Short Story (मनुष्य का मूल्य)





मनुष्य का मूल्य

मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा? 
(मत्ती 16:26)

  • एक नौजवान शिष्य अपने गुरु पास्टर के पास पहुंचा और बोला , ‘पास्टर जी एक बात समझ नहीं आती , आप इतने साधारण वस्त्र क्यों पहनते हैंइन्हे देख कर लगता ही नहीं कि आप एक ज्ञानी व्यक्ति हैं जो सैकड़ों शिष्यों को शिक्षित करने का महान कार्य करता है ।
  • गुरु जी मुस्कुराये . फिर उन्होंने अपने थैले से एक अंगूठी निकाली और शिष्य को देते हुए बोले , ‘मैं तुम्हारी जिज्ञासा अवश्य शांत करूँगा लेकिन पहले तुम मेरा एक छोटा सा काम कर दो


  • इस अंगूठी को लेकर बाज़ार जाओ और किसी भी व्यक्ति से इस अंगूठी का मूल्य पता करके आओ पर ध्यान रहे इस अंगूठी को किसी को भी मत बेचना, चाहे लोग जो भी दाम दें इसे बेचना मत।  
  • ‘शिष्य फ़ौरन उस अंगूठी को लेकर बाज़ार गया उसे एक संतरे बेचने वाला मिला, शिष्य ने सोचा इससे अंगूठी की कीमत पता करता हूँ। संतरे वाले ने कहा सुंदर अंगूठी है तुम एक काम करो एक किलो संतरे के बदले यह अंगूठी मुझे दे दो। शिष्य ने मना करते हुए कहा नहीं नहीं इसे बेचना नहीं है बस दाम पूछना था। 
  • वह थोड़ा और आगे बढ़ा तो एक व्यक्ति सब्जी मंडी में आलू बेच रहा था। शिष्य ने उससे भी यही पूछा तो जवाब में आलू वाला बोला ये अंगूठी तो मंहगी लगती है तुम एक काम करो एक बोरी आलू के बदले ये अंगूठी मुझे दे दो। शिष्य उसे भी बेचने से मना करते हुए वहाँ से भागा। 
  • अब वह एक सुनार के पास गया और पूछने लगा, “भाई साहब इस अंगूठी की क्या कीमत होगी बताएँगे... अंगूठी देखते ही सुनार ऐसे खुश हो उठा जैसे उसकी लाटरी लग गयी हो उसने तुरंत कहा मैं इस अंगूठी के तुम्हें 10 लाख तक दे सकता हूँ। दाम सुनकर शिष्य को अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हो रहा था, उसका मुह खुला का खुला रह गया। इससे पहले की सुनार कुछ और कह पाता शिष्य वहां से गुरु जी के पास वापस लौटने को भागा। 
  • भागते भागते वह एक व्यक्ति से टकरा गया जो सुंदर कपड़े पहने हुए था देखने से विद्वान नजर आ रहा था। उस व्यक्ति ने शिष्य से पूछा अरे भाई इतनी तीव्र गति से कहाँ भागे जा रहे हो? और ये हांथ में क्या छुपाए हो?  दिखाना जरा!!
  •  शिष्य के पूछने पर उसने बताया वो एक जौहरी है जो हीरे जवाहरातों का व्यापार भी करता है। शिष्य ने सोचा चलो इस अंगूठी का मूल्य इससे भी पूछ लेते हैं। शिष्य ने जैसे ही अपनी मुठ्ठी खोलकर अंगूठी दिखाकर उसका मूल्य जानना चाहा। 



  • तो जौहरी ने देखते ही घुटने टेक दिए और कहने लगा की आपको यह अंगूठी कहाँ से मिली इसमें लगा हीरा तो नायाब है!! बेशकीमती है!! मैं क्या मेरे जैसे इस देश में कोई भी इसकी कीमत नहीं बता सकता, यह तो अनमोल है।
  •  शिष्य पूरी तरह से डर गया और बिना कुछ कहे अंगूठी को लेकर गुरु जी के पास आया। और बड़े आश्चर्य से उसने सारी घटना बिना रुके कह सुनाई, परन्तु शिष्य अभी तक यह नहीं समझ पा रहा था कि आखिर गुरू जी उसे सिखाना क्या चाह रहे थे। आख़िरकार वह पूछ ही बैठा पास्टर जी इस सबका क्या अर्थ है
  •  तब गुरु जी ने बताया अब भी नहीं समझे देखो मनुष्य की कीमत भी इसी प्रकार है जिस प्रकार अंगूठी में लगे हीरे की कीमत सबने अलग अलग बताई यह मनुष्य की कीमत भी इसी है चाहो तो इसे एक किलो संतरे में बेच दो या एक बोरी आलू में या 10 लाख रुपए में और या तो इसे इतना अनमोल बना लो कि दुनिया की सारी चीजें भी इसकी तुलना में तुच्छ नजर आएं।
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