Wednesday, February 26, 2020

Hindi Bible Study By Sister Anu John / बहन अनु जॉन के द्वारा हिंदी बाइबिल स्टडी (Audio)

बहन अनु जॉन के द्वारा हिंदी बाइबिल स्टडी (ऑडियो)



सिस्टर अनु जॉन परमेश्वर की सेविका हैं, जो अपने पति पास्टर जॉन वर्गिस के साथ परमेश्वर के वचन की शिक्षा देकर सेवा करती हैं l 
नीचे दिए गए ऑडियो लिंक उन्हीं के द्वारा दिए गए  हिंदी बाइबिल स्टडी के भाग हैं...जो गहन अध्ययन के द्वारा तैयार किये गए है...
बाइबल स्टडी सुनने के द्वारा परमेश्वर आपको बहुत आशीष दे...

यदि आपके कुछ सुझाव हैं या इनके द्वारा आप और भी स्टडी सुनना चाहते हैं या आप चाहते हैं की मैं इसी प्रकार और भी ऑडियो इसमें प्रकाशित (पब्लिस) करूं तो कृपया नीचे कमेन्ट में अवश्य बताएं और डेस्कटॉप मोड़ में क्लिक करके फॉलो बटन दबा कर फोलो करें ताकि आपको अपडेट मिलता रहे   धन्यवाद...




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👉आत्मिक जागृति में देरी क्यों (लियोनोर्ड रेवनहिल)






Monday, February 24, 2020

Hindi Audio Sermon by Paul Washer / हिंदी ऑडियो सरमन (पॉल वासर)


सुसमाचार की प्राथमिकता 


सब परमेश्वर की महिमा से रहित हैं 
परमेश्वर का जन और उसका परिवार 

 मसीह का क्रूस  
मसीह के जी उठने का अर्थ भाग 1 

 मसीह के जी उठने का अर्थ भाग 2
सुसमाचार की बुलाहट : पश्चाताप और विश्वास 
सच्चे मसीही का नया  मनुष्यत्व  भाग 1 
  
सच्चे मसीही का नया  मनुष्यत्व  भाग 2
उद्धार की निश्चयता 


Thursday, February 20, 2020

पवित्र आत्मा में प्रार्थना कैसे करें ( लेखक जॉन बनयन)

(ऑडियो) पवित्र आत्मा में प्रार्थना कैसे करें... ( लेखक जॉन बनयन)

लगातार प्रार्थना कीजिए, क्योंकि प्रार्थना आत्मा की ढाल है, परमेश्वर के लिए एक बलिदान और शैतान को चोट पहुंचाने का हथियार है. प्रार्थना मनुष्य को पाप करने से रोकती है और वरना पाप मनुष्य को प्रार्थना करने से रोकता है (जॉन बनयन)


अध्याय-1 सच्ची प्रार्थना (ऑडियो )



