Thursday, November 15, 2018

एक दूसरे का भार उठाओ




एक दूसरे का भार उठाओ


तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो
 (गलतियों6:2)


         एक गाँव में अकाल पड़ने के कारण वहाँ के सभी गाँववासियों ने निर्णय लिया की जब तक गाँव में बारिष नहीं होती क्यों न हम सभी जंगल के पार दूसरे गाँव चले जाते हैं। सभी अपने परिवार जनों के साथ जररूत की चीजों को लिए हुए दूसरे गाँव की ओर चल पड़ते हैं। रास्ते में उन्हें एक अंधेरी सुरंग जैसी गुफा से होकर जाना था। घोर अँधेरा होने के कारण किसी को गुफा में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। उसी रास्ते में उन सभी को कुछ नुकीले पत्थर पैरों में चुभ रहे थे बहुतों ने उन पत्थरों के कारण कुडकूड़ाने लगे और उन नोकीले पत्थरों को वहीं फेक दिया। परन्तु कुछ लोगों ने सोचा चलो हमें चुभ रहें है, तो किसी और को न चुभ जाएं इसलिए उन्होने दूसरों की फिक्र करके उन पत्थरों को अपने पास रख लिया और आगे बढ़ गये और जब सभी ने उस अँधेरी सुरंग को पार किया तो क्या देखा जो नुकीले पत्थर उन्होंने अँधेरे में इकट्टे किये थे वो पत्थर नहीं बेशकीमती हीरे थे।                   अत: जिन्होंने दूसरों की चिंता करके पत्थर उठाए थे वो बहुत खुश थे। परन्तु जिन लोगों ने दूसरों की चिंता नहीं की और वो हीरों को पत्थर समझकर फेंक दिया था । वे लोग अभी भी कुडकुड़ा रहे थे...

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