एक दूसरे का भार उठाओ




एक दूसरे का भार उठाओ


तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो
 (गलतियों6:2)


         एक गाँव में अकाल पड़ने के कारण वहाँ के सभी गाँववासियों ने निर्णय लिया की जब तक गाँव में बारिष नहीं होती क्यों न हम सभी जंगल के पार दूसरे गाँव चले जाते हैं। सभी अपने परिवार जनों के साथ जररूत की चीजों को लिए हुए दूसरे गाँव की ओर चल पड़ते हैं। रास्ते में उन्हें एक अंधेरी सुरंग जैसी गुफा से होकर जाना था। घोर अँधेरा होने के कारण किसी को गुफा में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। उसी रास्ते में उन सभी को कुछ नुकीले पत्थर पैरों में चुभ रहे थे बहुतों ने उन पत्थरों के कारण कुडकूड़ाने लगे और उन नोकीले पत्थरों को वहीं फेक दिया। परन्तु कुछ लोगों ने सोचा चलो हमें चुभ रहें है, तो किसी और को न चुभ जाएं इसलिए उन्होने दूसरों की फिक्र करके उन पत्थरों को अपने पास रख लिया और आगे बढ़ गये और जब सभी ने उस अँधेरी सुरंग को पार किया तो क्या देखा जो नुकीले पत्थर उन्होंने अँधेरे में इकट्टे किये थे वो पत्थर नहीं बेशकीमती हीरे थे।                   अत: जिन्होंने दूसरों की चिंता करके पत्थर उठाए थे वो बहुत खुश थे। परन्तु जिन लोगों ने दूसरों की चिंता नहीं की और वो हीरों को पत्थर समझकर फेंक दिया था । वे लोग अभी भी कुडकुड़ा रहे थे...

इन कहानियों को भी अवश्य पढ़ें 






यदि आपके पास हिंदी में कोई सरमन, प्रेरणादायक कहानी, आपकी लिखी कविता या रोचक जानकारी है, जो आप सभी के लिए आशीष के लिए हमारे साथ सेयर करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ ईमेल करें। हमारी id है: rajeshkumarbavaria@gmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ पब्लिश करेंगे धन्यवाद!!

No comments:

Post a Comment

Thanks for Reading... यदि आपको ये कहानी अच्छी लगी है तो कृपया इसे अपने मित्रो को शेयर करें..धन्यवाद

घमंड. परमेश्वर के साथ चलने की सबसे बड़ी बाधा

मित्रों प्रभु यीशु में आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार, हम कुछ सप्ताह से सीख रहे हैं कि कैसे हम परमेश्वर के साथ-साथ चल सकते हैं...पवित्रश...

Followers