एलिय्याह और एलिशा



एलिय्याह और एलिशा
एलिय्याह का अर्थ होता है 'यहोवा मेरा परमेश्वर है' यह भविष्यवक्ता ने राजा आहाब और रानी यिजबेल के समय में भविष्यवाणी की थी। उस समय में अन्य जाति के लोग  बाल देवता को बारिश अर्थात वर्षा का देवता मानते थे...ऐसे समय में एलिय्याह ने सूखे -आकाल की भविष्यवाणी की जिसके सामने बाल देवता असहाय और शक्तिहीन पाया गया।
यिजबेल सबसे क्रूर रानी सिदोन का सारपत की थी, जो परमेश्वर के भविष्यवक्ताओं को मरवा डालती थी । वहाँ के लोग भी पूरी रीति से बाल देवता को मानते थे । उस समय में विधवाओं को असहाय और असुरक्षित माना जाता था जिसे सहायता की जरूरत है । लेकिन जब एलियाह ने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार उस विधवा के पास जाता है तो वह सहायता करने को तैयार हो गई। जब विधवा का पुत्र मर गया तो एलियाह ने प्रार्थना करके उसे जीवित कर दिया।
    एलियाह की आकाल के भविष्यवाणी के कारण वहाँ का राजा उससे परेशान था और उसे इस्राएल में गडबडी डालने वाला समझता था।  एक बार कारमेल पर्वत पर बाल देवता के उपासक जो अपने आप को बाल के चार सौ पचास पुजारी थे उनकी मुलाकात एलियाह के साथ होती है।  एलियाह देखता है कि वहां उपस्थित लोग असमंजस में हैं कि कौन सच्चा परमेश्वर है किसकी उपासना करना ठीक है। 
ऐसे समय जब बाल कोई जवाब नहीं देता उस मूर्ति से कोई प्रतिउत्तर नहीं मिलता है तब एलियाह उन पर हंसता हैं और उनका मजाक बनाकर कहता है और जोर से नगाड़े बजाओ और जोर से चिल्लाओ शायद तुम्हारा देवता सो रहा होगा या शायद रास्ते में कहीं जा रहा होगा। इसके विरुद्ध एलियाह अपनी वेदी में मेमने के बलिदान के साथ पानी से भर देता है ताकि किसी को यह न लगे कि किसी भी गलती से आग लग गई... और सभी के सामने परमेश्वर से प्रार्थना करता है हे सच्चे परमेश्वर प्रकट कर की आप ही जीवित परमेश्वर हैं।  एलियाह की मनसा थी कि उपस्थित लोग यह जाने और माने की यहोवा ही सच्चा और एकमात्र परमेश्वर है।  और स्वर्ग का परमेश्वर की ओर से आग उतरती है और पानी सहित भष्म कर देती है । और एलियाह बाल मूर्ति को तोड़कर उसके सभी भविष्यवक्ताओं को मार डालता है । और समय पूरा होने के अनुसार आकाल समाप्त हो जाता है और यह सोचकर की युद्ध समाप्त हुआ वह आहाब राजा के पास पहुँचता है परन्तु वहां रानी यिजबेल उसके प्राण लेने के लिए आमादा हो जाति है जिसके कारण भविष्यवक्ता अपने प्राण बचाने के लिए यहूदा के दक्षिण भाग के बेर्शेबा की ओर भागता है । और थका हारा हुआ महसूस करके सोचता है इससे बेहतर है कि मर जाऊं...परन्तु परमेश्वर का उसके जीवन से कुछ और ही योजना थी इसलिए परमेश्वर एक स्वर्गदूत को भेजकर उसे भोजन खिलाकर तरोताजा करवाता है । और चालीस दिनों के बाद वह होरेब पहुँचता है । एलियाह अब यह सोचकर हिम्मत हारने लगता है कि शायद मैं ही अकेला ऐसा व्यक्ति जीवित हूँ जो यहोवा को मानता है । परन्तु परमेश्वर उसको हियाव देते हैं और तीन मुख्य कामों को करने के लिए एलियाह को आज्ञा देते हैं कि लौटकर दमिश्क के जंगल को जा और वहाँ
1. अराम का राजा होने के लिए हजाएल का अभिषेक करना
 2. इस्राएल का राजा होने को निम्शी के पोते येहू का अभिषेक करना
3. अपने स्थान पर नबी होने के लिए आबेलमहोला के शापात के पुत्र एलीशा का अभिषेक करना । (1राजा 19:15-16)
परन्तु न जाने क्यों एलियाह ने तीन कामों में से केवल एक काम किया उसने एलिशा पर अपना चादर डाला (अभीषेक नहीं किया केवल चादर डाला) शायद इतना काफी था क्योंकि एलियाह जानता था एलिशा उसके पीछे अवश्य आएगा ।
एलीशा बलशाली के साथ साथ शायद धनवान भी था क्योंकि उसके पास बारह जोड़ी बैल थे और उन्हें एक साथ मिलाकर वह खेत जोत रहा था ।   
       आहाब जब नाबोत की सम्पती लूट लेता है और उसकी हत्या भी करवा देता है तो परमेश्वर एलियाह आहाब और रानी इजिबेल के विरुद्ध मौत की भविश्यवाणी करने के लिए भेजता है, और एलियाह साहस के साथ बिना भय के राजा के सम्मुख मौत की भविष्यवाणी कर देता है। परन्तु जब आहाब राजा पश्चाताप करता है तो परमेश्वर उसके नम्र होने के कारण उसे क्षमा कर देते हैं ।
एलिशा ध्यानपूर्वक अपने गुरु एलियाह को देखता रहता है कि किस प्रकार वह

 सेवा करता है और एक अच्छे विश्वासयोग्य शिष्य की भांति सीखते हुए अपने

 गुरु का पीछा करता है । एलियाह यर्दन नदी को कपड़े से मारकर पानी अलग 

कर देता है, एलिशा बहुत दुखी होता है जब उसके गुरु एलियाह जीवित स्वर्ग में

 उठा लिया जाता है उसने अपने जीवन में एसा न तो सुना था न ही देखा था । 

एलिशा भी उसी कपड़े के साथ यर्दन नदी को दो भाग करता है और उसी सेवा 

को दुगनी सामर्थ के साथ आगे बढाता है । मुर्दा जीवित करता है, लोगो को 

भोजन खिलाता है और एलिशा ही एकमात्र ऐसा भविष्यवक्ता बनता है जो 

लोहे को भी पानी में तेरा देता है । उसने जैसा अपने गुरु से मागा था वैसा ही 

पाया कि उसे अपने गुरु से दुगनी सामर्थ मिले ।  


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2 comments:

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