Tuesday, June 16, 2020

तोड़े को तुरंत इस्तेमाल करें ....

*तब जिस को पांच तोड़े मिले थे, उस ने तुरन्त जाकर उन से लेन देन किया, और पांच तोड़े और कमाए।*(मत्ती 25:16)

प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य नाम में आप सभी को आपके भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...दोस्तो रिले रेस में जहाँ धावक अपनी बारी का इन्तजार बड़ी बेसब्री से करते हैं और जैसे ही उनके हाथ में बैटन आता है उसके बाद उसका एक ही काम होता है अपनी पूरी सामर्थ के साथ, अपनी पूरी क्षमता के साथ, पूरी तीव्रता के साथ लक्ष्य की ओर तुरंत भागना...इन्तजार केवल तब तक, जब तक हाथ में बैटन नहीं आता...इन्तजार केवल तब तक जब तक अपनी बारी नहीं आती...

उपरोक्त पद भी हमें यही बताता है...स्मरण रहे अपने द्वितीय आगमन के विषय में अपने प्रिय शिष्यों के समक्ष प्रभु यीशु कुछ रहस्यों को उजागर कर रहे हैं...कि दूर देश राज्य विस्तार हेतु जाते एक स्वामी के तीन दास...तीनो को उनकी क्षमता के अनुसार तोड़े दिए गए... एक को पांच...दुसरे को दो ...तीसरे को एक...तीनों को एक ही काम... इससे लेन देन किया जाए ...इसे इस्तेमाल किया जाए...जिसने समय की नजाकत को समझा...जिसने अवसर को बहुमूल्य जाना वो तुरंत भागा... जिसे पांच तोड़े मिले वह और सोच विचार में समय बिलकुल भी नहीं गवाया...उसे तुरंत इस्तेमाल में लाया....कहावत है Use it or you will loose it….यदि तुमने उसे इस्तेमाल नहीं किया तो अवश्य है वो खो जाएगा....यही कारण है तुरंत उस तोड़े को इस्तेमाल करने के कारण उसने बड़ा प्रतिफल  भी पाया ... 

ओह!!! यदि हमें पता है कि इन तोड़ों का हमें इसका हिसाब भी देना होगा तो हमें कितना न तीव्रता दिखाना होगा ...वो स्वामी जल्द से आने वाला है....उसके आने की आहट सुनाई दे रही है...आओ उसकी शाबाशी लेने के लिए तुरंत खड़े हों...तुरंत इसे इस्तेमाल करें...तुरंत इसे कई गुना बढ़ा दें....प्रभु इन वचनों के द्वारा आप सभी को आशीष दे..

Sunday, June 14, 2020

दूसरों की भलाई के खोजी रहो...


जो यत्न से भलाई करता है वह औरों की प्रसन्नता खोजता है, परन्तु जो दूसरे की बुराई का खोजी होता है, उसी पर बुराई आ पड़ती है। (नीतिवचन 11:27)


प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य नाम में आप सभी को भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...दोस्तों इस वचन को पढने से हमें पुराने नियम की एक घटना स्मरण आती है जहाँ मोर्दकै नाम का ऐसा व्यक्ति है जो दूसरे देश में बंधुआ होने के बावजूद उस देश के प्रति वफादार है...उसे बिकतान और तेरेश नामक दो देशद्रोहियो के विषय में पता चलता है जो राजा की हत्या करना चाहते हैं..(एस्तेर 2:21) यह बात वह किसी तरह राजा तक पहुंचाता है और राजा की जान बच जाती हैं...इस प्रकार मोर्दकै हमेशा भलाई की खोज में रहता है...

