सीधा मार्ग


सीधा मार्गतू अपनी समझ का सहारा न लेना पर संपूर्ण मन से यहोवा परमेश्वर पर भरोषा रखना, उसी को स्मरण करके सब काम करना तब वह तेरे लिए सीधा मार्ग निकलेगा ( नीतीवचन 3:5)


एक बुजुर्ग माता जो खिलौने बेच कर अपना जीवन यापन किया करती थीवो रोज खिलौने का टोकरा लेती और एक छोटा सा चिड़िया का पंख भी लेती और खिलौने बेचने चल पडतीजहाँ कही भी दो रस्ते आते या चौराहा आता तो यह जानने के लिए की आज किस रस्ते में जाना है किस गाँव जाना है वह छोटा पंख निकालती और उसे ऊपर हवा में उछालती, पंख जिस ओर गिरता उसी ओर वह अपना सामान लेकर बेचने चल दिया करती  इसी रीति से वो पंख के गिरने को ऊपर वाले की मर्जी मानकर अपना रास्ता तय किया करती थी परन्तु एक दिन वह बहुत देर से पंख को ऊपर फेक रही थी और बड़ी ही परेशान सी दिख रही थी. वो बार बार पंख उठाती कुछ मन ही मन में बडबडाती और फिर पंख को हवा में उछालती परन्तु आगे नहीं बढती...यह सब दूर से एक आदमी देख रहा था  जो इस बुजुर्ग माता के विषय में जानता था वह उस बुजुर्ग महिला से पास आकर कहा, माता जी क्या कर रही हो...मैं बहुत देर से देख रहा हूँ आप आगे नहीं बढ़ रही हैं मैं कुछ मदद कर सकता हूँ क्या? उस बुजुर्ग महिला का जवाब बड़ा ही रोचक था उसने कहा, “बेटा देख न मैं जाना तो बाँई ओर चाहती हूँ पर यह पंख है कि बार बार मुझे दांई ओर बता रहा है.....”बहुत बार हम भी अपने मन में ठान लेते हैं कि हमें यही चीज चाहिए और फिर परमेश्वर के पास उपवास और प्रार्थना में जाकर बार बार कहते हैं कि प्रभु हमें चाहिए तो यही चीज पर आपकी मर्जी पूरी हो...आपकी इच्छा पूरी हो...




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