों का सम्मान करता। 
    लेकिन एक दिन इस घर में फिर दुःख के काले बादल आते हैं और कोई दौड़ते हुए आता है और उस माँ को एक खबर सुनाता है कि उसका जवान बेटा चल बसा...अब वो जीवित् नहीं रहा...सुनते ही माँ के तो मानो पैरो के नीचे से जमीन ही खिसक गई...यह सदमा सहन से बाहर था...खबर मिलते ही गाँव के सभी लोग उस घर में आए सभी दुःख के मारे शांत खड़े थे....माँ फूट फूट कर रो रही थी उसने जवानी में अपने पति को खो दिया और अब उसके बुढापे की लाठी भी न रही। गाँव में किसी के पास इतनी हिम्मत न थी कि उस दुखियारी को कुछ कह कर सांत्वना दे सके। गाँव की सभी स्त्रियाँ एक साथ बैठ कर रो रही थीं...सभी पुरुष अंतिम क्रिया का इंतजाम कर रहे थे किसी को भी नहीं मालुम था कि ऐसे दुःख में उस स्त्री को क्या कहा जाए। 
       जवान लड़के के मृत शरीर को अंतिम क्रिया के लिए सभी लोग उठाने लगे आगे आगे मृतक शरीर को चार काँधे में ले जा रहे थे पीछे पीछे पूरा गाँव दुःख से चल रहा था। बूढ़ी स्त्री रोते जा रही थी और अपने आप से बाते करते हुए बडबडा रही थी कि किसके लिए अब मैं खाना बनाउंगी...कौन अब मुझे सहारा देगा...मेरा घर तो अब मानो खाने को दौड़ेगा....मेरे लिए जीने की कोई आश न रही...
     तभी  सामने से एक और भीड़ चली आ रही थी जिसमें आगे आगे सफेद कपड़े पहने एक जवान चला आ रहा था जिसके चहरे में बड़ा तेज था....उसके पीछे लोग धन्यवाद और होसन्ना के गीत गाते चले आ रहे थे...तभी यीशु इस स्त्री को देखकर रुकता है और उस पर तरस से भरकर उससे कहता है "मत रो" सभी आश्चर्य से देखते हैं और सोचते हैं यह कैसे कह सकता है कि मत रो...क्योंकि अब उस स्त्री के लिए कोई भी भली अच्छी बात कोई आशा नहीं बची है अब तो केवल रोना और दुःख ही है वे सोचते है हो सकता है कि इस व्यक्ति को नहीं मालूम शायद इसी लिए वह कह रहा है मत रो। यीशु आगे बढकर उस मृत शरीर को स्पर्श करता है और कहता है  जवान, मैं तुझ से कहता हूं, उठ। और वह मुर्दा उठ बैठता है और प्रभु यीशु उसे उसकी माता को सौप देते हैं। सभी आश्चर्य से डर जाते हैं। प्रभु यीशु में जीवन है वे इस धरती में इसलिए आए ताकि लोग जीवन पाएं और बहुतायत से जीवन पाएं। केवल वे ही आशा रहित जीवन में आशा दे सकते हैं पवित्रशास्त्र कहता है जो भी उस पर विशवास करते हैं वे लज्जित नहीं होते...जीवन देने वाले यीशु पर विश्वास करें और उसके पास आएं वो आज भी लोगों को जीवन दे रहे हैं ...

प्रभु आपको आशीष दे....


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4 comments:

  1. Bahut Achchhe tarike se aapne likha hai.

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    1. धन्यवाद आपके प्रोत्साहित शब्दो के लिए

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  2. बहुत जबरदस्त कहानी है

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Thanks for Reading... यदि आपको ये कहानी अच्छी लगी है तो कृपया इसे अपने मित्रो को शेयर करें..धन्यवाद

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