परमेश्वर का स्पर्श


परमेश्वर का स्पर्श

"परमेश्वर के बलवंत हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए" 
(1 पत.5:7)


एक बार की बात है कबाड़ समझा जाने वाला समान नीलाम हो रहा था नीलामी करने वाला बाकी सामान के बाद एक वायलिन पर आया वह वायलिन काफी पुराना और भद्दा दिख रहा था नीलामी करने वाले ने वायलिन उठाया और तार खीचें, जो दर्दनाक रूप से बेसुरे थे उसने पुराने गंदे वायलिन की तरफ देखा, भौंहे सिकोड़ी और उत्साहहीन अंदाज में इसकी कीमत 500 रुपए लगाई, परन्तु कोई इसे लेने को तैयार नहीं था फिर उसने कीमत घटाकर 300 रुपए कर दी, परन्तु फिर भी कोई आगे नहीं आया वह कीमत कम करता गया, जब तक की वह 50 रुपए तक न हो गया. नीलामी करने वाला बोला, “50 रुपए सिर्फ... 50 रुपए मैं जानता हूँ की इसकी इतनी भी कीमत नहीं है, परन्तु आप इसे मात्र 50 रुपए में ले सकते हैं” उसी समय सफेद बालों वाला और दाढ़ी वाला एक बुजुर्ग आगे आया और उसने वायलिन अपने हाथ में लियाबुजुर्ग व्यक्ति ने रुमाल निकालकर वायलिन की धूल साफ की और उसने धीरे धीरे तारों को खींचकर हर तार को ठीक किया  फिर उसने उसी वायलिन को अपनी ठुड्डी के नीचे रखकर उसे बजाने लगा उस पुराने वायलिन से इतना मधुर संगीत निकला, जितना वहाँ मौजूद कई लोगों ने अपने पूरे जीवन में नहीं सुना था यह देखकर नीलामी करने वाले ने पूछा कि शुरुआती बोली क्या है.  किसी ने जवाब दिया 600 रुपए, दुसरे ने कहा 700 रुपए और कीमत बढ़ती चली गई और अंत में वह वायलिन 10,000 रुपए में बिका एक पुराने बदसूरत वायलिन के लिए 10,000 रुपए जिसके लिए  कोई 50 रुपए देने को राजी न था... यह कहानी बताती है की जब किसी चीज को विशेषज्ञ के हाथ में रख दिया जाता है, तो छोटी सी चीज भी कितनी बड़ी बन सकती है. आइए हम भी अपने सृष्टीकर्ता के हाथों में आए...दीनता से उसके हाथों के नीचे रहें ताकि उचित समय में वह हमें बढ़ाए...





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