बुद्धि कानों से घुसती है





बुद्धि कानों से घुसती है 
"इसलिए जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है, वह उस बुद्धिमान मनुष्य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया, और मेंह बरसा, और बाढ़े आईं और आधियाँ चलीं और उस घर से टकराईं, फिर भी वह नहीं गिरा, क्योंकि उसकी नीवं चट्टान पर डाली गई थीं। परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है पर उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया।  और मेंह बरसा, और बाढे आईं और उस घर से टकराई और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।
(मत्ती 7:24:27 )


मैं बच्चों  को कहानी सुनाते समय अक्सर यह पूछता हूँ। कि परमेश्वर ने हमें एक मुंह और दो कान क्यों दिए हैं । मुंह से तो बोलते भी हैं खाते भी हैं दो दो काम करते हैं, लेकिन कानों से तो केवल एक काम करते हैं सुनने का ।
तो एक मुंह और दो कान क्यों ? तब कई बच्चे मजाक में उत्तर देते हैं कि "एक कान से सुनने के लिए और दूसरा कान निकालने के लिए"।
        लेकिन गंभीरता से विचार करें तो पता चलता है, दो कान हमें ज्यादा सुनने ध्यान से सुनने और एक मुंह कम बोलने के लिए दिया गया है। एक बालक (छात्र) जब ध्यान से सुनता है एक दिन शिक्षक बन जाता है। सुनना सीखने की प्रक्रिया में एक पहला और महत्वपूर्ण कदम है। हम अपने माता-पिता, गुरुजनों की सुनकर ही अपने जीवन और व्यवहार में अच्छी संस्कृति की नींव रखते हैं।
      प्रभु यीशु ने भी सुनने पर जोर दिया है और वो पवित्रशास्त्र में कहते हैं जिनके कान हों वो सुन ले।
 उन्होंने एक कहानी सुनाई कि दो राजमिस्त्री थे जो घर बनाना सीख रहे थे। वे सुंदर महल के समान घर बनाना चाहते थे। दोनों परिश्रमी थे। । दोनों अपने गुरु से सुनते थे सीखते थे। परन्तु दोनों में एक भारी अंतर था, एक राजमिस्त्री तो जैसा सुनता वैसा ही करता था परन्तु दूसरा सुनता अवश्य था परन्तु उसके अनुसार कार्य नहीं करता था।
एक दिन आया जब उनके सीखने का समय पूरा हुआ अब उन्हें यह सिद्ध करना था कि जो कुछ उन्होंने सीखा है उसे प्रमाणित किया जाए। दोनों को अपना अपना महल बनाना था। दोनों के पास पर्याप्त धन था, एक ही समय में दोनों ने अपना अपना महल बनाना आरंभ किया। एक ने गहरी नीव खोद कर उसमें चट्टान के पत्थर रख कर गहरी नींव भरी जिसमें ज्यादा समय लगा। परन्तु दूसरे ने जो सुनता तो था परन्तु अपने जीवन में लागू करके सीखता नहीं था, उसने बारू (रेत) के ऊपर बिना नींव के ही अपना महल बनाने लगा। उसका महल समय से पहले बनकर तैयार होने लगा। वो नींव वाले महल को और उसके बनाने वाले अपनी साथी को देखकर हंसता। परन्तु नींव वाले महल का राजमिस्त्री उसका बुरा नहीं मानता था। एक दिन आया जब दोनों का महल बनकर तैयार हो गया। दोनों खुश थे अपने ग्रहप्रवेश के लिए।
लेकिन जब बारिश का मौसम आया तो आंधी और तूफान में भारी मूसलाधार वर्षा के कारण वह महल जो रेत में बिना नीव के बना था उसकी दीवारें गिर गईं और पूरा महल धराशाई होकर गिर गया। परन्तु जिस महल की नीवं चट्टान पर पड़ी थी। उसका महल आज भी स्थिर था आज उसके मालिक के पास मुस्कुराने का समय था।
प्रभु यीशु ने कहा, "जो मेरी बातों को सुनकर उन्हें मानकर अपने जीवन में लागू भी करता है वो उस बुद्धिमान राजमिस्त्री के समान होगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। परन्तु जो सुनता तो है पर मानता नहीं वो निर्बुद्धि व्यक्ति के समान होगा जिसने अपना घर रेत के ऊपर बनाया। (महल) या घर हमारे जीवन को दर्शाता है आज हमारे सामने एक सवाल है कि हम इन दोनों राजमिस्त्रियों में से किसके समान हैं?
God Bless you...

इन कहानियों को भी अवश्य पढ़ें 


यदि आपके पास हिंदी में कोई सरमन, प्रेरणादायक कहानी, आपकी लिखी कविता या रोचक जानकारी है, जो आप सभी के लिए आशीष के लिए हमारे साथ सेयर करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ ईमेल करें। हमारी id है: rajeshkumarbavaria@gmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ पब्लिश करेंगे धन्यवाद!!

11 comments:

  1. Great work bhaiya. God bless you

    ReplyDelete
  2. Bahot hi sunder drashtant hai. Mere hisab se hame dhyan se sunana chahiye aur fir na keval sunkar tal dena balki sikhaye gaye niyam ke anusar chalna bhi chahiye. Jaise us rajmistri ne kiya jisne apne ghar ki neev gahri khodi aur use majbooti ke sath banay aur ant tak tika raha.

    ReplyDelete
  3. Very encouraging...
    Thank you Bhaiya...

    ReplyDelete
  4. बहुत बहुत धन्यवाद आप सभी के सहयोग का

    ReplyDelete

Thanks for Reading... यदि आपको ये कहानी अच्छी लगी है तो कृपया इसे अपने मित्रो को शेयर करें..धन्यवाद

घमंड. परमेश्वर के साथ चलने की सबसे बड़ी बाधा

मित्रों प्रभु यीशु में आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार, हम कुछ सप्ताह से सीख रहे हैं कि कैसे हम परमेश्वर के साथ-साथ चल सकते हैं...पवित्रश...

Followers