लेकिन इस कहानी में उसी देश में हामान नामक एक विलेन (खलनायक) भी रहता है  जो हमेशा दूसरों की बुराई ही ढूंढता रहता है ...उसे बस अपनी बढ़ाई और प्रशंसा सुनने की आदत थी...जब उसने देखा की मोर्दकै उसे नमस्कार नहीं करता...क्योंकि यहूदी अपने परमेश्वर यहोवा को छोड़ और किसी के साम्हने अपना सिर नहीं झुकाते...तो इस दुष्ट हामान के मन में फिर बुराई कौंध गई और उसने...बिना किसी कारण के न केवल मोर्दकै को मारने की वरन उसकी पूरी की पूरी कौम को नाश करने की साजिस कर डाली...उसने अपने घर में एक पचास हाथ ऊंचा खंबा तक लगवा दिया जिसके ऊपर फांसी का फंदा था, ताकि वो मोर्दकै को उसमें जिन्दा लटकवा सके... लेकिन परमेश्वर का धन्यवाद हो वो किसी धर्मी को नाश होने नहीं देता...आखिरकार खलनायक हामान की चाल उलटी पड़ती है और एक रात राजा को नींद नहीं आती और वो मोर्दकै के भलाई की सुधि करता है और उसे पूरे राज्य में उसी खलनायक के हाथों सम्मानित करवाता है... और दूसरी ओर खलनायक हमान को उसी ही के  बनाये फांसी के फंदे में लटकवा दिया जाता है...

आइये अपने देश अपने लोगों के प्रति भलाई के खोजी बने रहें...परमेश्वर इन वचनों के द्वारा आपको आशीष दे

बच्चों को सिखाया करना


हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है; तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। (व्यवस्थाविवरण 6:4-7)


प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य नाम में आप सभी को भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...दोस्तों प्रकृति का एक नियम है कि जो कुछ इस धरती में बोया जाएगा वो ही उगेगा, गेंहू बोयेंगे तो गेंहू उगेगा...अंगूर बोयेंगे तो अंगूर...अर्थात कुछ बोयेंगे तो उगेगा और नहीं बोयेंगे तो नहीं उगेगा....

नहीं नहीं...ऐसा नहीं है....नहीं बोयेंगे तो भी कुछ न कुछ तो उगेगा...पर इस बात की गारेंटी नहीं की कुछ अच्छा ही उगे...हो सकता है कांटे उगें या झाड़ियाँ उगें या कुछ जहरीले  जंगली पौधे उगें...मनुष्य का मन भी ऐसा ही कुछ है इसमें जो बोया जाता है वही जीवन में उगता दिखता है...यदि परिवार एक खेत है तो परमेश्वर उसका मालिक और मां बाप उस खेत के किसान है जो अपने कोमल बच्चों पर आने वाली कई पीढ़ियों के लिए धर्म के बीज बोते हैं....यदि हम नहीं बोयेंगे तो दुनिया रूपी शैतान बोयेगा और हम जानते हैं वो शापित जहरीले बीज बोयेगा...जैसा कि वो अदन की वाटिका से करता आया है...

ऐसा ही तो मिश्र देश में हुआ युसुफ के वंशज इस्राएली लोग समय के साथ साथ अपने आस पास की बातों को सीख कर अपने परमेश्वर को ही भूल गए जिसके कारण न केवल वे अपनी सामर्थ को भूल गए वरन दुसरे देश में गुलाम भी बन गए...चार सौ वर्षों की भयानक दुर्दशा के बाद परमेश्वर ने जब उन्हें अपने दास मूसा के द्वारा उस देश से बाहर निकलवाया और एक नए देश कनान में बसाने से पहले जहाँ दूध और मधु की धाराएं बहती थीं पहुंचाने से पहले यह हिदायत दी...अब वो गलती फिर मत दोहराना...अपने बच्चों को अपने खुदा के बारे में जरूर सिखाना... दुनिया की और शैतान की गुलामी में फिर से मत चले जाना... खुद भी आराधना करना और अपने बच्चों से भी आराधना करवाना....

Friday, June 12, 2020

यहोवा की भुजा (कलीसिया) जाग

*हे यहोवा की भुजा, जाग! जाग और बल धारण कर; जैसे प्राचीनकाल में और बीते हुए पीढिय़ों में, वैसे ही अब भी जाग। क्या तू वही नहीं है जिसने रहब को टुकड़े टुकड़े किया और मगरमच्छ को छेदा?* (यशायाह 51:9)

प्रभु यीशु के अतुल्य नाम में आप सभी को आपके भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...