सच्ची प्रार्थना

परमेश्वर ने हमें प्रार्थना करने की आज्ञा दी है l उसने हमें सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना करने की आज्ञा दी हैl निवेदन करने वालों की प्रार्थना परमेश्वर की अद्भुत संगती और सहभागिता में पहुंचाती है l इस कारण परमेश्वर ने प्रार्थना को परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत संबंधों में बढ़ने के लिए एक साधन के रूप में नियुक्त किया है
      जब हम बार-बार सक्रियता से प्रार्थना करते हैं प्रार्थनाएं जिनके लिए हम प्रार्थना मांगते हैं और साथ साथ हमारे लिए भी, परमेश्वर से महान प्रत्युत्तर प्राप्त करती है l प्रार्थना हमारे ह्रदयों को परमेश्वर के लिए खोलती है l हमारी प्रार्थनाएँ वे साधन हैं, परमेश्वर जिनके द्वारा हमारे खाली हृदयों को भरपूरी से भरते हैं l हमारी प्रार्थनाओं में हम मसीही परमेश्वर के सामने अपने खाली हदयों को ऐसे खोल सकते हैं जैसे कि मित्र के सामने खोलते हैं और उसकी मित्रता का एक नवीनतम प्रमाण भी पा सकते हैं l
            मैं सार्वजनिक प्रार्थना और व्यक्तिगत प्रार्थना के बीच का अंतर समझाते हुए, बहुत बातें कह सकता हूँ l मैं मन में की जाने वाली और जोर से बोलकर की जाने वाली प्रार्थना का अंतर भी स्पष्ट कर सकता हूँ l आत्मिक वरदानों और प्ररणा के अनुग्रह के बीच जो अंतर है उसे भी समझाया जा सकता है l परन्तु मैंने चुना है कि केवल प्रार्थना के मूल तत्व पर ही चर्चा करूं l जिसके बिना आपके समस्त क्रियाकलाप, जैसे हाथों और आँखों को उठाना ऊँचे स्वर से प्रार्थना करना इत्यादि उद्देश्यहीन बनकर रह जाते हैं l            हमें प्रार्थना के विषय में पवित्र शास्त्र की शिक्षा को सीखना और उस पर अमल करना सीखना चाहिए l पौलुस ने इस बारे में लिखा है और हमारे लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, “मैं आत्मा से प्रार्थना करूंगा”, इस कारण मैं बताऊंगा सर्वप्रथम कि सच्ची प्रार्थना क्या है; दूसरा पवित्र आत्मा से भरकर प्रार्थना करना किसे कहते हैं, चौथा, प्रार्थना के विषय में मैं ने जिन बातों को समझाया है उनके कुछ उपयोग और अनुप्रयोग क्या हैं l
“प्रार्थना ईमानदारी से, अर्थपूर्ण रीति से अपने ह्रदय या आत्मा को परमेश्वर के सम्मुख उंडेलना है,  के माध्यम से पवित्रात्मा की सामर्थ और सहायता में होकर उन बातों के लिए जिनकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की है या जो परमेश्वर के वचन के अनुसार है l प्रार्थना विश्वास सहित, परमेश्वर की इच्छा की आधीनता में होकर की जाती है l”
इस परिभाषा में सात बातें सम्मिलित हैं, जिन पर मैं आगे आने वाले अध्यायों में विस्तार से चर्चा करूंगा l प्रथम, आपकी प्रार्थना ईमानदारी से हो दूसरा आपकी प्रार्थनाएँ अर्थपूर्ण हों, तीसरा मसीह के माध्यम से प्रेमपूर्ण रीति से, परमेश्वर पिता के समक्ष उंडेली जाएं चौथा यदि आप चाहते हैं की आपकी प्रार्थना प्रभावपूर्ण हो, आपको पवित्रात्मा की सामर्थ और सहायता में होकर प्रार्थना करनी चाहिए l पाचवा, परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आपकी प्रार्थनाओं के उत्तर मिले, इसलिए आपको उन बातों के लिए प्रार्थना करना चाहिए जिनकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की है या जो उसके वचन, बाइबिल के अनुसार है l छटवां, आपकी प्रार्थना स्वार्थपूर्ण न हो परन्तु कलीसिया और एनी दूसरों की भलाई को ध्यान में रखकर की जाए l सातवाँ, आपको सदैव विश्वास में और परमेश्वर की इच्छा की आधीनता में होकर प्रार्थना करना चाहिए l 




आत्मिक जागृति में देरी क्यों ? पुस्तक को सुनने के लिए क्लिक करें 

ऑडियो बुक ( आत्मिक जागृति में देरी क्यों }

पुराने नियम का उड़ाऊ पुत्र  

Wednesday, February 19, 2020

आत्मिक हिंदी लघु ऑडियो कहानियां व बाइबिल मनन

आत्मिक हिंदी लघु ऑडियो  कहानियां व बाइबिल मनन



ऑडियो बुक :- आत्मिक जागृति में देरी क्यों / Why Revival Tarries

आत्मिक जागृति में देरी क्यों / Why Revival Tarries 

मोनिका की आवाज में 



ऑडियो सुनने के लिए धन्यवाद परमेश्वर आपको बहुत आशीष दे
यदि आप इस सेवा को आगे बढाने में अर्थात और भी मसीही पुस्तक को आडियो बनाने में तथा सुसमाचार सुनाने में हमारी मदद करना चाहते हैं तो आप इस नम्बर 9718484154 में फोन पे के द्वारा सहायता कर सकते हैं...धन्यवाद ...परमेश्वर आपको बहुत आशीष दे....

