Thursday, November 15, 2018

ये मुझे छोडती ही नहीं



बुरी लत


दाखमधु के पीनेवालों में न होना 
(नीतिवचन 23:20)


      कुंडम गाँव में एक व्यक्ति था जिसका पूरा परिवार प्रार्थना में जाता थापरन्तु यह स्वयं गाँव के बुरे लोगों की संगती के कारण नशे की लत में पड़ गया था। जब भी यह अकेला होता ये बुरे मित्र उसे आ घेरते और शराब पीने के लिए ले जाते, जिसके कारण उसकी आर्थिक स्थिति भी बिगड़ चुकी थी। सुबह शाम शराब पीने से इसे तो जैसे लत ही पड़ गई।
जब कोई मित्र नहीं भी आता तो वह अकेले ही जाकर शराब खरीद लाता और पीकर बेहोशी में घर वालों को गन्दी गन्दी गलियां देता। इस बुरी लत के कारण पड़ोसी भी परेशान होने लगे। और तो और वो स्वयं भी परेशान रहता, लोग जब कहते तुम तो एक अच्छे इंसान हो फिर क्यों इस बुरी लत में पड़े हुए हो इसे छोड़ क्यों नहीं देते। इस पर वह कहता, ‘मैं स्वयं इसे छोड़ना चाहता हूँ, परन्तु लगता है अब ये शराब ही मुझे पकड़े हुए है ये मुझे नहीं छोडती...बिना इसके अब तो खाना भी हजम नहीं होता, नींद नहीं आती मैं क्या करूं? एक दिन वो परिवार के सामने रोकर कहने लगा, ‘मैं सचमुच इस लत को छोड़ना चाहता हूँ, यह शराब मुझे नहीं छोड़ रही ...मेरी मदद करो। सबने सलाह दिया आप रविवार को सत्संग में चलो वहां कलीसिया में पास्टर जी से प्रार्थना करवाएँगे तो आपकी लत जरूर छुट जाएगी। वह ख़ुशी ख़ुशी पास्टर के पास गया और अपना सारा दुःख कह सुनाया..बताया किस रीति से शराब उसे छोड़ नहीं रही। पास्टर ने समस्या समझते हुए उससे कहा आप कल सुबह मेरे पास आना, सब कुछ ठीक हो जाएगा।  जब वह व्यकित सुबह सुबह पास्टर के पास आया तो क्या देखा कि पास्टर एक पेड़ को पकडकर शांत भाव से खड़े हुए हैं...
उसने सोचा शायद पास्टर प्रार्थना कर रहे हैं...दो घंटे इंतजार करने के बाद भी जब पास्टर को उसी हालत में देखकर वह व्यक्ति वापस अपने घर चला गया। दुसरे दिन फिर वह पास्टर से मिलने घर से निकला...उसे आता देख तुरंत पास्टर फिर से पेड़ पकड़ लिया और शांत भाव से खड़ा हो गया। यह देखकर व्यक्ति बड़ी हिम्मत करके बोला पास्टर आज मेरे लिए प्रार्थना करेंगे...पास्टर ने कहा मैं तो प्रार्थना करना चाहता हूँ परन्तु ये पेड़ है कि मुझे छोड़ ही नहीं रहा...यह सुनकर व्यक्ति जोर से हंसने लगा और कहने लगा पास्टर जी पेड़ ने आपको नहीं आप ने पेड़ को पकड़ रखा है। आप छोड़ दो पेड़  अपने आप छुट जाएगा...पेड़ आपके पास नहीं आता आप पेड़ के पास जाते हो। इतना सुनते ही पास्टर ने पेड़ को छोडकर कहा...शाबाश तुमने बिलकुल सही कहा, ‘मैं भी तुम्हें यही कहना चाह रहा था। शराब ने तुम्हें नहीं पकड़ा है, वो तुम्हारे पास नहीं आती...यदि इरादा मजबूत हो तो कुछ भी किया जा सकता है...फिर यह शराब क्या चीज है। व्यक्ति सब कुछ समझ चुका था।


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2 comments:

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