दोस्तों आत्मिक जागृति में देरी क्यों नामक कालजयी पुस्तक को लिखने वाले अंग्रेजी प्रचारक लियोनोर्ड रेवनहिल जी ने एक बार क्या खूब कहा था, *“यदि कलीसिया का सिर यीशु है तो अवश्य है कि हमें उसकी भुजा होने चाहिए ! जाग, हे परमेश्वर की कलीसिया, जाग...जैसे प्राचीनकाल में और बीते हुए पीढ़ियों में वैसे ही अब भी जाग!*”  कलीसिया के पास धरा की सबसे बड़ी सामर्थ है वो है प्रार्थना...कलीसिया ने जब जब अपनी उन भुजाओं की सामर्थ को समझा है और उसे प्रार्थना में सेनाओं के यहोवा के साम्हने उठाया है तब तब शत्रु का साम्राज्य जड़ से ढा दिया गया है....जब तक मूसा अपना हाथ (अपनी भुजाएं)  उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब तब अमालेक प्रबल होता था। (निर्गमन 17:11) हाँ वो लिव्व्यातान वो पुराना सांप जो तबाही मचाता है... दुआ में उठी हुई भुजाओं से ही बाँधा जा सकता है (अय्यूब 41:1; 42:10)

मेरे विचार से प्रार्थना एक ऐसे बारूद से भरे हुए मिशाइल के समान है जिसे शांत पड़े रहने दिया जाए तो कई वर्षों तक यूं ही निष्क्रिय बना रहता है...उसके साथ बच्चे खेलें तो भी कुछ नहीं होगा यहाँ तक की उसे बच्चे उठा कर दीवार में दे मारे तो भी कुछ नुकसान नहीं होगा...लेकिन उसकी पूरी क्षमता को देखना है तो उसे भारी तोप में पीछे से अग्नि का जबर्दस्त प्रहार देना होगा और तब केवल तब ही वो मिशाइल अपनी पूरी क्षमता को दिखाते हुए विस्फोट होगा और दुश्मनों के गढ़ के चीथड़े उड़ा देगा...

निसन्देह, धर्मी जन की प्रभावशाली प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है (याकूब 5:16) ...इतिहास गवाह है ...की सब कुछ हो सकता है ....ओह्ह  खुदा के एकलौते बेटे के लहू से खरीदी हुई कलीसिया जाग जाए...सेनाओं के यहोवा की भुजा जाग जाए...

Wednesday, June 10, 2020

प्रभु यीशु मसीह का भोजन

यीशु ने उन से कहा, मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं। (युहन्ना 4:34)
प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य नाम में सभी भाई बहनों को आपके भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...
दोस्तों... प्रभु यीशु के लिए आवश्यक शारीरिक भोजन से भी अधिक महत्वपूर्ण कुछ और भोजन था...वो था परमेश्वर का वचन...उन्होने कहा था *मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा* (मत्ती 4:4) ...उनका कहना और करना वास्तव में एक समान था....परमेश्वर का वचन...अर्थात परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने, नरक में जा रही आत्माओं को बचाने और परमेश्वर के राज्य की स्थापना करने के लिए उन्होंने कहा *“उसके घर की धुन मुझे खा जाएगी”* (यूहन्ना 2:17)...
ऐसी ही एक घटना हम सामरिया गाँव में पाते हैं...आज प्रभु यीशु अपने शिष्यों के साथ एक लंबी पद यात्रा, यहूदिया और गलील से होते हुए इस गाँव में पहुंचे हैं...दोपहर के इस चिलचिलाती गर्मी में चेलों को कहने की जरूरत नहीं क्या करना चाहिए...गाँव के बाहर एक कुआं है...लेकिन पानी भरने को कोई साधन नहीं...वो दौड़ते हैं गाँव की कोई दूकान से कहीं से कुछ खाने का इंतजाम हो जाए...प्रभु अकेले कुएं के पास बैठे हैं...इससे पहले चेले आते... एक स्त्री वहां कुँए के पास आती है, पानी भरने...तभी सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज आती है ”मुझे पानी पिला”... और वो पापिन स्त्री जो दुनिया से छिपती छिपाती आज तक जी रही थी...आज उसकी मुलाक़ात जीवन का जल देने वाले खुदा से होती है...वो पहचान जाती है वो प्यासा व्यक्ति जिसने उसके भूत भविष्य सबका खुलासा कर दिया वो और कोई नहीं, वो मसीहा ही है, जिसका सारे पापी मानव को इन्तजार है...ये वो ही है जो पाप में मरती हुई प्यासी आत्माओं को जीवन का वो पानी पिलाता है जो अनन्तकाल का सुख देता है...वो मारे आनन्द से भागी... भाव विभोर होकर...अपना मटका, अपनी रस्सी छोड़कर भागी...इससे पहले देर हो जाए...मेरे गाँव को भी वो जीवन जल मिलना चाहिए...मेरे गाँव की भी उस खुदा से मुलाक़ात होनी चाहिए....अब उसे केवल अपनी चिंता नहीं...अपने मटके अपनी रस्सी की चिंता नहीं....सुनो.. सुनो... सुनो... गाँव वालो आज मैंने खुदा को देखा है...आज मैं जीवन दाता से मिली हूँ...मेरे मसीहा से मिली हूँ ...पल भर में पूरा का पूरा गाँव इकट्टा हो गया....
तभी चेले खाना लेकर वापस आते हैं...और सामने यह अद्भुत मंजर देखकर...धीरे से हिम्मत करके रोटी आगे बढाते हुए एक शिष्य कहता है ...प्रभु खाना....प्रभु के चेहरे से जैसे सारी थकान दूर हो चुकी है...अब मुझे इस रोटी की आवश्यकता नहीं....लोगो को जीवन जल मिल गया...और जो मुझे चाहिए था वो मेरा भोजन मिल गया....”मेरा भोजन यह है कि अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करूँ और उसका कार्य पूरा करूँ...आओ उसके भोजन का इंतजाम करें...आओ मिलकर उसका काम पूरा करें....प्रभु में आपका अपना भाई राजेश....