Thursday, September 19, 2019

Hindi Audio Sermon

आत्मिक हिंदी लघु ऑडियो  कहानियां व बाइबिल मनन




Monday, April 15, 2019

घमंड. परमेश्वर के साथ चलने की सबसे बड़ी बाधा

मित्रों प्रभु यीशु में आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार,
हम कुछ सप्ताह से सीख रहे हैं कि कैसे हम परमेश्वर के साथ-साथ चल सकते हैं...पवित्रशास्त्र में हम अनेकों ऐसे उदाहरणों को पाते हैं जो परमेश्वर के साथ चले हैं...ऐसे गवाहों का बादल हमें घेरे हुए है...बहुत से प्रभु के लोग हुए जिन्होंने अपनी दौड़ दौड़ी...बहुतों की शुरुआत तो बहुत बढ़िया थी परन्तु मार्ग में वे बहुत सी बाधाओं के कारण अपनी दौड़ पूरी नहीं कर पाए....या यूँ कहें कि कुछ बाधाओं ने उन्हें परमेश्वर के साथ साथ चलने से रोक दिया...उन बाधाओं में से सबसे बड़ी बाधा जो परमेश्वर के साथ चलने से रोकती है वो बाधा है घंमड...सब मन के घमंडियों से परमेश्वर घृणा करता है...
     
      ऐसा ही एक उदाहरण हम पवित्रशास्त्र के 2 इतिहास की पुस्तक के 26 अध्याय में पाते हैं जहाँ उज्जियाह नामक राजा था जो मात्र 16 साल की उम्र में ही राजा बन गया और पांचवी आयत में हम पाते हैं वह परमेश्वर की खोज में लगा रहता था...जब तक वह परमेश्वर की खोज करने में लगा रहा तब तक परमेश्वर ने उसे सफलता दी (उसे भाग्यवान) बनाए रखा...यहाँ हम एक सबक को सीखते हैं कि परमेश्वर स्वयं चाहते हैं कि खोई उन्हें खोजे...उसके मार्ग के खोजी बने रहे....उसके साथ चले...उसकी आज्ञाओं का पालन करें....उसने तो वायदा ही किया है कि, तू पहले उसके धर्म और राज्य की खोज कर और देख बाकी सारी वस्तुएं या सफलता हमारे पीछे हो लेंगी....परमेश्वर अपने साथ साथ चलने वाले को सफल और भाग्यशाली भी बनाता...परमेश्वर के संग चलना अपने आप में एक सफलता और सौभाग्य है.....

लेकिन (2 इतिहास 26:16) में हम देखते हैं कि जब वह सामर्थी हो गया, तब उसका मन फूल उठा...अर्थात वह घमंड से भर गया...वह अहंकारी हो गया....और वह यहाँ तक बिगड़ गया कि उसने परमेश्वर के विरुद्ध विश्वासघात किया...परमेश्वर किसी गरीब भक्त के साथ साथ चल सकता है परन्तु किसी घमंडी धनी...या सामर्थी विश्वासघाती के साथ नहीं चल सकता। राजा उज्जियाह इतना घमंडी हो गया कि परमेश्वर के दासों के मना करने पर भी वह परमेश्वर के मंदिर में धूप जलाने के लिए घुस गया। इस पर परमेश्वर का क्रोध उस पर इस रीति से भड़का कि वह कोढ़ी हो गया...और परमेश्वर के मन्दिर से अर्थात प्रभु की उपस्थिति से उसे भागना पड़ा...

परमेश्वर उज्जियाह राजा के घमंड से इस कदर क्रोधित था कि जब तक वह मरा नहीं तब तक परमेश्वर की महिमा मन्दिर में प्रगट नहीं हुई...(यशायाह 6:1) में लिखा है जिस वर्ष उज्जियाह राजा मरा, मैंने प्रभु को बहुत ही ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा.... 

मित्रों बहुत बार हमारे जीवन में भी किसी न किसी रूप में घमंड रूपी उज्जियाह राजा जीवित रहता है, जो किसी धन के रूप में या शरीर के रूप में या आदत के रूप में,  या ऊंचे पद के रूप में हो सकता है...जब तक हमारे जीवन में भी वो घमंड रूपी उज्जियाह राजा मरेगा नहीं हमारे जीवन में भी प्रभु ऊंचे सिंहासन में विराजमान नहीं हो सकता...प्रथम स्थान नहीं पा सकता...जिस दिन घमंड पूर्ण रूप से मर जाता है...परमेश्वर की पूर्ण महिमा हमारे जीवन में प्रगट हो जाति है...

Hindi Bible Study By Sister Anu John / बहन अनु जॉन के द्वारा हिंदी बाइबिल स्टडी (Audio)

बहन अनु जॉन के द्वारा हिंदी बाइबिल स्टडी (ऑडियो) सिस्टर अनु जॉन परमेश्वर की सेविका हैं, जो अपने पति पास्टर जॉन वर्गिस के साथ परमे...

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