बहरा मेंढक





बहरा मेंढक
"सब प्रकार की बुराई से बचे रहो"
 (1 थिस्सलुनिकियों 5:22)




  • दो मेढक थे, पक्के दोस्त। तालाब के सभी मेढकों से सबसे अधिक उछल कूद करते थे। 

  • एक दिन दोनों चहल कदमी करते हुए दूर तक निकल गए। और वहां एक गहरे गड्ढे में गिर गए। 

  • दोनों ने खूब उछाल मारी परन्तु कुछ भी असर नहीं हो रहा था... गड्ढे के नीचे की ओर दलदल था इसलिए वे उसमें ज्यादा देर तक बैठ नहीं सकते थे...नहीं तो दलदल में धंस कर मर सकते थे...

  • शाम होने को आई इसलिए  अब डर भी लग रहा था अत: उन्होंने जोर जोर से चिल्लाना शुरू किया बचाओ बचाओ। आवाज सुनकर कुछ मेंढक उस गहरे गड्ढे के पास आये...दोनों मेंढको को इस हालत में देखकर सभी को बड़ा दुःख हुआ...

  • उन्होंने अपने सभी रिश्तेदारों को भी बुलवा लिया और सभी जोर जोर से चिल्ला कर कहने लगे, ‘और जोर से कूदो और जोर से कूदो...

  • लगातार कई घंटे कूदते कूदते अब वे थक चुके थे रात भी हो गयी थी। इस पर कुछ ऊपर खड़े मेंढको ने कहना शुरू किया अब इनका कुछ नहीं हो सकता ये तो मर जाएंगे और हमारी पूरी रात भी ख़राब हो रही है। इसलिए उन्होंने अब चिल्लाना शुरू किया मत कूदो, कोई फायदा नहीं है, क्यों अपनी एनेर्जी खराब कर रहे हों...

  • ऊपर वाले की यही मर्जी है...क्या कर सकते हैं मत कूदो....यह सुनकर एक मेंढक थककर बैठ गया और जैसे ही उसने कूदना बंद किया उस दलदल में फंस गया और थोड़ी ही देर में अपने प्राण छोड़ दिए। यह देखकर उपर खड़े सभी मेढकों ने जोर जोर से चिल्लाकर दुसरे मेंढक को हतोत्साहित किया मत कूदो देखो क्या हुआ तुम्हारे साथी का तुम भी कुछ नहीं कर सकते...

  • अरे अभी भी कूद रहे हो...यह तो विधि का विधान है...पहले भी कई बड़े बड़े मेढक मर चुके हैं...मत कूदो क्यों अपनी ताकत लगा रहे हो...लेकिन यह मेढक पर इन बातों को कोई असर नहीं हो रहा था। वह और भी ज्यादा ताकत लगा कर उछल रहा था...

  • पूरी रात लगातार उछलने से गड्ढे की दीवार में धारियां सी पड़ गयी थी और सुबह सुबह उसने पूरी ताकत लगा कर उछाल मारी और बाहर आ गया। बाहर आते ही उसने सभी मेंढकों को हाफ्ते हुए धन्यवाद दिया...

  • और कहा आप लोगों ने जो बाहर आने के लिए उत्साहित किया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद...

  •  सभी मेंढकों के लिए तो यह बड़े आश्चर्य की बात थी उन्होंने उस मेंढक से पूछा वह तुमने कैसे किया हम तो तुम्हें मना कर रहे थे।  उस मेंढक ने बताया वह तो बहरा है उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था...उसे लगा की वे सभी लोग मिलकर उसे निकलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं...

  •  हमें भी दुनिया की नकारात्मक बातों के लिए कभी कभी बहरा बन जाना चाहिए और उन नकारात्मक बातों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। 








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