अंत में वो हमारी आशा पूरी करेगा


जब बहुत दिनों तक न सूर्य न तारे दिखाई दिए, और बड़ी आंधी चल रही थी, तो अन्त में हमारे बचने की सारी आशा जाती रही।
….परन्तु अब मैं तुम्हें समझाता हूं, कि ढाढ़स बान्धो; क्योंकि तुम में से किसी के प्राण की हानि न होगी, केवल जहाज की। (प्रेरितों के काम 27:20-22)

प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य नाम में सभी भाई बहनों को आपके भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...दोस्तों एक बार किसी बाइबल के शिक्षक ने सन्डे स्कूल के छात्रों से सवाल किया, “क्या तुममें से कोई प्रकाशित वाक्य की पूरी पुस्तक को कुछ शब्दों में कह सकता है” एक बच्चे ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया यह तो बहुत ही सरल है...शिक्षक ने बड़ी उत्सुकता के साथ उसकी ओर देखकर कहा बोलो... बच्चा बड़ी ही दृढ़ता से उत्तर दिया यही कि...*यीशु जीत गया* यीशु विजयी हुआ.... जब हमने किसी फ़िल्म को अंत तक देखा है और उसे दुबारा देखने का अवसर मिले तो, हम बीच में नायक को शत्रुओं से घिरे हुए देखकर हैरान नहीं होते, परेशान नहीं होते...जब हमारे इर्द गिर्द बैठे लोग घबराए हुए होते हैं हमे मालूम होता है हमारा नायक तो जीत चुका है...

एक ऐसे ही दौर से विश्वास की अच्छी दौड़ दौड़ने वाले संत पौलुस को जाना 

पड़ा...जब सूबेदार और सिपाहियों ने उसे कैद करके समुद्र के रास्ते से ले जा 

रहे थे कैसर के पास न्याय के लिए ले जा रहे थे...एक बड़ी भयंकर मुसीबत

 का सामना करना पड़ा...आंधी से जहाज टूट गया...सारी भोजन सामग्री नाश हो गई...भूख से बेहाल .., मौसम इतना खराब की कई दिनों तक सूरज और चाँद भी नहीं दिखा .... आशा की कोई किरण नहीं...दूर दूर तक मौत का भय दिखाने वाला समुद्र...और रूह को कंपा देने वाली आंधी के बीच बुरे हाल में कई दिन बीत गए...  तब उनके मध्य परमेश्वर का दास पौलुस परमेश्वर की ओर से प्रतिज्ञा पाकर कहता है...ढाढस बांधो...हिम्मत रखो...हौसला रखो...तुम नहीं मरोगे(प्रेरित 27:22) ...क्योंकि मैं परमेश्वर पर भरोसा रखता हूँ, उसने जैसा मुझसे कहा है वैसा ही होगा...जो जानता है अंत में क्या होने वाला है उसे कोई डर नहीं होगा...हर कठिन समय में हर युग में खुदा अपने लोगो पर स्वयं को प्रकट करता आया है तब वे ऊंची आवाज में कहते हैं...मुझे तो निश्चय है, कि मेरा छुडाने वाला जीवित है, और वह अंत में पृथ्वी पर खड़ा होगा( अय्यूब 19:25) ...दोस्तों जब सैनिक और सूबेदार निराशा भरे मौजूदा हालात का वर्णन कर रहे थे पौलुस की निगाहें परमेश्वर से आशा पा रही थीं....आइये वर्तमान निराशा भरी खबरों को नजरअंदाज करें और अपनी निगाहें आशा के दाता पर लगाएं...उसने सारे संसार को जीत लिया है...और अंत में वो हमारी आशा पूरी करेगा...परमेश्वर इन वचनों के द्वारा आपको आशीष दे आपका भाई राजेश...   

Sunday, June 7, 2020

हे प्रभु मन की आखें खोल...हे प्रभु पर्दा हटा...हे प्रभु अपना तेज दिखा

तब एलीशा ने यह प्रार्थना की, हे यहोवा, इसकी आंखें खोल दे कि यह देख सके। तब यहोवा ने सेवक की आंखें खोल दीं, और जब वह देख सका, तब क्या देखा, कि एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है।( 2 राजा 6:17) 

प्रभु यीशु के अतुल्य नाम में आप सभी को भाई राजेश का प्यार भरा जय मसीह की...उपरोक्त घटना परमेश्वर के चुने हुए लोग इस्राएल की है जब आराम के राजा ने बड़े दल बल और बड़ी सेना के साथ प्रभु के लोगों पर चढाई कर दी उस समय परमेश्वर ने अपने एक दास एलिशा को अद्भुत रीति से इस्तेमाल किया और उसे वर्तमान और भविष्य की बाते बता बता कर न केवल अपने लोगों की सुरक्षा की वरन दुश्मन के सारे मनसूबो पर अनेको बार  पानी फेर दिया...इस बार दुश्मन का हमला पूरी योजना के साथ खुदा के खादिम पर ही होता है...रात को ही शत्रु की सेना ने पूरी रीति से चारो ओर से प्रभु के दास को घेर ली है...

 उस समय जब चारो ओर दहशत और डर का माहौल है तब बेखौफ परमेश्वर का दास अपने डरे हुए सहमे हुए दास के लिए दुआ करता है,... "हे खुदा इसकी आँखे खोल दे .... दोस्तों आँख शरीर का दिया है लेकिन यदि आँख ही अंधकारमय हो तो अन्धकार कितना भयानक होगा...लेकिन शारीरिक आँख से भी ज्यादा जरूरी है मन की आँखें जिसे संत पौलुस बुद्धि की आँखे कहते हैं...जिस पर पर्दा पड़ा है...आखें है पर दिखता नहीं...कुछ चीजें दिखती हैं कुछ अनदेखी हैं...यदि कुछ अदृश्य शक्तियाँ हमारे विरोध में हैं तो कुछ हमारे पक्ष में भी हैं...और जो हमारी ओर हैं, वह उनसे अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं...जो हमारी ओर हैं वो उनसे कहीं अधिक सामर्थी हैं  (2 राजा 6:16) लेकिन उन चीजों को देख पाएं वो आँख जरूरी है...उस महान सहायता को पहचान पाएं वो मन का उजाला जरूरी है...जिसके लिए उस आँख में पड़ा हुआ पर्दा हटना जरूरी है...तेजोमय सुसमाचार का उजियाला ही वो सामर्थ है जो पर्दा हटा सकता है...(2 कुरुन्थियों 4:3-4)
हे प्रभु वो पर्दा हटा....
हे प्रभु अपना तेज दिखा ....
प्रभु इन वचनों के द्वारा हम सभी को आशीष दे...आपका अपना भाई राजेश 

तोड़े को तुरंत इस्तेमाल करें ....

*तब जिस को पांच तोड़े मिले थे, उस ने तुरन्त जाकर उन से लेन देन किया, और पांच तोड़े और कमाए।*(मत्ती 25:16) प्रभु यीशु मसीह के अतुल्य ना...

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